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E-20 ब्लेंडिंग से देश को बड़ी राहत, नितिन गडकरी बोले- नहीं होता तो पेट्रोल ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकता था

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AIN NEWS 1 नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक ईथेनॉल मिश्रण (E-20) की नीति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में इस विषय पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि देश में ईथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता, तो पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारत में पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह वास्तविक कीमत नहीं, बल्कि उस समय की परिस्थितियों के आधार पर सरकार का आकलन था। सरकार का कहना है कि ईथेनॉल मिश्रण नीति ने न केवल पेट्रोल की कीमतों पर दबाव कम किया, बल्कि देश की विदेशी मुद्रा बचाने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने में भी अहम भूमिका निभाई।

संसद में क्या बोले नितिन गडकरी?

लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा कि भारत लगातार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी उद्देश्य से ईथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। ऐसी स्थिति में यदि पेट्रोल में ईथेनॉल मिश्रण नहीं होता, तो देश में पेट्रोल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती थीं।

उन्होंने कहा कि ईथेनॉल मिश्रण से देश के उपभोक्ताओं को राहत मिली और तेल आयात पर होने वाला खर्च भी कम हुआ।

लगभग दो लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने का दावा

सरकार के अनुसार, ईथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से भारत को अब तक लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। इसके साथ ही करीब 317 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात का विकल्प तैयार हुआ, जिससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम हुई।

सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब पहले की तुलना में कुछ हद तक कम महसूस होता है।

करोड़ों वाहन E-20 पेट्रोल का कर रहे हैं उपयोग

सरकार ने संसद में बताया कि देश में 23 करोड़ से अधिक वाहन ऐसे हैं जो E-20 या उससे कम ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं। सरकार के अनुसार अब तक बड़े स्तर पर ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि E-20 के कारण आधुनिक वाहनों के इंजन में व्यापक खराबी आई हो।

वाहन निर्माता कंपनियां भी पिछले कुछ वर्षों से ऐसे इंजन तैयार कर रही हैं जो E-20 ईंधन के अनुकूल हों।

पुरानी गाड़ियों के मालिकों को बरतनी चाहिए सावधानी

सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि 2016 से पहले निर्मित कुछ BS-III और पुराने वाहनों में E-20 पेट्रोल का सीमित प्रभाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से ऐसे वाहनों के रबर पार्ट्स, पाइप और ईंधन प्रणाली के कुछ पुराने कंपोनेंट्स पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहन मालिक समय-समय पर अपने वाहन की सर्विस कराते रहें और यदि निर्माता कंपनी कोई विशेष सलाह देती है तो उसका पालन करें। वहीं 2016 के बाद बने अधिकांश आधुनिक वाहनों में E-20 के उपयोग को लेकर बड़ी चिंता की बात सामने नहीं आई है।

तेल कंपनियों पर भी पड़ा सकारात्मक असर

सरकार का मानना है कि ईथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर भी कुछ हद तक वित्तीय दबाव कम हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान पेट्रोल की लागत बढ़ने के बावजूद ईथेनॉल मिश्रण ने आयातित पेट्रोलियम उत्पादों की आवश्यकता को सीमित करने में योगदान दिया।

हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें कई अन्य आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर भी निर्भर करती हैं।

किसानों को भी मिला लाभ

ईथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों का उपयोग किया जाता है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को अपनी उपज के लिए अतिरिक्त बाजार मिला है। कई राज्यों में डिस्टिलरी उद्योग का विस्तार हुआ है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

सरकार का दावा है कि ईथेनॉल कार्यक्रम केवल ईंधन नीति नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी माध्यम बन रहा है।

पर्यावरण संरक्षण में भी मदद

विशेषज्ञों के अनुसार ईथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन माना जाता है। पेट्रोल में ईथेनॉल मिलाने से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है। इसी कारण दुनिया के कई देश वैकल्पिक और जैव ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत भी ऊर्जा के विविध स्रोत विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि भविष्य में आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता लगातार कम की जा सके।

क्या अब E-25 आने वाला है?

हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि सरकार जल्द ही E-25 पेट्रोल लागू करने जा रही है। लेकिन संसद में सरकार ने स्पष्ट किया है कि E-20 से आगे बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सरकार का कहना है कि भविष्य में यदि E-25 या उससे अधिक ईथेनॉल मिश्रण पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, सुरक्षा परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से परामर्श किया जाएगा। इसलिए फिलहाल E-25 लागू होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

ईथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भारत की ऊर्जा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हुई है, कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिला है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन तकनीक, ईंधन की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि E-20 नीति को सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मान रही है, जबकि E-25 को लेकर अभी कोई अंतिम सरकारी फैसला सामने नहीं आया है।

India’s E20 ethanol blending program has become a major step toward reducing crude oil imports, improving energy security, and supporting farmers. According to Union Minister Nitin Gadkari, petrol prices could have reached ₹125 per litre without E20 during the West Asia crisis. The government claims the ethanol blending initiative has saved nearly ₹1.98 lakh crore in foreign exchange while reducing dependence on imported crude oil. The latest update also clarifies that no final decision has been taken on introducing E25 fuel, making this an important development for vehicle owners, fuel policy observers, and the Indian automobile industry.

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