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गढ़मुक्तेश्वर मेला बनेगा मिनी कुंभ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालु सुविधा के कड़े निर्देश!

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AIN NEWS 1 हापुड़ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि इस वर्ष गढ़मुक्तेश्वर में आयोजित होने वाला कार्तिक मेला ‘मिनी कुंभ’ के रूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक और पौराणिक नगर केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक भी है। हर वर्ष यहां लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और दीपदान के लिए आते हैं, इसलिए इस बार की तैयारियों को और अधिक भव्य, अनुशासित और सुरक्षित बनाया जाएगा।

रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं गढ़मुक्तेश्वर पहुंचकर मेले की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने गंगा पूजन किया और घाटों, बाजारों तथा अस्थायी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार कार्तिक मेला न केवल आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि स्वच्छता, अनुशासन और समन्वय का आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।

मिनी कुंभ की तरह होगा आयोजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़मुक्तेश्वर का कार्तिक मेला अब मिनी कुंभ के स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। इस मेले में हर वर्ष लगभग 40 से 45 लाख श्रद्धालु गंगा तटों पर स्नान, दीपदान और पितृ तर्पण करने आते हैं। इस बार सरकार की कोशिश है कि मेले की भव्यता कुंभ जैसी दिखाई दे — जिसमें न केवल धार्मिक आस्था झलके, बल्कि प्रदेश की संस्कृति, लोक परंपरा और पर्यावरण चेतना भी प्रदर्शित हो।

योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी तैयारियां समयबद्ध और मानक के अनुरूप पूरी की जाएं। उन्होंने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की विशेष तैनाती के निर्देश दिए ताकि गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घाटों पर पर्याप्त चेकर प्लेट, रेस्क्यू बोट्स, सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन निगरानी की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही हेल्पलाइन सेंटर और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से पूरे मेले की सतत मॉनिटरिंग की जाएगी।

गंगा घाटों की स्वच्छता और सुरक्षा सर्वोपरि

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गंगा तटों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिया कि मेले में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

कचरा संग्रहण, बोतल निपटान और अस्थायी शौचालयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली लागू की जाए ताकि गंगा में किसी भी प्रकार का प्रदूषण न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि घाटों पर चेंजिंग रूम, साफ-सुथरे शौचालय, और कचरा निस्तारण वाहन की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि “गढ़मुक्तेश्वर का यह मेला स्वच्छता और अनुशासन का संदेश देने वाला होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसे एक आदर्श आयोजन के रूप में देखें।”

यातायात और सुरक्षा पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार 20 से 25 किलोमीटर के दायरे में यातायात डायवर्जन योजना लागू की जाएगी। ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार का जाम या अव्यवस्था न हो।

उन्होंने कहा कि पार्किंग स्थलों पर वाहनों की सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और प्रसारण प्रणाली को मजबूत किया जाए। पुलिस और यातायात विभाग चौबीसों घंटे चौकन्ना रहे। गंगा में स्नान के दौरान एनडीआरएफ की पेट्रोलिंग टीम लगातार सक्रिय रहे।

योगी ने यह भी निर्देश दिया कि कटान क्षेत्रों में सिंचाई विभाग द्वारा ड्रेजिंग कार्य जल्द पूरा किया जाए ताकि गंगा के प्रवाह में कोई बाधा न आए। उन्होंने कहा कि “श्रद्धालु अनुशासित रहें और सुरक्षा बल उन्हें मार्गदर्शन देते रहें — यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

सुविधाएं और स्वास्थ्य सेवाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेले में पर्याप्त पेयजल, स्वास्थ्य शिविर, अस्थायी अस्पताल, और फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित किए जाएं।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि एंटी-स्नेक वैनम और एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति के लिए डॉक्टरों, एंबुलेंस और बचाव टीमों की तैनाती रहे। उन्होंने कहा, “श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए हर सुविधा को जमीन पर लागू किया जाए।”

संस्कृति और आस्था का संगम

मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़मुक्तेश्वर का मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि उत्तर प्रदेश की संस्कृति और लोक जीवन का भी उत्सव है।

मेले में रासलीला, कृष्णलीला, लोकगायन, और लोकनृत्य के माध्यम से पारंपरिक संस्कृति को जीवंत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “गढ़मुक्तेश्वर का मेला गंगा, गाय और गांव की आत्मा को दर्शाता है। यह हमारे लोक जीवन की गहराई और भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।”

अवैध वसूली पर रोक और समन्वय पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या अवैध वसूली न की जाए। पशुओं के चारे और जलपान की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात स्वयंसेवकों के भोजन-पानी और विश्राम की व्यवस्था उचित हो। सभी विभाग — पुलिस, स्वास्थ्य, नगर पालिका, विद्युत, पर्यटन और आपदा प्रबंधन — आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि मेला अनुशासित और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।

विद्युत और प्रकाश व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने विद्युत विभाग को निर्देश दिया कि पूरे मेला क्षेत्र में निरंतर और सुरक्षित बिजली आपूर्ति रहे।

उन्होंने कहा कि सभी स्थानों पर इलेक्ट्रिक सेफ्टी का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे।

मेला क्षेत्र को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को भव्यता और उत्सव का अनुभव हो।

पौराणिक महत्व और ऐतिहासिक धरोहर

गढ़मुक्तेश्वर का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत प्राचीन है।

स्कंद पुराण और महाभारत में इसका उल्लेख एक ऐसे पवित्र तीर्थ के रूप में मिलता है, जहां गंगा स्नान और तर्पण से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद युधिष्ठिर, अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहीं गंगा में स्नान किया था।

इसी पावन स्थल पर भगवान परशुराम ने मुक्तेश्वर महादेव की स्थापना की थी। इसलिए यह स्थान केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इतिहास और अध्यात्म का जीवंत संगम है।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गढ़मुक्तेश्वर का यह आयोजन उत्तर प्रदेश की आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का दर्पण है।

उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य है कि यह मेला श्रद्धा, अनुशासन और स्वच्छता का आदर्श उदाहरण बने। हर श्रद्धालु यहां से शांति, सकारात्मकता और गंगा माता का आशीर्वाद लेकर लौटे।”

मुख्यमंत्री ने मेला क्षेत्र में बने मूढ़े के स्टोर का भी निरीक्षण किया और स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानीय रोजगारों को बढ़ावा देना ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

गढ़मुक्तेश्वर का यह मेला न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक धार्मिक अवसर है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण भी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से यह मेला अब “मिनी कुंभ” के रूप में और अधिक भव्य, अनुशासित व स्वच्छ स्वरूप में दिखाई देगा।

गंगा तटों की आस्था, सुरक्षा व्यवस्था की सुदृढ़ता और प्रशासनिक समन्वय मिलकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएंगे।

The Garhmukteshwar Mela 2025, to be celebrated as a Mini Kumbh, has been announced by Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath. The event will attract over 4 million devotees for Ganga Snan and Deepdan rituals at the sacred ghats. With enhanced NDRAF and SDRF deployment, drone surveillance, and a strict ban on single-use plastic, the fair aims to promote cleanliness, discipline, and spirituality. This initiative will not only revive Garhmukteshwar’s religious heritage but also highlight Uttar Pradesh’s cultural and tourism potential on a global level.

 

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