AIN NEWS 1: भारतीय संगीत जगत के जाने-माने संगीतकार ए. आर. रहमान एक नए विवाद में घिर गए हैं। उन पर एक गाने की धुन और रचना को लेकर “कॉपी” या “चोरी” करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया तक पहुंच चुका है, जहां हाल ही में इस पर सुनवाई हुई।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री बल्कि संगीत प्रेमियों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। रहमान, जिन्हें भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान हासिल है, उनके खिलाफ लगे इस आरोप ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या वाकई धुन मिलती-जुलती है? क्या यह संयोग है या जानबूझकर की गई नकल?
क्या है मामला?
जानकारी के मुताबिक, एक ओरिजिनल कंपोजर (मूल रचनाकार) ने दावा किया है कि रहमान द्वारा तैयार किया गया एक गीत उनकी पहले से मौजूद धुन से काफी हद तक मेल खाता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी रचना को उचित श्रेय दिए बिना इस्तेमाल किया गया।
मामले में यह भी कहा गया कि यदि किसी धुन या कंपोजिशन से प्रेरणा ली गई है या उसका उपयोग किया गया है, तो मूल रचनाकार को क्रेडिट मिलना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर मामला अदालत पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
हालिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया। अदालत ने यह संकेत दिया कि यदि यह साबित होता है कि किसी मूल रचना का इस्तेमाल किया गया है, तो उस कंपोजर को मान्यता दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने रहमान पक्ष से इस पर जवाब मांगा है और यह स्पष्ट किया है कि बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और कॉपीराइट से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। अगली सुनवाई शुक्रवार, 20 फरवरी को निर्धारित की गई है। इस तारीख को दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और सबूत पेश कर सकते हैं।
कॉपीराइट और संगीत की दुनिया
संगीत की दुनिया में “प्रेरणा” और “नकल” के बीच की रेखा बहुत पतली मानी जाती है। कई बार धुनें अनजाने में मिलती-जुलती हो जाती हैं, तो कई बार आरोप गंभीर भी साबित होते हैं। कॉपीराइट कानून का मकसद रचनाकारों के अधिकारों की रक्षा करना है, ताकि उनकी मेहनत और रचनात्मकता का सम्मान बना रहे।
भारत में कॉपीराइट कानून के तहत यदि कोई रचना पहले से रजिस्टर्ड है और उसका उपयोग बिना अनुमति किया जाता है, तो कानूनी कार्रवाई संभव है। ऐसे मामलों में अदालत इस बात की जांच करती है कि क्या दोनों रचनाओं में “सब्सटेंशियल सिमिलैरिटी” (महत्वपूर्ण समानता) है या नहीं।
रहमान की छवि पर असर?
ए. आर. रहमान का नाम दशकों से गुणवत्ता और मौलिकता के साथ जुड़ा रहा है। उन्होंने हिंदी, तमिल और अन्य भाषाओं की फिल्मों में यादगार संगीत दिया है। ऑस्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर उन्होंने भारत का नाम रोशन किया है।
ऐसे में उन पर लगा यह आरोप उनके प्रशंसकों के लिए चौंकाने वाला है। हालांकि, अभी यह मामला अदालत में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
फिल्म और संगीत जगत में इस खबर को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि अदालत की प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए, जबकि कुछ यह कह रहे हैं कि कॉपीराइट का सम्मान हर कलाकार के लिए जरूरी है, चाहे वह कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो।
आगे क्या?
20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में अहम साबित हो सकती है। यदि अदालत यह मान लेती है कि मूल रचना का उपयोग हुआ है, तो रहमान को संबंधित कंपोजर को क्रेडिट देना पड़ सकता है। साथ ही, संभावित मुआवजे या अन्य कानूनी आदेश भी दिए जा सकते हैं।
फिलहाल, यह मामला संगीत उद्योग में कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ चुका है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख यह तय करेगा कि इस विवाद का अंत किस दिशा में होगा।
Renowned Indian composer A. R. Rahman is facing serious allegations of song plagiarism, with the case currently being heard in the Supreme Court of India. The controversy revolves around claims that one of Rahman’s compositions closely resembles an original work by another composer, raising concerns over copyright infringement and intellectual property rights in the Bollywood music industry. During the Supreme Court hearing, the court reportedly indicated that if substantial similarity is proven, proper credit must be given to the original composer. The next hearing is scheduled for February 20, making this a closely watched legal battle in the Indian entertainment sector.


















