AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के आगरा से सामने आया करोड़ों की चोरी का मामला अब पूरी तरह सुलझ चुका है। एक निजी फैक्ट्री से 7.5 करोड़ रुपये की नकदी और कीमती आभूषणों की चोरी ने न सिर्फ फैक्ट्री मालिक को बल्कि पुलिस को भी हैरान कर दिया था। लेकिन आगरा पुलिस ने महज तीन दिन के भीतर इस हाई-प्रोफाइल चोरी का खुलासा कर बड़ी कामयाबी हासिल की है।

यह मामला आगरा स्थित रोजर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का है, जहां 19 जनवरी को अचानक फैक्ट्री से करोड़ों रुपये गायब होने की जानकारी सामने आई थी। फैक्ट्री प्रबंधन को जब नकदी और आभूषणों की चोरी का पता चला, तो तुरंत इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

🔍 कैसे सामने आया चोरी का मामला

फैक्ट्री मालिक के अनुसार, फैक्ट्री परिसर में रखी बड़ी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के आभूषण अचानक गायब पाए गए। शुरुआती जांच में किसी बाहरी व्यक्ति के जबरन घुसने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले, जिससे पुलिस को शक हुआ कि चोरी में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है।

पुलिस ने फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों की जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, कर्मचारियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और हालिया व्यवहार का विश्लेषण किया गया। इसी दौरान पुलिस की नजर एक कर्मचारी पर टिक गई।

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👤 कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड

जांच में सामने आया कि अनुपम शर्मा, जो पिछले चार वर्षों से रोजर इंडस्ट्रीज में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था, इस चोरी का मुख्य आरोपी है। पुलिस को शक तब गहराया जब उसके बयान और गतिविधियों में लगातार विरोधाभास नजर आने लगा।

कड़ी पूछताछ के बाद अनुपम शर्मा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने अपने भाई और दो दोस्तों — अनुराग और संजय के साथ मिलकर इस चोरी की पूरी योजना बनाई थी। आरोपी फैक्ट्री की आंतरिक व्यवस्था, नकदी रखने की जगह और सुरक्षा व्यवस्था से भली-भांति परिचित था, जिसका उसने पूरा फायदा उठाया।

🧠 पहले से रची गई थी साजिश

पुलिस के मुताबिक, चोरी कोई अचानक की गई वारदात नहीं थी, बल्कि इसकी योजना कई दिनों पहले से बनाई गई थी। अनुपम ने फैक्ट्री में अपनी नौकरी का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया कि चोरी के समय कोई शक न हो।

आरोपियों ने सुनसान समय का इंतजार किया और बेहद शातिर तरीके से नकदी और आभूषणों को बाहर निकाल लिया। चोरी के बाद रकम को अलग-अलग जगह छिपा दिया गया ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।

🚓 पुलिस की तेज़ कार्रवाई

आगरा पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की। आखिरकार तीन दिन के भीतर पुलिस ने अनुपम शर्मा, उसके भाई और उसके दो दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूरी 7.5 करोड़ रुपये की नकदी और आभूषण भी बरामद कर लिए। यह बरामदगी पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।

🎤 पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस

इस पूरे मामले को लेकर आगरा पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि यह चोरी अंदरूनी साजिश का नतीजा थी और पुलिस ने बेहद कम समय में इसे सुलझा लिया।

पुलिस कमिश्नर ने कहा,

“अनुपम शर्मा फैक्ट्री में कंप्यूटर ऑपरेटर था और उसे फैक्ट्री की हर गतिविधि की जानकारी थी। उसी ने इस चोरी की साजिश रची और अपने करीबियों की मदद से इसे अंजाम दिया।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में पुलिस की टीम ने दिन-रात मेहनत की, जिससे इतनी जल्दी आरोपियों तक पहुंचा जा सका।

⚖️ कानूनी कार्रवाई जारी

फिलहाल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनके खिलाफ चोरी, आपराधिक साजिश और विश्वासघात से जुड़े गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने इससे पहले कहीं और ऐसी किसी वारदात को अंजाम तो नहीं दिया था। साथ ही फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

📌 फैक्ट्री मालिक और पुलिस को राहत

इस मामले के खुलासे के बाद फैक्ट्री मालिक ने पुलिस की तत्परता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती, तो इतनी बड़ी रकम वापस मिल पाना मुश्किल हो सकता था।

वहीं पुलिस का कहना है कि यह मामला एक सबक है कि किसी भी संस्थान में आंतरिक सुरक्षा और कर्मचारियों की निगरानी बेहद जरूरी है।

The Agra factory theft case shocked Uttar Pradesh after Rs 7.5 crore in cash and jewellery was stolen from Roger Industries Private Limited. Agra police cracked the case within three days and arrested four accused, including a factory employee who worked as a computer operator. The incident highlights the role of internal security lapses in major factory theft cases and showcases swift police investigation in Agra, Uttar Pradesh.

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