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कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड: कारोबारी के बेटे की गिरफ्तारी, बचाने की हर कोशिश नाकाम!

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AIN NEWS 1: कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी कार से छह लोगों को घायल करने का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। कई दिनों तक चले सियासी और कानूनी घटनाक्रम के बाद आखिरकार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस केस में शुरुआत से ही प्रभाव, दबाव और बचाव की कोशिशों की चर्चा रही। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एक-एक करके सभी दांव उल्टे पड़ते गए। अदालत ने भी साफ कर दिया कि पुलिस रिकॉर्ड में जिस नाम का उल्लेख है, वही आरोपी माना जाएगा।

पूरे मामले को समझने के लिए इसे पांच अहम बिंदुओं में देखते हैं।

1. हादसा, वीआईपी ट्रीटमेंट और देर से दर्ज हुई एफआईआर

8 फरवरी की रात कानपुर के वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी कार ने छह लोगों को टक्कर मार दी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन घटना के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठे।

कार को थाने में सामान्य वाहन की तरह नहीं रखा गया। उसे थानेदार की गाड़ी वाली जगह पर खड़ा किया गया, ऊपर से कवर डाल दिया गया और सुरक्षा के लिए बाउंसर तक तैनात कर दिए गए।

सबसे बड़ा सवाल यह था कि हादसे के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रात करीब 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।

जब विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाए और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, तब जाकर पुलिस ने जांच तेज की और 24 घंटे बाद शिवम मिश्रा का नाम केस में जोड़ा गया।

2. पुलिस कमिश्नर के बयान पर पिता का पलटवार

10 फरवरी को कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि जांच के आधार पर स्पष्ट है कि हादसे के समय गाड़ी शिवम मिश्रा चला रहा था।

लेकिन अगले ही दिन कारोबारी पिता केके मिश्रा खुद थाने पहुंचे और पुलिस के दावे को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि हादसे के वक्त उनका बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था, बल्कि ड्राइवर मोहन वाहन चला रहा था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी और शिवम की तबीयत बिगड़ गई थी। उनके मुताबिक, सही समय आने पर वह खुद बेटे को पुलिस के सामने पेश करेंगे।

इस बयान ने पूरे मामले को और उलझा दिया।

3. समझौते की खबर और पुलिस का इनकार

11 फरवरी को एक और बड़ा मोड़ आया। खबर सामने आई कि घायलों में से एक वादी ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया है। कोर्ट में पेश दस्तावेजों में कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया है और अब शिकायतकर्ता कोई कार्रवाई नहीं चाहता।

इस समझौते में यह भी लिखा गया कि हादसे के समय गाड़ी ड्राइवर मोहन चला रहा था।

हालांकि, पुलिस ने साफ तौर पर कहा कि उनके पास ऐसा कोई आधिकारिक समझौता नहीं पहुंचा है। डीसीपी सेंट्रल ने बयान दिया कि जांच अपने तरीके से जारी रहेगी और किसी निजी समझौते से पुलिस कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी।

इस बयान से साफ हो गया कि पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिशों के बावजूद केस बंद होने वाला नहीं है।

4. ड्राइवर का अचानक कोर्ट में सरेंडर

मामला और नाटकीय तब हुआ जब कथित ड्राइवर मोहन अचानक कोर्ट पहुंच गया और उसने आत्मसमर्पण कर दिया। उसने दावा किया कि हादसे के समय वही गाड़ी चला रहा था।

मोहन ने कोर्ट में कहा कि शिवम को दौरा पड़ गया था और घबराहट में हादसा हो गया। उसने यह भी बताया कि शीशा टूटने के बाद वह कार के नीचे से निकल गया था और एक कोने में खड़ा हो गया था।

उसके अनुसार, शिवम को दूसरी गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया।

लेकिन कोर्ट में जब उससे कार के तकनीकी सवाल पूछे गए, तो उसके जवाबों ने कहानी पर संदेह खड़ा कर दिया।

5. गियर वाले सवाल ने खोली पोल, कोर्ट ने याचिका खारिज की

कोर्ट ने जब मोहन से पूछा कि इस लेम्बोर्गिनी कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने जवाब दिया कि इसमें 9 गियर होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस मॉडल में 7 फॉरवर्ड गियर और एक रिवर्स गियर होता है, यानी कुल 8 गियर।

यह तकनीकी गलती कोर्ट की नजर में बड़ी चूक साबित हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी के तौर पर शिवम मिश्रा का नाम है और मोहन का कहीं उल्लेख नहीं है।

अदालत ने ड्राइवर की याचिका खारिज कर दी और उसे आरोपी मानने से इनकार कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने शिवम मिश्रा को आर्यनगर स्थित उसके घर के सामने से गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल जांच के बाद उसे एजेसीएम कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के दौरान वह अस्वस्थ नजर आया और पुलिसकर्मी उसे सहारा देते दिखे।

क्या संकेत देता है यह मामला?

यह केस सिर्फ एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें प्रभाव, राजनीतिक दबाव, पुलिस की शुरुआती भूमिका और अदालत की सख्ती—सब कुछ शामिल है।

शुरुआती वीआईपी ट्रीटमेंट से लेकर नकली ड्राइवर पेश करने तक, कई कोशिशें हुईं। लेकिन अदालत ने साफ संकेत दिया कि तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर ही फैसला होगा।

अब आगे की कानूनी प्रक्रिया में यह देखना होगा कि जांच और सबूत किस दिशा में जाते हैं।

The Kanpur Lamborghini accident case has drawn massive public attention after the arrest of businessman KK Mishra’s son, Shivam Mishra. The luxury car allegedly hit six people on VIP Road, triggering controversy over police handling, VIP treatment, and attempts to present a fake driver in court. The court rejected the surrender plea of the alleged driver after inconsistencies surfaced, including incorrect technical details about the Lamborghini’s gear system. The case has now become a major law and order issue in Uttar Pradesh, highlighting questions about influence, accountability, and justice.

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