उत्तर प्रदेश सरकार की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना बनी पशुपालकों के लिए बड़ा अवसर, 10 स्वदेशी गायों पर मिलेगा ₹11.80 लाख तक का अनुदान
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, स्वदेशी गायों के संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से लगातार नई योजनाएं चला रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत पशुपालन विभाग द्वारा संचालित नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना लागू की गई है। यह योजना उन किसानों और पशुपालकों के लिए बेहद लाभकारी मानी जा रही है जो आधुनिक डेयरी फार्म स्थापित करना चाहते हैं और स्वदेशी नस्ल की गायों का पालन कर आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहते हैं।
हाल के दिनों में इस योजना से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद कई लोगों के मन में सवाल उठा कि क्या वास्तव में सरकार 10 गायों पर ₹11.80 लाख की सहायता दे रही है। आधिकारिक जानकारी की जांच करने पर पता चलता है कि योजना पूरी तरह वास्तविक है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही है। हालांकि सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कुछ पोस्टों में योजना की लागत और अनुदान को लेकर भ्रम की स्थिति भी देखने को मिली।

क्या है मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना?
मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित एक विशेष डेयरी विकास योजना है। इसका उद्देश्य राज्य में स्वदेशी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाना, दूध उत्पादन में वृद्धि करना और किसानों को डेयरी व्यवसाय के माध्यम से अतिरिक्त आय उपलब्ध कराना है।
यह योजना प्रदेश के सभी जनपदों में लागू है और इसके माध्यम से पात्र पशुपालकों को 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
योजना में कितना मिलेगा अनुदान?
इस योजना के तहत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी परियोजना की कुल लागत ₹23.60 लाख निर्धारित की गई है।
सरकार इस लागत का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम ₹11.80 लाख तक अनुदान देती है। यही वह बिंदु है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर सबसे अधिक भ्रम फैलाया गया। कई पोस्टों में ₹11.80 लाख को परियोजना की कुल लागत बताया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि यह केवल सरकार द्वारा दिया जाने वाला अनुदान है।
अनुदान दो चरणों में जारी किया जाता है।
पहला चरण तब जारी होता है जब लाभार्थी डेयरी फार्म के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना तैयार कर लेता है।
दूसरा चरण स्वदेशी गायों की खरीद पूरी होने के बाद जारी किया जाता है।
किन नस्लों की गायों को शामिल किया गया है?
योजना में केवल उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी गायों को शामिल किया गया है। इनमें मुख्य रूप से—
साहीवाल
गिर
थारपारकर
जैसी प्रसिद्ध भारतीय नस्लें शामिल हैं। सरकार चाहती है कि इन नस्लों का संरक्षण हो और इनके माध्यम से प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाया जा सके।
महिलाओं को मिलेगा विशेष लाभ
सरकार ने इस योजना में महिला पशुपालकों को विशेष प्राथमिकता दी है। योजना के अंतर्गत कुल लाभार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को कुछ निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी।
आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए।
पशुपालन या डेयरी व्यवसाय का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।
हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
बैंक से ऋण लेने अथवा स्वयं की वित्तीय क्षमता का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
बैंक स्टेटमेंट सहित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
बैंक ऋण और लाभार्थी का योगदान
योजना के अनुसार परियोजना लागत में लाभार्थी का भी योगदान निर्धारित किया गया है।
आमतौर पर लाभार्थी को कुल लागत का लगभग 15 प्रतिशत स्वयं निवेश करना होता है, जबकि शेष राशि के लिए बैंक ऋण की व्यवस्था की जा सकती है। यदि कोई लाभार्थी स्वयं की धनराशि से परियोजना स्थापित करना चाहता है तो उसे अपनी वित्तीय क्षमता का प्रमाण देना होगा।
गायों की खरीद से जुड़े नियम
सरकार ने योजना में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बनाए हैं।
गायों की खरीद यथासंभव उनके मूल प्रजनन क्षेत्रों (Breeding Tract) से की जाएगी।
प्रत्येक गाय का ईयर टैग अनिवार्य होगा।
सभी गायों का बीमा कराना आवश्यक होगा।
खरीदी जाने वाली गाय पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली होनी चाहिए।
पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी अनिवार्य रहेगा।
किन लोगों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा?
जो लाभार्थी पहले से सरकार की कुछ अन्य डेयरी योजनाओं का लाभ ले चुके हैं, वे इस योजना के पात्र नहीं होंगे।
इनमें मुख्य रूप से—
कामधेनु योजना
मिनी कामधेनु योजना
माइक्रो कामधेनु योजना
नन्द बाबा दुग्ध मिशन की कुछ पूर्व योजनाओं के लाभार्थी
शामिल हैं।
आवेदन कैसे करें?
इच्छुक पशुपालक उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग एवं नन्द बाबा दुग्ध मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज, बैंक संबंधी जानकारी तथा पात्रता प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। अंतिम चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल दावे की सच्चाई
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में यह दावा किया गया कि सरकार 10 गायों पर ₹11.80 लाख की योजना चला रही है। आधिकारिक जांच में यह दावा आंशिक रूप से सही पाया गया।
सच्चाई यह है कि योजना वास्तव में मौजूद है और सरकार ₹11.80 लाख तक अनुदान देती है, लेकिन यह पूरी परियोजना की लागत नहीं बल्कि कुल ₹23.60 लाख की परियोजना पर मिलने वाला 50 प्रतिशत सरकारी अनुदान है।
इसलिए किसी भी योजना से जुड़ी जानकारी पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या सरकारी सूचना की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।
मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना उत्तर प्रदेश के पशुपालकों और डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। स्वदेशी गायों के संरक्षण, दूध उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना आर्थिक सहायता के साथ-साथ आधुनिक डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करती है। यदि पात्र किसान सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं तो वे इस योजना के माध्यम से सरकारी अनुदान प्राप्त कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
The UP Mini Nandini Krishak Samriddhi Yojana 2026 is a flagship initiative under the Nand Baba Dugdh Mission by the Uttar Pradesh Animal Husbandry Department to promote indigenous cow farming and modern dairy entrepreneurship. Under this government dairy scheme, eligible farmers can receive up to ₹11.80 lakh subsidy for establishing a 10-cow dairy unit with Sahiwal, Gir, and Tharparkar breeds. This article explains the eligibility criteria, subsidy structure, application process, required documents, official guidelines, and fact check, making it a complete guide for dairy farmers, livestock entrepreneurs, and beneficiaries looking to start a profitable dairy business in Uttar Pradesh.



















