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संसद में महिला आरक्षण पर गरमाई बहस, मुस्लिम महिलाओं को लेकर आमने-सामने आए अखिलेश यादव और अमित शाह!

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AIN NEWS 1: गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए गए। इन विधेयकों को लेकर संसद के भीतर राजनीतिक माहौल गरमा गया। समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के बीच जोरदार बहस देखने को मिली।

बहस का मुख्य मुद्दा महिलाओं को मिलने वाले 33% आरक्षण के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं को इसमें शामिल करने को लेकर था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच इस विषय पर सीधा टकराव देखने को मिला।

मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर क्या बोले अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की “आधी आबादी” यानी महिलाओं को आरक्षण देना जरूरी है, लेकिन इसमें सभी वर्गों की महिलाओं को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने खास तौर पर पूछा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए सरकार की क्या योजना है। उनके अनुसार, अगर आरक्षण में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को शामिल नहीं किया गया, तो यह अधूरा सशक्तिकरण होगा।

अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है और असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है।

अमित शाह का जवाब: धर्म के आधार पर आरक्षण संभव नहीं

अमित शाह ने सपा के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देने का सवाल ही नहीं उठता।

शाह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वह अपने चुनावी टिकट पूरी तरह मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, इसमें भाजपा को कोई आपत्ति नहीं है।

धर्मेंद्र यादव का आरोप: संविधान के खिलाफ काम कर रही सरकार

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा, तब तक यह कानून अधूरा रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान की भावना के खिलाफ काम कर रही है और समाज के एक बड़े वर्ग को नजरअंदाज कर रही है।

कांग्रेस का भी विरोध

संसद के बाहर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा आरक्षण के नाम पर समाज में विभाजन पैदा कर रही है।

उनके अनुसार, सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने और राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे फैसले ले रही है।

महिला आरक्षण बिल में क्या है प्रस्ताव

सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधन विधेयकों में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं:

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण

यह आरक्षण 2029 से लागू करने का प्रस्ताव

लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना

राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें

कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी

इन सभी बदलावों को लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया जरूरी होगी।

परिसीमन को लेकर भी उठा विवाद

परिसीमन यानी सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर भी संसद में विवाद देखने को मिला। सपा और अन्य विपक्षी दलों ने मांग की कि पहले जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही परिसीमन हो।

अखिलेश यादव ने कहा कि बिना सही आंकड़ों के परिसीमन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने जातीय जनगणना की भी मांग उठाई।

अमित शाह का दावा: जनगणना जारी है

अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में जनगणना की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जातीय जनगणना पर भी काम कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी घरों की गिनती हो रही है और बाद में लोगों की गणना के दौरान जाति से जुड़ा डेटा भी इकट्ठा किया जाएगा।

यूपी समेत कई राज्यों को फायदा

प्रस्तावित परिसीमन के बाद कुछ राज्यों को लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी का फायदा मिलने की संभावना है। इनमें सबसे ज्यादा लाभ उत्तर प्रदेश को मिल सकता है।

अनुमान के अनुसार:

उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 140 तक हो सकती हैं

बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी सीटें बढ़ेंगी

वहीं, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों जैसे तमिलनाडु और केरल को सीटों में अनुपातिक कमी का सामना करना पड़ सकता है।

सियासी नजरिया: चुनावी रणनीति या सामाजिक सुधार?

इस पूरे विवाद को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है।

वहीं, भाजपा का कहना है कि यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक फैसला है।

संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर हुई यह बहस सिर्फ एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक न्याय, धर्म, जाति और राजनीति के कई पहलू जुड़े हुए हैं।

मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने का मुद्दा आने वाले समय में और भी बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। वहीं, परिसीमन और जनगणना जैसे मुद्दे भी इस बहस को और गहराई देते हैं।

अब देखना होगा कि यह बिल किस रूप में पारित होता है और इसका देश की राजनीति और समाज पर क्या असर पड़ता है।

The Parliament debate between Akhilesh Yadav and Amit Shah over Muslim women reservation and the Women Reservation Bill 2026 has sparked nationwide discussion. The bill proposes 33% reservation for women in Lok Sabha and state assemblies from 2029, along with increasing Lok Sabha seats to 850 through delimitation. The issue of caste census, religious reservation, and political representation has intensified the BJP vs SP political clash in India

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