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1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश पहुंचेगा पाकिस्तानी युद्धपोत, भारत ने दी सख्त प्रतिक्रिया और बढ़ाई निगरानी

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AIN NEWS 1 | भारत और दक्षिण एशिया के लिए सुरक्षा के लिहाज से एक अहम खबर सामने आई है। 1971 की ऐतिहासिक जंग के बाद पहली बार पाकिस्तान का एक जंगी जहाज (Warship) बांग्लादेश की यात्रा करने जा रहा है। यह यात्रा पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ के बांग्लादेश दौरे के दौरान होगी, जो 8 से 11 नवंबर 2025 तक प्रस्तावित है।

इस कदम को लेकर भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं, क्योंकि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान “ऑपरेशन सिंदूर” में मिली हार के बाद बांग्लादेश के जरिए भारत की घेराबंदी की रणनीति बना रहा है।

1971 के बाद पहली बार पाकिस्तानी जहाज बांग्लादेश की ओर

इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि 1971 की जंग के बाद कोई पाकिस्तानी युद्धपोत बांग्लादेश के बंदरगाह पर लंगर डालेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक ‘कूटनीतिक यात्रा’ नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की एक रणनीतिक चाल है, जिसके ज़रिए वह बांग्लादेश के साथ रक्षा और सैन्य संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कर रही है पाकिस्तान से नजदीकी

1971 की जंग के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते दशकों तक तनावपूर्ण रहे। लेकिन 2024 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट और अंतरिम सरकार के गठन के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं। नई अंतरिम सरकार पर लंबे समय से भारत-विरोधी नीतियों को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पाकिस्तान के साथ राजनयिक और सैन्य सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

जनरल साहिर मिर्जा का हालिया दौरा और अब नेवी चीफ की यात्रा

इससे पहले, पाकिस्तान सेना के चेयरमैन ऑफ द चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी, जनरल साहिर शमशाद मिर्जा, ने भी हाल ही में बांग्लादेश का दौरा किया था। उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और सेना प्रमुख वकार उज जमां से मुलाकात की थी।

अब, पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख अशरफ का यह दौरा इन बढ़ती नजदीकियों को और गहराई दे सकता है। माना जा रहा है कि उनके साथ एक पाकिस्तानी युद्धपोत (Warship) भी ढाका बंदरगाह पर पहुंचेगा, जो 1971 के बाद की यह पहली ऐतिहासिक यात्रा होगी।

सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की गतिविधियां बढ़ीं

बांग्लादेश दौरे से पहले पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख नावेद अशरफ ने गुजरात से सटे सर क्रीक क्षेत्र का दौरा किया था। यह इलाका भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित सीमा क्षेत्र है। वहां उन्होंने तीन नए होवरक्राफ्ट (Hovercrafts) को पाकिस्तानी नौसेना को सौंपा, जो जमीन और पानी दोनों में चलने में सक्षम हैं।

इस गतिविधि को देखते हुए भारत ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है।

भारत की जवाबी तैयारी: ऑपरेशन “त्रिशूल” शुरू

पाकिस्तानी नेवी चीफ के सर क्रीक दौरे के तुरंत बाद भारत ने त्रिशूल (Trishul) नाम से एक ट्राई-सर्विस मिलिट्री एक्सरसाइज शुरू की है, जो 1 नवंबर से 13 नवंबर तक चलेगी।

इस अभ्यास में थलसेना, नौसेना, वायुसेना, के साथ-साथ BSF (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) और कोस्ट गार्ड भी हिस्सा ले रहे हैं। यह युद्धाभ्यास राजस्थान के थार रेगिस्तान और सर क्रीक तटवर्ती क्षेत्रों में किया जा रहा है।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखना और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए भारत की तैयारी को मजबूत बनाना है।

भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह चौकस

पाकिस्तान और बांग्लादेश की नजदीकियों को लेकर भारत ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया हुआ है। भारतीय नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल संजय वास्त्यायन ने हाल ही में कहा था कि भारत की तीनों सेनाएं और खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान और बांग्लादेश की हर सैन्य गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

वास्त्यायन ने कहा था,

“भारत अपने पड़ोसी देशों की हर हरकत पर चौकस है। हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

भारत की चिंताएं क्यों बढ़ीं?

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम भारत को रणनीतिक रूप से घेरने की कोशिश का हिस्सा है। पाकिस्तान जानता है कि भारत की पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है, और अगर वह वहां अपनी पकड़ बना लेता है तो भारत की पूर्वोत्तर सीमा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर” में पाकिस्तान को करारी हार मिलने के बाद यह उसकी एक ‘कूटनीतिक वापसी की कोशिश’ मानी जा रही है।

भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया

भारत ने सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि राजनयिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ा दी है। नई दिल्ली ने अपने उच्चायुक्तों और दक्षिण एशिया मामलों से जुड़े अधिकारियों को स्थिति पर लगातार निगरानी रखने का आदेश दिया है।

इसके अलावा, भारत की खुफिया एजेंसियों ने भी बांग्लादेश में बढ़ती पाकिस्तान समर्थक गतिविधियों पर विशेष रिपोर्ट तैयार की है।

1971 की जंग के बाद यह पहला मौका है जब पाकिस्तान का कोई जंगी जहाज बांग्लादेश पहुंचने जा रहा है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संकेत है कि पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अपनी पुरानी पकड़ दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

भारत के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि उसे अपने पड़ोसी देशों के साथ रणनीतिक संवाद और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना होगा।

फिलहाल, भारत ने स्थिति पर पूरी नजर रखी है — और “त्रिशूल” जैसे सैन्य अभ्यास यह दिखा रहे हैं कि भारत किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।

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