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कोडीन सिरप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो भाइयों को राहत, सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर!

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AIN NEWS 1: कोडीन कफ सिरप से जुड़े एक चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सहारनपुर निवासी दो सगे भाइयों — विभोर राणा और विशाल सिंह — को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दोनों आरोपियों को सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी जांच एजेंसी की ओर से बुलाया जाएगा, उन्हें तत्काल उपस्थित होना होगा।

यह आदेश जस्टिस करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। हाईकोर्ट ने दोनों भाइयों को 5 जनवरी 2026 तक अंतरिम जमानत दी है और इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई भी तय की गई है।

⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना कि मौजूदा परिस्थितियों में आरोपियों को जांच में सहयोग का अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जमानत पूरी तरह शर्तों के अधीन होगी। यदि दोनों में से कोई भी आरोपी जांच में बाधा डालता है या अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करता, तो जमानत रद्द की जा सकती है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आरोपियों को जांच अधिकारी के समक्ष हर बार पेश होना होगा और किसी भी तरह से साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी।

🧪 क्या है कोडीन सिरप मामला?

यह मामला कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप की कथित अवैध बिक्री और तस्करी से जुड़ा हुआ है। कोडीन एक नियंत्रित मादक पदार्थ (controlled substance) है, जिसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में चिकित्सकीय सलाह पर ही किया जा सकता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसके दुरुपयोग और अवैध व्यापार के कई मामले सामने आए हैं।

इसी कड़ी में सहारनपुर से जुड़े इस केस में विभोर राणा और विशाल सिंह के नाम सामने आए थे, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की और मामला कोर्ट तक पहुंचा।

🧑‍⚖️ आरोपियों की दलील

जमानत याचिका के दौरान आरोपियों की ओर से यह दलील दी गई कि वे जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि मामले में जांच अभी जारी है और इस स्तर पर हिरासत की आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह अंतरिम राहत देने का फैसला किया।

🏛️ राजनीतिक और सामाजिक चर्चा

इस मामले ने उस वक्त और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि विभोर राणा एक सामाजिक संगठन ‘श्री राम सेवा संगठन’ से जुड़ा हुआ है और खुद को उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बताता है। इसके अलावा, वह कथित तौर पर आगामी जिला पंचायत चुनाव की तैयारियों में भी जुटा हुआ था।

सोशल मीडिया पर हाल ही में विभोर राणा की कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें वह उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कई बीजेपी नेताओं के साथ नजर आ रहा है। हालांकि, इन तस्वीरों को लेकर अब तक किसी आधिकारिक राजनीतिक समर्थन की पुष्टि नहीं की गई है।

📱 सोशल मीडिया पर बहस

जमानत की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रभावशाली लोगों को जल्दी राहत मिल जाती है।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिम जमानत का मतलब दोषमुक्ति नहीं होता, बल्कि यह केवल जांच के दौरान दी गई अस्थायी राहत होती है।

🔍 आगे क्या?

अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को होगी। तब तक जांच एजेंसियां अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकती हैं। यदि कोर्ट को यह लगता है कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं या नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, तो जमानत रद्द भी की जा सकती है।

⚠️ कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानून जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में कोर्ट आमतौर पर यह देखती है कि:

आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं

जांच में सहयोग की संभावना

समाज पर संभावित प्रभाव

इन्हीं बिंदुओं के आधार पर अंतरिम जमानत दी जाती है।

The Allahabad High Court’s Lucknow Bench has granted conditional interim bail to Saharanpur-based brothers Vibhor Rana and Vishal Singh in the high-profile codeine syrup case. The court directed both accused to fully cooperate with the investigation and appear whenever required by authorities. The case, involving the alleged illegal trade of codeine-based cough syrup in Uttar Pradesh, has attracted attention due to its legal and political angles. The next hearing is scheduled for January 5, 2026.

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