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“यह सिस्टम का मज़ाक है, सुनवाई तेज़ हो…” — एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक की Supreme Court of India (SC) में सख्त अपील!

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AIN NEWS 1: साल 2009 में, उस वक्त 26 वर्षीय एमबीए छात्रा शाहीन मलिक पर जानबूझकर एसिड से हमला किया गया था। उस हादसे ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल कर रख दिया। लेकिन इतना दर्द और पीड़ा झेलने के बाद भी, आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।

गुरुवार — कल — शाहीन मलिक खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंची। कोर्ट में सुनवाई के दौरान, उन्होंने न्याय की मांग करते हुए कहा कि यह पूरा सिस्टम मज़ाक जैसा है — सुनवाई इतनी धीमी है कि पीड़ित को इंसाफ मिलने की उम्मीद ही टूट जाती है।

उनकी यह पिटीशन तमाम पीड़ितों की आवाज़ है, जो बगैर नतीजे के कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। शाहीन मलिक की गुहार सिर्फ उनकी निजी न्याय की नहीं; यह उन सभी के लिए है, जिन्होंने जान गंवाने या ज़िंदगी बर्बाद होने के बाद भी इंसाफ पाने की आस लगाए रखी।

उनके जीवन की कहानी — एक आशाबद्ध शुरुआत के बाद — नियति की बेरहमी बन गई। एमबीए की पढ़ाई, अच्छी नौकरी, परिवार की खुशियाँ — सारी उम्मीदें धुएँ की तरह उड़ गईं। एसिड हमला न केवल शारीरिक था, बल्कि भावनात्मक, आर्थिक और सामाजिक हर लिहाज़ से घातक साबित हुआ।

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, शाहीन मलिक ने हार नहीं मानी। कोर्टों का दर-बदर तय किया, सिस्टम की कमियों को सामने रखा, लेकिन न्याय अब तक दिये जाने का नाम नहीं ले रहा। यही कारण है कि आज उन्होंने सबसे ऊँचे न्यायालय में — वे खुद — सुनवाई की गुहार लगाई।

कोर्ट में उनका कहना था कि उन हमलों और असंख्य सुनवाईयों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठा। चिकित्सा खर्च, पुनर्वास, समाज में स्वीकार्यता, मानसिक स्वास्थ्य — इन सबका बोझ अब भी उसी पीड़ित पर है, जिसने कभी सिर्फ पढ़ाई, अपनी ज़रूरतें और अपने भविष्य की ठानी थी।

उनकी आवाज़ सिर्फ व्यक्तिगत परेशानी नहीं बल्कि उन लाखों पीड़ितों की है, जिन्हें किसी दिन न्याय की उम्मीद लेकर अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अदालत से उनका अनुरोध था कि इस मसले को तेजी से देखें, न सिर्फ मामलों को लंबा खींचा जाए और न ही पीड़ितों की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ हो।

आज, उनकी इस अपील ने न्याय व्यवस्था की धीमी गति, लंबी सुनवाई प्रक्रिया, और पीड़ितों की लाचारी की असल तस्वीर सामने ला दी है। उनकी हिम्मत, धैर्य और इंसाफ की तलाश — वो सिर्फ एक केस नहीं, उन तमाम आवाज़ों का प्रतीक है, जिन्हें अभी तक सुना नहीं गया।

आशा है कि सुप्रीम कोर्ट — या कोई भी प्रभावशाली न्यायिक मंच — उनके दर्द, उनकी जंग, और उनकी उम्मीद को समझेगा, ताकि न सिर्फ शाहीन मलिक को बल्कि हर उस व्यक्ति को न्याय मिल सके, जिसे मिले बिना ज़िंदगी अधूरी है।

Acid attack survivor Shahin Malik appeared before the Supreme Court demanding swift justice after the 2009 attack. Her case highlights the serious delays in India’s judicial system and calls for immediate action to support survivors. The hearing underscores the urgency of fair treatment and timely legal relief for acid attack victims.

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