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शाही जामा मस्जिद हिंसा मामला: एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई से कोर्ट में 140 से ज्यादा सवाल, छह घंटे चली कड़ी जिरह!

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AIN NEWS 1: शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में अदालत में सुनवाई के दौरान उस समय अहम मोड़ आया, जब एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को गवाही के लिए पेश किया गया। उनकी गवाही के दौरान बचाव पक्ष की ओर से की गई लंबी और गहन जिरह ने पूरे मुकदमे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।

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⏱️ छह घंटे चली मैराथन जिरह, 140 से अधिक सवाल

अदालत में दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई जिरह शाम 6 बजे तक लगातार चलती रही। इस दौरान बचाव पक्ष के कुल पांच अधिवक्ताओं ने एसपी बिश्नोई से 140 से अधिक सवाल पूछे। सवालों का दायरा बेहद व्यापक था—हिंसा वाले दिन की घटनाओं से लेकर पुलिस की रणनीति, मौके पर मौजूद बल, सुरक्षा इंतजाम, और हालात को संभालने के फैसलों तक हर पहलू को बारीकी से खंगाला गया।

जिरह के दौरान यह स्पष्ट दिखा कि बचाव पक्ष पुलिस कार्रवाई की टाइमिंग, निर्णय प्रक्रिया और हालात की गंभीरता को लेकर स्पष्टीकरण चाहता था। वहीं एसपी बिश्नोई ने हर सवाल का जवाब धैर्य और स्पष्टता के साथ दिया।

⚖️ मुकदमे की कानूनी पृष्ठभूमि

जिला शासकीय अधिवक्ता आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि यह पूरा मामला नखासा थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 304/2024 से संबंधित है। यह केस उस हिंसा से जुड़ा है, जो शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान अचानक भड़क उठी थी। हालात इतनी तेजी से बिगड़े कि पुलिस को तत्काल सख्त कदम उठाने पड़े।

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सरकारी पक्ष का कहना है कि हिंसा पूर्व नियोजित नहीं थी, लेकिन भीड़ के उग्र होते ही स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई थी, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया।

🔫 फायरिंग में खुद घायल हुए एसपी

घटना के दिन हालात तब और गंभीर हो गए जब उपद्रवियों की ओर से फायरिंग शुरू कर दी गई। इसी दौरान एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई खुद भी घायल हो गए। उनके पैर में छर्रे लगे थे। इसके अलावा उनके पीआरओ सहित कई अन्य पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए थे।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा में कुल 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। यह तथ्य अपने आप में इस बात की गवाही देता है कि पुलिस बल किस स्तर के खतरे का सामना कर रहा था।

🚨 चार युवकों की मौत से फैला तनाव

हिंसा के दौरान चार युवकों की मौत हो जाने से पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया था। हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किए गए और लगातार निगरानी रखी गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया, ताकि हर पहलू की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जा सके।

🕵️‍♂️ SIT जांच में कई बड़े खुलासे

एसआईटी ने जांच के दौरान घटनास्थल के साक्ष्य, वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान और तकनीकी सबूतों के आधार पर 40 से अधिक लोगों को नामजद किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 25 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

हालांकि समय के साथ अधिकांश आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिल गई है, लेकिन मुकदमे की सुनवाई अब भी जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

👁️ एसपी ने खुद को बताया चश्मदीद गवाह

कोर्ट में गवाही देते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने खुद को इस पूरे घटनाक्रम का प्रत्यक्षदर्शी बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से हिंसा, फायरिंग और पुलिस पर हुए हमले देखे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह हालात मिनटों में बिगड़ गए और पुलिस को जान जोखिम में डालकर स्थिति संभालनी पड़ी। बचाव पक्ष के हर सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने पुलिस की कार्रवाई और निर्णयों को तर्कसंगत ठहराया।

⚖️ दोषियों को सजा दिलाने का भरोसा

गवाही के बाद एसपी बिश्नोई ने भरोसा जताया कि मजबूत साक्ष्यों, पुलिस रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रभावी पैरवी और निष्पक्ष सुनवाई से न्याय जरूर मिलेगा।

सरकारी पक्ष का भी मानना है कि यह मामला कानून-व्यवस्था, पुलिस की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से बेहद अहम है और इसका फैसला एक मिसाल बनेगा।

शाही जामा मस्जिद हिंसा मामला न केवल एक आपराधिक मुकदमा है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस और न्याय व्यवस्था की परीक्षा भी है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की लंबी जिरह और उनकी गवाही ने इस केस को नई दिशा दी है। अब सभी की निगाहें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को आखिरकार कैसी सजा मिलती है।

The Shahi Jama Masjid violence case has become one of the most significant communal violence cases in recent times. During the court proceedings, SP Krishan Kumar Bishnoi faced an intense cross examination where he answered over 140 questions related to police action, firing incidents, injuries to police personnel, and the SIT investigation. The case registered at Nakhasa police station highlights serious law and order challenges, making this testimony crucial for delivering justice and accountability.

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