AIN NEWS 1 : प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच टकराव हो गया। यह विवाद इतना बढ़ा कि शंकराचार्य को बिना स्नान किए ही लौटना पड़ा और उन्होंने अपने शिविर में धरना शुरू कर दिया।
🔶 धरने पर बैठे शंकराचार्य, मौन व्रत का ऐलान
घटना के बाद से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में पालकी पर ही धरने पर बैठे हुए हैं। उन्होंने मौन व्रत धारण कर लिया है और किसी से बातचीत नहीं कर रहे। उनके शिष्य और समर्थक भी उनके साथ धरनास्थल पर मौजूद हैं। पूरे वातावरण में भजन-कीर्तन गूंज रहे हैं, जिससे स्थिति और भी भावनात्मक हो गई है।
शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक प्रशासन उन्हें पूरे सम्मान और धार्मिक प्रोटोकॉल के साथ संगम तक नहीं ले जाता, तब तक वे न तो धरना समाप्त करेंगे और न ही गंगा स्नान करेंगे। उन्होंने अन्न और जल दोनों का त्याग कर दिया है।
🔶 क्या है पूरा मामला?
रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज माघ मेले में संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। उनके साथ पारंपरिक पालकी, शिष्य और समर्थकों का काफिला भी था। लेकिन संगम नोज के पास पुलिस ने उनकी पालकी को आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस का कहना था कि सुरक्षा कारणों से पालकी को आगे ले जाना संभव नहीं है और शंकराचार्य को पैदल ही संगम जाना होगा। यह बात शंकराचार्य के शिष्यों को नागवार गुज़री। उनका कहना था कि धार्मिक परंपरा और प्रोटोकॉल के तहत शंकराचार्य को पालकी में ही संगम ले जाया जाना चाहिए।
🔶 पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की
बात बढ़ते-बढ़ते बहस में बदल गई और फिर हालात बिगड़ गए। शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया।
आरोप है कि एक साधु को पुलिस चौकी ले जाकर उसके साथ मारपीट भी की गई। यह खबर मिलते ही शंकराचार्य बेहद आक्रोशित हो गए और उन्होंने अपने शिष्यों की तत्काल रिहाई की मांग शुरू कर दी।
🔶 दो घंटे तक चला तनाव
घटना के बाद मौके पर करीब दो घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और शंकराचार्य को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने हाथ जोड़कर निवेदन किया, लेकिन शंकराचार्य अपने निर्णय पर अडिग रहे।
इस बीच पुलिस ने उनके कुछ और समर्थकों को भी हिरासत में ले लिया। हालात और बिगड़ते चले गए।
🔶 पालकी को खींचकर ले गई पुलिस
तनाव के दौरान पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम क्षेत्र से लगभग एक किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ दिया। इस दौरान पालकी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इस पूरे घटनाक्रम में शंकराचार्य संगम स्नान नहीं कर सके।
यह दृश्य शंकराचार्य और उनके अनुयायियों के लिए बेहद अपमानजनक बताया जा रहा है।
🔶 धरने का ऐलान और प्रशासन पर सवाल
घटना से आहत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सीधे अपने शिविर लौटे और वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और संत समाज का अपमान है।
उन्होंने साफ कहा—
“जब तक प्रशासन मुझे पूरे सम्मान और धार्मिक मर्यादा के साथ संगम स्नान के लिए नहीं ले जाएगा, तब तक मैं धरने से नहीं उठूंगा।”
🔶 भजन-कीर्तन के बीच बढ़ती संवेदनशीलता
धरनास्थल पर शिष्य और समर्थक लगातार भजन गा रहे हैं। वातावरण पूरी तरह धार्मिक और भावनात्मक हो गया है। कई संत समाज से जुड़े लोग भी इस मुद्दे पर चिंता जता रहे हैं।
घटना ने माघ मेले की व्यवस्थाओं और वीआईपी प्रोटोकॉल को लेकर प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔶 प्रशासन की चुनौती
यह मामला अब केवल एक स्नान विवाद नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासन और धार्मिक परंपराओं के बीच सम्मान और समन्वय का सवाल बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
Shankaracharya Avimukteshwaranand has launched a protest at the Prayagraj Magh Mela after Uttar Pradesh Police stopped his palanquin during Mauni Amavasya snan arrangements. The incident sparked a major controversy involving police action, religious protocol, and the rights of saints at the Sangam. The Magh Mela dispute has raised serious questions about administrative conduct and respect for spiritual traditions in Uttar Pradesh.


















