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साइप्रस: एक द्वीप, कई समीकरण — तुर्किए से विवाद, भारत के लिए रणनीतिक महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि!

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Cyprus Geopolitical Importance: Turkish Dispute, India’s Strategic Interests & History

साइप्रस का भू–राजनीतिक महत्व: तुर्की विवाद, भारत के लिए रणनीतिक पहलू और इतिहास की झलक

AIN NEWS 1: साइप्रस पूर्वी भूमध्य सागर में स्थित एक द्वीपीय देश है, जो तुर्की और सीरिया के क़रीब है। भौगोलिक रूप से यह एशियाई महाद्वीप से जुड़ा हुआ है, लेकिन यह यूरोपीय संघ (EU) का हिस्सा भी है। हाल ही में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले स्टॉप के रूप में रविवार को साइप्रस पहुंचे, और यह पिछले दो दशकों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली साइप्रस यात्रा है। इस लेख में हम साइप्रस की भू-राजनीतिक स्थिति, इतिहास, तुर्की विवाद, और भारत के लिए इसके महत्व को विस्तार से समझेंगे।

1. साइप्रस का भूगोल और इतिहास

स्थान और क्षेत्रफल: साइप्रस का आकार लगभग 9,251 वर्ग किलोमीटर है। यह भूमध्य सागर के पूर्वी किनारे पर बसा है, इसके उत्तर में तुर्की, उत्तर-पूर्व में सीरिया है और दक्षिण-पूर्व में लेबनान स्थित है।

भाषा और धर्म: साइप्रस में तीन आधिकारिक भाषाएँ हैं—ग्रीक, तुर्किश और अंग्रेजी। धर्म के आधार पर बंटा यह द्वीप दो भागों में बटा हुआ है:

दक्षिणी साइप्रस रिपब्लिक: ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च और ईसाई धर्मावलंबियों का मुख्य क्षेत्र।

उत्तर दिशा स्थित तुर्किश साइप्रस: जिसमें मुस्लिम आबादी अधिक है।

इतिहास का संक्षिप्त अवलोकन:

1571–1878: ऑटोमन साम्राज्य का शासन।

1878–1914: ब्रिटिश राज के तहत किराये पर (कीर्तढ़ील) शासन।

1914–1960: औपचारिक रूप से ब्रिटिश उपनिवेश।

1960: ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त।

2. 1974 के तख्तापलट और डिवीजन

1960 में स्वतंत्रता मिलते ही साइप्रस में ग्रीक और तुर्कीयन समुदायों के बीच तनाव शुरू हुआ। 1974 में ग्रीक जुंटा ने द्वीप को ग्रीस में मिलाने के लिए तख्तापलट किया। इसके जवाब में, तुर्की ने सैन्य हस्तक्षेप किया और द्वीप का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ‘उत्तर साइप्रस तुर्क गणराज्य’ बना दिया जिसे सिर्फ तुर्की ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देती है। संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना ने बीच में परिस्थिति को संभाला, लेकिन आज भी साइप्रस आधा विभाजित है—दक्षिणी भाग में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त साइप्रस रिपब्लिक और उत्तर में तुर्की समर्थित प्रशासन।

3. तुर्की और साइप्रस के बीच विवाद के प्रमुख पहलू

1. आरक्षित जातीय विभाजन: 1974 के बाद द्वीप स्थायी रूप से विभाजित है।

2. अंतर्राष्ट्रीय मान्यता: उत्तर साइप्रस केवल तुर्की द्वारा मान्यता प्राप्त है, जबकि दक्षिण साइप्रस संपूर्ण EU का सदस्य है।

3. संसाधन एवं क्षेत्रीय जल: तुर्की की एजेंसियां साइप्रस के-exclusive-वैली ऑफ शेल्फ, तेल एवं गैस की खोज एवं शेयरिंग को लेकर संघर्ष करती रही हैं।

4. भूराजनैतिक दबाव: तुर्की और ग्रीस के बीच क्षेत्रीय स्पर्धा भी साइप्रस विवाद का एक हिस्सा है।

4. साइप्रस — यूरोपीय संघ में एक पुल

EU में सदस्यता: साइप्रस रिपब्लिक 1 मई 2004 को सफलतापूर्वक EU में शामिल हुआ, जबकि उत्तरी भाग इससे बाहर रहा।

मुद्रा विभाजन:

दक्षिणी साइप्रस: यूरो (€) उपयोग करता है।

उत्तरी साइप्रस: तुर्किश लीरा (₺)।

EU की परिषद की अध्यक्षता: 2026 की पहली छमाही में साइप्रस EU परिषद की अध्यक्षता करेगा, जो इसकी अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को और मजबूत करेगा।

5. भारत–साइप्रस के संबंध

राजनीतिक और वैश्विक समर्थन:

साइप्रस ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य पद के समर्थन में खड़ा किया है।

आदान-प्रदान में भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) और IAEA में भी समर्थन मिला।

ऊर्जा सहयोग:

भारत-साइप्रस साझेदारी के फलस्वरूप परमाणु ऊर्जा आपूर्ति समझौते की राह और सुगम हुई, जिससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिली।

आर्थिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी:

साइप्रस की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह भारत–मध्य-पूर्व–यूरोप कॉरिडोर (IMEC) का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकता है।

इससे भारत तथा यूरोप के बीच व्यापारिक और लॉजिस्टिक कनेक्शन में सुधार की उम्मीदें बढ़ीं।

6. पीएम मोदी की यात्रा का विश्लेषण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सोमवार से साइप्रस पहुँचे, जो पिछले 23 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा इस द्वीप पर हुआ।

राजनीतिक विचार-विमर्श:

निकोसिया में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के साथ रणनीतिक वार्ता।

व्यापक साझेदारियां:

लिमासोल में आयोजित व्यवसायिक सम्मेलनों को संबोधित किया गया।

व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा, और ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग की ज़ोरदार वकालत की गई।

मिडिल ईस्ट–यूरोप कॉरिडोर:

IMEC के अंतर्गत व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने हेतु प्रयास बढ़ाए गए।

आतंकवाद-विरोधी साझेदारी:

भारत ने अपने आतंकवाद-विरोधी एजेंडे में साइप्रस का समर्थन प्राप्त किया।

मोदी ने त्रिपक्षीय यात्रा को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में साइप्रस और अन्य देशों के समर्थन के लिए एक अवसर बताया।

7. पाकिस्तान–तुर्की–साइप्रस तिकोन

तुर्की–पाकिस्तान संबंध:

तुर्की ने कश्मीर विवाद में पाकिस्तान के समर्थन का कई बार साथ दिया।

हालिया जैश-आल-अद्ला या अन्य ग्रुप्स के ड्रोन हमलों में इस्तेमाल हुई तकनीक तुर्की से ही जुड़ी दिखाई देती है।

भारत का मुकाबला:

भारत साइप्रस के समर्थन को इस स्थिति में एक ताकि-अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर नीति के तौर पर देख रहा है।

साथ ही, IMEC और EU के साथ बढ़ती साझेदारी इसे एक मजबूत काउंटरपॉइंट बना रहे हैं।

8. साइप्रस: सांस्कृतिक और आर्थिक रोचक तथ्य

अफ्रोडाइट की जन्मभूमि: प्राचीन ग्रेक कथा के अनुसार, प्रेम और सौंदर्य की देवी अफ्रोडाइट का जन्म साइप्रस में माना जाता है।

भू-लोकप्रियता: सदियों से यह स्थल दर्जनों सभ्यताओं—ग्रीक, रोमन, ओटोमन, अंग्रेज़ों—का केंद्र रहा है।

पर्यटन और आर्थिक वृद्धि:

पर्यटन स्थल: प्राचीन मछली पकड़ने के गाँव, मोनास्टीरिज़, बीच रिसॉर्ट्स, धार्मिक साइटें—सारा पर्यटन आधार।

IEconomic corridor: साइप्रस का भूमध्य सागर में प्रवेश इसे भारत से यूरोप तक वाणिज्यिक गेटवे की भूमिका प्रदान करता है।

9. भविष्य का परिदृश्य

2016–2030 तक संभावित हासिलियाँ:

EU परिषद में अध्यक्षता (2026), IMEC के माध्यम से व्यापारिक लाभ, रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी।

साइप्रस–भारत–ISRAEL–GREECE ‘क्वाड्रिलैटरल’ साझेदारी में भी ग्रोइंग रुचि।

साइप्रस एक छोटा लेकिन भू–राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण देश है। तुर्की–साइप्रस विभाजन, भारत के लिए इसकी रणनीतिक भूमिका और मोदी की हालिया यात्रा ने इसे क्षेत्रीय सहयोग के केंद्र में ला खड़ा किया है। IMEC और EU में इसकी उपस्थिति भारत को यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने में मदद करेगी, जबकि आतंकवाद-विरोधी साझेदारी से सुरक्षा सम्बन्ध और मजबूत होंगे।

Cyprus, located in the Eastern Mediterranean near Turkey and Syria, holds strategic importance for India due to its EU membership, energy corridor potential (part of the India‑Middle East‑Europe Corridor or IMEC), and its support for India’s bid for a permanent UNSC seat. Recent tensions with Turkey, especially over Northern Cyprus and resource exploration, highlight its geopolitical relevance. Prime Minister Modi’s visit emphasizes India‑Cyprus strategic and economic collaboration.

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