‘योगी की मां हमारी भी मां हैं’: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, मौलाना की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के हरदोई में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता जी को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की माता के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना न केवल सामाजिक मर्यादा के खिलाफ है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल मूल्यों का भी अपमान है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता केवल उनकी व्यक्तिगत माता नहीं हैं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए मातृरूप हैं। ऐसे में किसी भी धर्म या समुदाय के व्यक्ति द्वारा उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना बेहद निंदनीय है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हरदोई में दिया बयान
हरदोई में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हाल ही में बिहार के एक मौलाना द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता के खिलाफ की गई टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में नफरत और विवाद को बढ़ावा देते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में मां का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय की हो, मां हमेशा सम्मान की पात्र होती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को किसी की माता के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
“मां का अपमान बर्दाश्त नहीं”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मां के खिलाफ टिप्पणी करना पूरी मानवता का अपमान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता जी भी इस समाज की मां हैं और उनके बारे में इस तरह की बातें कहना अस्वीकार्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें समाज के सामने जवाब देना चाहिए। साथ ही प्रशासन को भी इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी करने की हिम्मत न कर सके।
धार्मिक नेताओं को दी सलाह
शंकराचार्य ने इस मुद्दे पर खासतौर से मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार धार्मिक नेताओं से अपील की। उन्होंने कहा कि हर समुदाय के अंदर ऐसे लोग होते हैं जो विवादित बयान देकर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के मौलाना और धार्मिक नेता आगे आकर ऐसे लोगों को समझाएं और उन्हें मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने की सलाह दें। इससे समाज में शांति और आपसी सम्मान बना रहेगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत एक बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश है। यहां सभी धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना ही हमारी परंपरा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी पर चिंता
उन्होंने इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक वातावरण पर भी चिंता जताई। शंकराचार्य ने कहा कि आजकल राजनीति में बयानबाजी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत या पारिवारिक टिप्पणियां करना गलत है। खासतौर पर किसी की माता के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उनका कहना था कि नेताओं और धार्मिक व्यक्तियों को अपने शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए क्योंकि उनके बयान समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस अवसर पर सभी समुदायों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादित बयानों से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि हम एक-दूसरे का सम्मान करें और ऐसी भाषा का इस्तेमाल न करें जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
शंकराचार्य ने प्रशासन से भी इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अगर किसी ने मर्यादा का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई होती है तो समाज में गलत संदेश जाने से रोका जा सकता है।
भारतीय संस्कृति में मां का महत्व
अपने बयान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भारतीय संस्कृति में मां के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे यहां मां को देवी का रूप माना जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत में बचपन से ही बच्चों को यह सिखाया जाता है कि मां का सम्मान करना सबसे बड़ा धर्म है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में मां के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे सामाजिक मर्यादा से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।
हालांकि इस विवाद के बीच कई धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने यह भी कहा है कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए सभी को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
हरदोई में दिए गए अपने बयान में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति की माता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना समाज में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता के सम्मान की बात करते हुए कहा कि वह पूरे समाज के लिए मां के समान हैं।
साथ ही उन्होंने सभी धार्मिक नेताओं और समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे ऐसे विवादित बयानों से बचें और समाज में सम्मान और सौहार्द का वातावरण बनाए रखने में सहयोग करें।
Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand strongly reacted to the controversy surrounding the alleged derogatory remarks made by a Maulana from Bihar about Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath’s mother. Speaking in Hardoi, he stated that a mother deserves respect irrespective of religion or political ideology. The Yogi Adityanath mother controversy has triggered reactions from religious leaders and political circles, with calls for strict action against those making offensive comments. The incident has once again raised debates about political discourse, respect for women, and responsible public statements in India.


















