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तमिलनाडु में कांग्रेस की रणनीति पर मंथन, DMK संग सत्ता साझेदारी पर खड़गे-राहुल लेंगे अंतिम फैसला!

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AIN NEWS 1: तमिलनाडु में आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति पर नए सिरे से काम शुरू कर दिया है। राज्य में लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ गठबंधन में चल रही कांग्रेस अब सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सत्ता में अपनी ठोस भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहती है। इसी रणनीतिक बदलाव के बीच पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को हाल ही में हाईकमान की ओर से कड़ी फटकार लगाए जाने की खबर सामने आई है, जिसने तमिलनाडु कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

कांग्रेस को क्यों मिली फटकार?

सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु कांग्रेस के एक बड़े नेता ने DMK के साथ ‘पावर शेयरिंग’ को लेकर सार्वजनिक मंच पर ऐसा बयान दिया, जिसे पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता के दायरे में माना। कांग्रेस हाईकमान का स्पष्ट संदेश है कि गठबंधन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर कोई भी नेता अपनी व्यक्तिगत राय सार्वजनिक तौर पर नहीं रखेगा। पार्टी चाहती है कि ऐसे सभी फैसले सामूहिक हों और शीर्ष नेतृत्व की सहमति से ही सामने आएं।

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इसी वजह से संबंधित नेता को यह साफ कर दिया गया कि गठबंधन की शर्तें तय करना राज्य इकाई का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व का विशेषाधिकार है। पार्टी के अंदर यह भी संकेत दिया गया है कि अनुशासन से समझौता करने वालों पर आगे सख्त कार्रवाई हो सकती है।

DMK-कांग्रेस गठबंधन की मौजूदा स्थिति

तमिलनाडु की राजनीति में DMK और कांग्रेस का गठबंधन नया नहीं है। दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के साथ चुनाव लड़ते आ रहे हैं। हालांकि, सत्ता में हिस्सेदारी का मुद्दा अक्सर कांग्रेस के लिए चुनौती बना रहा है। DMK सरकार में कांग्रेस की भूमिका सीमित रही है, जिसे लेकर पार्टी के भीतर असंतोष समय-समय पर उभरता रहा है।

अब जबकि चुनाव नज़दीक हैं, कांग्रेस चाहती है कि वह सिर्फ समर्थन देने वाली सहयोगी न रहकर सरकार में निर्णायक भूमिका निभाए। यही वजह है कि ‘पावर शेयरिंग’ का मुद्दा पार्टी के भीतर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।

हाईकमान का फोकस: एकजुटता और अनुशासन

कांग्रेस नेतृत्व इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है कि तमिलनाडु में किसी भी तरह का अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक नहीं होना चाहिए। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दोनों का मानना है कि गठबंधन की राजनीति में एकजुटता सबसे बड़ा हथियार होती है।

इसी सोच के तहत राज्य इकाई को यह संदेश दिया गया है कि मीडिया में बयानबाजी से बचा जाए और सभी रणनीतिक मसलों को पार्टी फोरम के भीतर ही उठाया जाए। कांग्रेस को डर है कि यदि आंतरिक असहमति बाहर आई, तो इसका सीधा फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं।

खड़गे-राहुल के फैसले पर टिकी निगाहें

अब तमिलनाडु कांग्रेस की दिशा और दशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी DMK के साथ गठबंधन की शर्तों को लेकर क्या फैसला लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता तमिलनाडु की राजनीतिक ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लेने के पक्ष में हैं।

एक ओर कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वह DMK के साथ रिश्तों में किसी तरह की कड़वाहट भी नहीं चाहती। यही संतुलन बनाना कांग्रेस नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

चुनावी गणित और कांग्रेस की मजबूरी

तमिलनाडु में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है। पिछले चुनावी अनुभव बताते हैं कि DMK के साथ गठबंधन कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व यह जोखिम नहीं लेना चाहता कि पावर शेयरिंग के मुद्दे पर रिश्ते बिगड़ें।

हालांकि, कांग्रेस यह भी महसूस कर रही है कि बिना सत्ता में हिस्सेदारी के पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ती है। यही वजह है कि नेतृत्व एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें गठबंधन भी बना रहे और कांग्रेस को सम्मानजनक भूमिका भी मिले।

आने वाले दिनों में क्या संकेत?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और DMK के बीच बंद कमरे में कई दौर की बातचीत हो सकती है। इसमें सीट बंटवारे के साथ-साथ सरकार बनने की स्थिति में मंत्रालयों और जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा संभव है।

कांग्रेस हाईकमान यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि तमिलनाडु में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मजबूत हो और चुनावी रणनीति एक स्पष्ट दिशा में आगे बढ़े।

तमिलनाडु में कांग्रेस इस वक्त एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ गठबंधन की मजबूरी है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का हर फैसला बेहद अहम होने वाला है। अब सबकी निगाहें मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी पर टिकी हैं, जिनके फैसले से यह तय होगा कि DMK-कांग्रेस गठबंधन आने वाले चुनावों में किस रूप में सामने आएगा।

Ahead of the Tamil Nadu elections, the Congress party is recalibrating its political strategy to strengthen its alliance with the DMK while seeking a meaningful role in power sharing. Following internal disciplinary action against a Congress leader, the party has made it clear that final decisions on the DMK-Congress alliance, seat sharing, and power sharing will be taken by Mallikarjun Kharge and Rahul Gandhi. The move highlights Congress’s focus on unity, discipline, and strategic balance in Tamil Nadu politics.

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