AIN NEWS 1: सहारनपुर जिले के सरसावा क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कुछ लोगों ने खुद को किसान संगठन का नेता बताकर टोल प्लाजा पर अवैध वसूली का नेटवर्क खड़ा कर लिया था। ये लोग संगठन के नाम का डर दिखाकर टोल कर्मचारियों को धमकाते थे और हर सप्ताह पैसे देने के लिए मजबूर कर रहे थे। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
कैसे शुरू हुआ मामला?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब सरसावा टोल प्लाजा के मैनेजर शोएब (निवासी कैराना) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ लोग बार-बार टोल प्लाजा पर आकर दबाव बना रहे थे। ये लोग खुद को किसान संगठन से जुड़ा बताते थे और इसी पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को डराते थे।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने टोल ऑफिस में घुसकर हंगामा किया, गाली-गलौज की और कर्मचारियों को धमकाया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
हर हफ्ते 10,000 रुपये की मांग
आरोपियों ने टोल मैनेजर से साफ तौर पर 10,000 रुपये प्रति सप्ताह ‘हफ्ता’ देने की मांग की। उनका कहना था कि अगर यह रकम नियमित रूप से दी जाती रही, तो वे टोल प्लाजा पर कोई परेशानी नहीं होने देंगे।
सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी गाड़ियों को बिना टोल दिए निकलवाने का दबाव भी बनाया। जब मैनेजर ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
सड़क जाम कर बनाया दबाव
जब उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आरोपियों ने सड़क पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर दीं और रास्ता जाम कर दिया। इससे वहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस दौरान आरोपियों ने टोल कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी भी दी। इससे टोल प्लाजा का पूरा स्टाफ डर के माहौल में काम करने को मजबूर हो गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहारनपुर के एसएसपी के निर्देश पर पुलिस तुरंत हरकत में आई। एसपी देहात सागर जैन के मार्गदर्शन में थाना सरसावा के प्रभारी प्रवेश कुमार शर्मा और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं:
अरविंद पंवार
सुमित पंवार
जयवीर
निक्कू (निवासी हरिद्वार)
योगेंद्र
पुलिस ने इनके पास से 10,000 रुपये की नकदी भी बरामद की, जो कथित तौर पर अवैध वसूली की रकम थी।
किन धाराओं में केस दर्ज?
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सीएलए एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इन धाराओं में रंगदारी मांगना, धमकी देना और सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करना जैसे अपराध शामिल हैं।
सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
झंडे वाली गाड़ी भी जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने उस गाड़ी को भी जब्त कर लिया, जिस पर किसान संगठन का झंडा लगा हुआ था। पुलिस का कहना है कि इस गाड़ी का इस्तेमाल अपराध करने के लिए किया जा रहा था, इसलिए इसे सीज किया गया है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस अब उन अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है, जो घटना के समय मौके पर मौजूद थे लेकिन गिरफ्तारी से बच निकले। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
पुलिस की सख्त चेतावनी
एसपी देहात सागर जैन ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी संगठन के नाम पर गुंडागर्दी या अवैध वसूली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने साफ कहा कि किसान संगठन किसानों की समस्याओं को उठाने के लिए होते हैं, न कि डर और दबाव बनाकर पैसा वसूलने के लिए।
फर्जी किसान नेताओं पर चलेगा अभियान
पुलिस ने यह भी घोषणा की है कि अब जिले में उन सभी वाहनों की जांच की जाएगी, जिन पर किसान संगठनों के झंडे लगे हुए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति संगठन के नाम का गलत इस्तेमाल न कर सके।
प्रशासन का संदेश
इस कार्रवाई के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। चाहे कोई भी व्यक्ति हो, अगर वह कानून को अपने हाथ में लेता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
In a major crackdown, Saharanpur police arrested five fake farmer leaders involved in toll plaza extortion. The accused allegedly demanded weekly payments of ₹10,000 from the toll manager and threatened violence. This toll plaza crime highlights misuse of farmer union identity for illegal activities. Police recovered cash and registered a case under serious charges, emphasizing strict action against extortion and fraud in Uttar Pradesh.


















