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लोकसभा में बढ़ी ताकत, तो बढ़ा भरोसा: समाजवादी पार्टी का चंदा एक साल में हुआ लगभग दोगुना!

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AIN NEWS 1: लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) न सिर्फ राजनीतिक रूप से मजबूत हुई है, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति में भी साफ सुधार देखने को मिला है। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली इस पार्टी को वित्त वर्ष 2024-25 में स्वैच्छिक चंदे के रूप में करीब 93.47 लाख रुपये मिले हैं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दो गुना है।

यह जानकारी चुनाव आयोग को सपा द्वारा सौंपे गए उन वार्षिक रिटर्न से सामने आई है, जिनमें 20 हजार रुपये से अधिक के दान का ब्योरा दिया जाता है। पार्टी ने यह विवरण अक्टूबर 2025 में जमा किया था, जिसे आयोग ने हाल ही में सार्वजनिक किया।

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📈 2022 से लगातार बढ़ता जा रहा है चंदा

आंकड़ों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी को मिलने वाला चंदा बीते कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहा है।

2022-23 में पार्टी को कुल 26.92 लाख रुपये मिले थे।

2023-24 में यह रकम बढ़कर 46.75 लाख रुपये हो गई।

और अब 2024-25 में यह आंकड़ा 93.47 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन और उसके भविष्य की संभावनाओं से जुड़ी हुई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने भले ही सत्ता हासिल न की हो, लेकिन 2017 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन जरूर किया था। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव ने पार्टी की छवि को और मजबूत किया।

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🗳️ लोकसभा 2024: चंदे में उछाल की बड़ी वजह

लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। एक समय लोकसभा में केवल 5 सांसदों वाली पार्टी अचानक भाजपा को सीधी चुनौती देने वाली ताकत बनकर उभरी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी चुनावी सफलता ने दानदाताओं के बीच पार्टी को लेकर भरोसा बढ़ाया। जब किसी दल की जीत की संभावना मजबूत दिखती है, तो समर्थक और दानदाता भी खुलकर सामने आते हैं।

💰 किनसे मिला चंदा और कितना?

चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में समाजवादी पार्टी को—

15 व्यक्तियों से: 58.47 लाख रुपये

3 कंपनियों से: 35 लाख रुपये

का योगदान प्राप्त हुआ।

सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदान पार्टी के कोषाध्यक्ष सुदीप रंजन सेन और उनकी पत्नी अदिति सेन की ओर से आया। दोनों ने मिलकर पार्टी को 30 लाख रुपये का चंदा दिया। सुदीप रंजन सेन इससे पहले भी सपा के सबसे बड़े दानदाताओं में रहे हैं।

पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में उन्होंने अकेले 25 लाख रुपये दिए थे, जो उस साल पार्टी को मिले कुल चंदे का आधे से ज्यादा था।

🏢 कंपनियों से मिला सहयोग

कॉरपोरेट दान की बात करें तो तीन कंपनियों ने समाजवादी पार्टी को योगदान दिया—

SLV Facility Management Pvt. Ltd. – 20 लाख रुपये

Star Builder & Developers (Mumbai) – 10 लाख रुपये

Imperial Gardens & Resorts (Hospitality Sector) – 5 लाख रुपये

हालांकि, राष्ट्रीय दलों की तुलना में यह कॉरपोरेट चंदा अब भी काफी सीमित माना जा रहा है।

चुनाव के दौरान आया 31% चंदा

रिपोर्ट के मुताबिक, सपा को मिले कुल चंदे का करीब 31 प्रतिशत, यानी लगभग 29 लाख रुपये, सीधे लोकसभा चुनाव की अवधि के दौरान प्राप्त हुआ।

यह अवधि 18 अप्रैल 2024 से 3 जून 2024 तक की थी, जबकि नतीजे 4 जून को घोषित हुए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी माहौल में, जब जीत की संभावना दिखने लगती है, तो दानदाता ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं।

📍 उत्तर प्रदेश से मिला सबसे ज्यादा समर्थन

कुछ बड़े योगदानों को छोड़ दें तो समाजवादी पार्टी को चंदा देने वाले अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश के ही विभिन्न जिलों से हैं। इनमें—

आगरा, कन्नौज, गाजियाबाद, प्रतापगढ़, एटा, जौनपुर और गौतम बुद्ध नगर

जैसे जिले शामिल हैं।

यह साफ दर्शाता है कि सपा का सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक आधार आज भी उत्तर प्रदेश में ही सबसे मजबूत है।

🔍 चुनावी सफलता और फंडिंग का सीधा रिश्ता

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी पार्टी की फंडिंग उसकी चुनावी ताकत का आईना होती है। 2024 में सपा ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी और इंडिया गठबंधन के एक अहम स्तंभ के रूप में उभरी। इससे पार्टी की विश्वसनीयता बढ़ी और दानदाताओं का भरोसा भी मजबूत हुआ।

हालांकि, यह भी सच है कि भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के मुकाबले समाजवादी पार्टी को मिलने वाला चंदा अब भी काफी कम है।

🗣️ सपा का आरोप: डर के माहौल में नहीं मिल पा रहा चंदा

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि पार्टी को मिलने वाला चंदा उसकी संभावनाओं से कहीं कम है।

उनका आरोप है कि केंद्र में भाजपा सरकार होने के कारण बड़े उद्योगपति और कारोबारी विपक्षी दलों को खुलकर दान देने से डरते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई के डर से कई पूंजीपति सपा से दूरी बनाए रखते हैं।

🧾 चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद बदला माहौल

चुनावी बॉन्ड योजना समाप्त होने के बाद राजनीतिक चंदे का स्वरूप बदलता दिख रहा है। अब कॉरपोरेट ट्रस्टों और अन्य माध्यमों से चंदा बढ़ रहा है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा अब भी राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टियों को ही मिल रहा है।

क्षेत्रीय और विपक्षी दलों को सीमित संसाधनों में ही अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

The Samajwadi Party, led by Akhilesh Yadav, witnessed a significant rise in political funding after its strong performance in the 2024 Lok Sabha elections. According to Election Commission data, SP’s voluntary donations nearly doubled in FY 2024-25, reflecting increased public and donor confidence. The rise in Samajwadi Party donations highlights the direct connection between electoral success, political credibility, and party funding in India’s democratic system.

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