AIN NEWS 1: भारत के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने वेनेजुएला और इराक जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल अत्याधुनिक हथियारों और बड़ी सेना के दम पर कोई भी देश मजबूत नहीं बनता, बल्कि असली ताकत तब सामने आती है जब उस सैन्य शक्ति को इस्तेमाल करने की राजनीतिक और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति भी हो।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कई देशों के पास मजबूत सैन्य ढांचा होने के बावजूद वे अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं कर पाए, क्योंकि उनके नेतृत्व में निर्णय लेने की क्षमता और साहस की कमी थी। वेनेजुएला और इराक इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जहां संसाधन और सैन्य ताकत तो मौजूद थी, लेकिन उसका प्रभावी उपयोग नहीं हो सका।
सैन्य शक्ति: अंतिम विकल्प लेकिन निर्णायक
वायुसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि सैन्य ताकत किसी भी देश की राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम और सबसे निर्णायक तत्व होती है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सैन्य शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उसे सही समय पर और सही उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की स्पष्ट रणनीति और इच्छाशक्ति न हो।
उन्होंने कहा,
“अगर किसी देश के पास अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और प्रशिक्षित सेना है, लेकिन उसे इस्तेमाल करने का राजनीतिक साहस नहीं है, तो वह ताकत सिर्फ कागजों और परेड तक सीमित रह जाती है।”
वेनेजुएला और इराक से क्या सबक?
एपी सिंह ने वेनेजुएला और इराक का जिक्र करते हुए बताया कि दोनों देशों के पास एक समय पर मजबूत सैन्य ढांचा था। इराक की सेना को कभी मध्य-पूर्व की सबसे ताकतवर सेनाओं में गिना जाता था, जबकि वेनेजुएला के पास आधुनिक हथियार और संसाधन थे। लेकिन आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता, नेतृत्व की कमजोरी और स्पष्ट रणनीति के अभाव में ये देश अपनी सैन्य ताकत का सही उपयोग नहीं कर पाए।
उनके अनुसार,
“जब नेतृत्व भ्रमित हो और फैसले लेने में देरी हो, तो दुश्मन को मौका मिल जाता है। सैन्य ताकत तब तक प्रभावी नहीं होती, जब तक कि उसके पीछे मजबूत नेतृत्व और राष्ट्रीय संकल्प न हो।”
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की इच्छाशक्ति का उदाहरण
वायुसेना प्रमुख ने भारत के हालिया सैन्य अभियानों का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को एक सफल और निर्णायक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने सीमापार मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक और प्रभावी हमले किए, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी सुरक्षा और नागरिकों के जीवन से कोई समझौता नहीं करेगा।
एपी सिंह के मुताबिक,
“ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत की स्पष्ट इच्छाशक्ति और रणनीतिक सोच का प्रदर्शन था।”
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक, खुफिया जानकारी और वायु शक्ति का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला। हमले इतने सटीक थे कि आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि नागरिक इलाकों को न्यूनतम क्षति हुई।
वायु शक्ति की बदलती भूमिका
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायु शक्ति की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युद्ध केवल जमीन पर लड़ने तक सीमित नहीं रह गया है। वायु शक्ति किसी भी संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाती है, क्योंकि यह तेज, सटीक और दूरगामी प्रभाव डालने में सक्षम होती है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, सटीक हथियार, रियल-टाइम इंटेलिजेंस और नेटवर्क आधारित ऑपरेशंस बेहद अहम हो गए हैं। भारतीय वायुसेना इन सभी क्षेत्रों में लगातार खुद को मजबूत कर रही है।
पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
हालांकि वायुसेना प्रमुख ने किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को नीति के रूप में इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि भारत अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने दो टूक कहा कि भारत की वायुसेना किसी भी चुनौती का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य नेतृत्व का तालमेल
एपी सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी देश की सुरक्षा तभी मजबूत होती है, जब राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व के बीच भरोसा और तालमेल हो। स्पष्ट लक्ष्य, स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता और समय पर कार्रवाई ही किसी भी सैन्य शक्ति को प्रभावी बनाती है।
उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में लगातार मजबूत हो रहा है और यही वजह है कि आज भारत की सैन्य कार्रवाइयों को दुनिया गंभीरता से लेती है।
भविष्य की चुनौतियां और भारत की तैयारी
अपने संबोधन के अंत में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति और भी जटिल होगी। साइबर युद्ध, अंतरिक्ष सुरक्षा और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्र भविष्य की बड़ी चुनौतियां होंगी। भारतीय वायुसेना इन सभी क्षेत्रों में खुद को तैयार कर रही है।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत न सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन को उसके घर में घुसकर जवाब देने की क्षमता भी रखता है।
Air Chief Marshal AP Singh, the Chief of Indian Air Force, emphasized that military power without political will is ineffective, citing Venezuela and Iraq as key examples. Highlighting India’s strong defence strategy, he pointed to Operation Sindoor as proof of India’s decisive air power against terror camps in Pakistan. His remarks underline the importance of national willpower, air force capability, and strategic leadership in ensuring India’s national security and military readiness.


















