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गाजियाबाद में धर्मांतरण का खुलासा: केरल का पादरी और घर मालिक गिरफ्तार, अनुसूचित जाति को बनाया जा रहा था निशाना

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AIN NEWS 1 | उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक घर के अंदर प्रार्थना सभा के बहाने धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। यह मामला गाजियाबाद के थाना क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र के अंतर्गत राहुल विहार कॉलोनी का है, जहां एक स्थानीय निवासी प्रेमचंद जाटव के घर में यह पूरा आयोजन हो रहा था।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हर रविवार को यहां बड़ी संख्या में अनुसूचित जातियों के लोगों को बुलाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था। पुलिस को जब इस गतिविधि की सूचना मिली, तो मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए केरल के निवासी पादरी विनोद और घर के मालिक प्रेमचंद जाटव को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

🔵 शिकायत से खुला राज

इस मामले की शिकायत राहुल विहार के ही निवासी प्रबल गुप्ता ने दी थी। उन्होंने बताया कि प्रेमचंद जाटव के घर में हर रविवार को भीड़ इकट्ठा होती है, जहां ईसाई धर्म की प्रार्थनाएं कराई जाती हैं और लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया जाता है।

प्रबल ने जब लगातार इन गतिविधियों को देखा, तो उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत की। इसके बाद थाना क्रॉसिंग रिपब्लिक की पुलिस ने छापेमारी कर इस पूरे प्रकरण का भंडाफोड़ किया।

 

🟢 पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

घटना की पुष्टि करते हुए एसीपी वेव सिटी प्रिया श्री पाल ने जानकारी दी कि शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई की गई। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो घर में दर्जनों लोग पहले से मौजूद थे। वहां केरल का रहने वाला पादरी विनोद प्रार्थना सभा करवा रहा था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेने का प्रयास किया, तो कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। बावजूद इसके, पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार पादरी विनोद फिलहाल साहिबाबाद थाना क्षेत्र में रहता है, लेकिन वह मूल रूप से केरल का निवासी है। पुलिस का दावा है कि वह हर रविवार को प्रेमचंद जाटव के घर आता था और प्रार्थना के नाम पर धर्मांतरण की कोशिश करता था।

 

🟠 प्रलोभनों से धर्मांतरण की कोशिश

पुलिस के अनुसार, इस सभा में अनुसूचित जातियों से जुड़े लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता था। उन्हें आर्थिक सहायता, इलाज, बच्चों की शिक्षा और अन्य प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता था।

स्थानीय निवासियों ने भी पुलिस को बताया कि इस घर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। शिकायतकर्ता प्रबल गुप्ता ने बताया कि उन्हें आशंका थी कि प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण कराया जा रहा है, और पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर दी।

 

🔵 प्रेमचंद पहले ही बदल चुका था धर्म

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घर का मालिक प्रेमचंद जाटव पहले ही ईसाई धर्म अपना चुका है। उसने कई साल पहले ही धर्म परिवर्तन कर लिया था। उसी के घर में पादरी विनोद हर सप्ताह प्रार्थना कराने आता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यह सिर्फ एक पारिवारिक सभा लगती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें बाहरी लोग भी जुड़ने लगे और संडे मास की तर्ज पर आयोजन होने लगे।

 

🔴 कानूनी कार्रवाई शुरू

पुलिस ने इस मामले में धर्मांतरण से संबंधित सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह का संबंध किसी बड़े नेटवर्क या संस्था से है।

फिलहाल पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित स्थानों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है और धर्मांतरण से जुड़े अन्य मामलों को भी खंगाला जा रहा है।

 

🟢 दूसरे पक्ष की सफाई

हालांकि, दूसरी ओर प्रेमचंद के करीबी लोगों का कहना है कि वह पहले से ही ईसाई धर्म का अनुयायी है और यह पूरी तरह धार्मिक आस्था के तहत किया गया आयोजन था, कोई दबाव या लालच नहीं दिया गया। उनके अनुसार, यह एक शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा थी, जिसमें कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं हुई।

 

🔴 क्या कहता है कानून?

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर सख्त कानून लागू हैं। 2021 में योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश लागू किया था, जिसके तहत प्रलोभन, धोखे, जबरदस्ती या शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

इस मामले में भी यदि यह साबित हो जाता है कि धर्म परिवर्तन किसी प्रलोभन या छल से कराया गया, तो अभियुक्तों को 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

 

🔵 समाज में बन रही चिंताजनक प्रवृत्ति

यह घटना सिर्फ एक isolated case नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में धार्मिक आस्था की आड़ में धर्मांतरण की गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं। खासकर अनुसूचित जातियों और गरीब तबके को लक्षित करना चिंता का विषय बन गया है।

ऐसे मामलों में समाज को भी सजग रहने की जरूरत है और प्रशासन को सख्त निगरानी रखनी होगी ताकि धार्मिक स्वतंत्रता की आड़ में गैरकानूनी गतिविधियां न पनपें।

A shocking religious conversion case has emerged from Ghaziabad, Uttar Pradesh, where a prayer gathering was used as a front to lure Scheduled Caste individuals into converting to Christianity. The police arrested a pastor from Kerala and the house owner, who allegedly conducted weekly Sunday prayers. This incident has sparked widespread concern and legal action is underway under Uttar Pradesh’s anti-conversion law.

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