spot_imgspot_img

“राइट टू डिस्कनेक्ट बिल: अब ऑफिस के बाद फोन न उठाने का कर्मचारियों को अधिकार!”

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: भारत में कर्मचारियों के काम और निजी जीवन के बीच संतुलन को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। खासकर डिजिटल कामकाज बढ़ने के बाद ऑफिस के ईमेल, कॉल और व्हाट्सऐप मैसेज घर पहुंचने लगे हैं, जिससे कार्यबल पर मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में लोकसभा में शुक्रवार को एक बेहद अहम बिल पेश किया गया, जिसका नाम है—राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025।

यह बिल कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाद काम से जुड़े किसी भी फोन कॉल, ईमेल या मैसेज का जवाब न देने का कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव रखता है।

यह प्रस्ताव प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में NCP सांसद सुप्रिया सुले ने पेश किया। सुले का कहना है कि भारत में लाखों कर्मचारी अपने निर्धारित कामकाजी घंटों के बाद भी काम के बोझ से दबे रहते हैं, जिसकी वजह से तनाव, पारिवारिक समय की कमी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में कानून बनाकर कर्मचारियों के निजी समय को सुरक्षित किया जाना जरूरी है।

क्या है राइट टू डिस्कनेक्ट बिल?

इस बिल का मूल उद्देश्य है कि कर्मचारी जब ऑफिस में हों, तभी काम से जुड़े कॉल और ईमेल का जवाब दें।

लेकिन जैसे ही उनका ऑफिस टाइम खत्म हो जाए, उन्हें बिना किसी डर या दबाव के “डिस्कनेक्ट” होने का पूरा अधिकार मिले।

यानी,

न फोन उठाने की मजबूरी

न मेल का तुरंत जवाब देने का दबाव

न बॉस के मैसेज पर रात को जागते रहने की जरूरत

अगर यह बिल पास होता है, तो कंपनियों को यह स्पष्ट नियम बनाने होंगे कि किस समय के बाद कर्मचारियों से किसी प्रकार का काम लेने की अनुमति नहीं होगी। यह कर्मचारी की उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जा रहा है।

बिल में क्या-क्या प्रस्तावित है?

1. ऑफिस टाइम के बाद कॉल या ईमेल का जवाब देने की बाध्यता खत्म।

2. कंपनियां डिस्कनेक्ट पॉलिसी लागू करेंगी, जिसमें तय होगा कि किस समय के बाद मैसेज भेजना भी नियमों के खिलाफ माना जाएगा।

3. कर्मचारियों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी, भले ही वे कार्यालय समय के बाद फोन न उठाएं।

4. कर्मचारी की निजी जिंदगी का सम्मान, जिससे उन्हें परिवार, स्वास्थ्य और आराम के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

यह प्रावधान यूरोप के कई देशों में पहले से मौजूद है, और अब भारत की दिशा भी उसी ओर बढ़ रही है।

अन्य महत्वपूर्ण बिल भी पेश किए गए

सिर्फ राइट टू डिस्कनेक्ट बिल ही नहीं, लोकसभा में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत हुए, जिनका सीधा संबंध महिलाओं और छात्राओं की सुविधाओं से है।

1. मेनस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल, 2024 – (कांग्रेस सांसद कडियम काव्या)

कांग्रेस सांसद कडियम काव्या ने मेनस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल, 2024 पेश किया, जिसमें यह प्रस्ताव है कि महिलाओं को बेहतर माहवारी सुविधाएं प्रदान करने के लिए संस्थानों और कार्यस्थलों को अनिवार्य कदम उठाने चाहिए।

काव्या का कहना है कि भारत में अब भी अधिकांश महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर

सैनिटरी पैड की व्यवस्था

साफ-सफाई

आराम का समय

इनकी कमी महिलाओं को कई स्वास्थ्य चुनौतियों में डाल देती है।

यदि यह बिल पास होता है, तो देशभर में महिला कर्मचारियों और छात्राओं को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सकता है।

2. महिलाओं और छात्राओं के लिए पेड पीरियड लीव – (लोजपा सांसद शंभवी चौधरी)

लोक जनशक्ति पार्टी की सांसद शंभवी चौधरी ने एक बिल पेश किया है जिसमें पेड पीरियड लीव को अनिवार्य करने की बात कही गई है।

इसका अर्थ है कि माहवारी के दौरान महिलाओं को भुगतान के साथ छुट्टी का अधिकार दिया जाए।

कई संस्थाएं पहले से ही पीरियड लीव देती हैं, लेकिन देशभर में एक समान कानून न होने के कारण यह सुविधा काफी सीमित है।

शंभवी चौधरी ने कहा कि पीरियड्स के पहले दो दिन कई महिलाओं के लिए बेहद कठिन होते हैं—दर्द, थकान, कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं आम हैं।

इसलिए इस अवधि में छुट्टी मिलना महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता, दोनों के लिए लाभदायक है।

Cloudflare Down Again: Zerodha, Groww और कई Global Platforms घंटों तक प्रभावित

क्यों हैं ये बिल जरूरत का समय?

भारत में तेजी से बदलते कामकाजी माहौल में कर्मचारियों और महिलाओं की जरूरतों को समझना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।

डिजिटल दौर में काम और व्यक्तिगत जीवन की सीमाएं धुंधली हो गई हैं।

महिलाएं बड़ी संख्या में कार्यबल का हिस्सा बन रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर ध्यान कम दिया जाता है।

कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार बढ़ता दबाव चिंता का विषय है।

ये बिल न सिर्फ बेहतर कार्यसंस्कृति की दिशा में कदम हैं, बल्कि देश की प्रगतिशील सोच को भी दर्शाते हैं।

कर्मचारियों और आम लोगों की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर राइट टू डिस्कनेक्ट बिल को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।

कई कर्मचारी इसे “जीवन बदलने वाला कदम” बता रहे हैं।

लोगों का कहना है कि

“रात 10 बजे बॉस के फोन”

“वीकेंड में अचानक मीटिंग”

“छुट्टी में भी ईमेल चेक करने की मजबूरी”

ये सभी चीजें परिवार और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

इधर महिला संगठनों ने पीरियड लीव और मेनस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल का स्वागत किया है।

उनका कहना है कि यह महिलाओं की वास्तविक जरूरतों को समझने और उन्हें सम्मान देने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

बिल पास होने पर क्या बदलेगा?

अगर ये सभी बिल पास होते हैं, तो भारत के कार्यस्थलों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे—

कर्मचारियों को अपनी निजी जिंदगी पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।

मानसिक तनाव कम होगा।

महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं के साथ काम करने की मजबूरी से मुक्त होंगी।

कंपनियों की HR नीतियों को नए सिरे से बनाना पड़ेगा।

इन सुधारों से भारत की कार्यसंस्कृति अधिक संवेदनशील, मानव-केन्द्रित और आधुनिक बनेगी।

The Right to Disconnect Bill 2025 aims to create a healthier work-life balance by giving employees the legal right to ignore work-related calls and emails after office hours. Along with this, the Menstrual Benefits Bill 2024 and the proposal for Paid Period Leave focus on improving workplace conditions for women by ensuring menstrual hygiene facilities and paid leave during menstruation. These reforms highlight India’s shift toward modern employee rights, workplace wellness, and gender-sensitive policies.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
broken clouds
31.7 ° C
31.7 °
31.7 °
60 %
4.1kmh
60 %
Fri
35 °
Sat
42 °
Sun
42 °
Mon
42 °
Tue
42 °
Video thumbnail
Amit Shah on UCC : “UCC भाजपा का एजेंडा नहीं बल्कि संविधान का एजेंडा है...”
00:16
Video thumbnail
Nitin Gadkari on E20, Ethanol : “पटना में एक यूट्यूबर ने मुझे अपशब्द कहे...”
00:29
Video thumbnail
राम मंदिर चंदा विवाद पर अनोखा प्रदर्शन, वानर सेना, राम-सीता के वेश में निकाली रैली
00:47
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "SIT लीपापोती है, सुनने में तो आया है कि SIT पर भी सवाल खड़े हो गए हैं"
00:50
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "जो भारतीय जनता पार्टी के विचार हैं वह वोट, उनके लिए धर्म नहीं धन "
01:48
Video thumbnail
महाराष्ट्र के रायगढ़ में भारी बारिश से LPG बॉटलिंग प्लांट में बाढ़
00:17
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "मैं अभी पूजनीय शंकराचार्य जी से मिलकर आ रहा हूं, वह गौ माता को लेकर बहुत..."
00:46
Video thumbnail
CM Yogi ने Varanasi में ऐसा दहाड़ा, विपक्षियों में मची खलबली, हिंदू गदगद।
07:37
Video thumbnail
शामली में कार बनी 'नाव'
00:29
Video thumbnail
राम मंदिर चंदा चोरी पर एक्टर अनुपम खेर
01:19

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related