किसानों को रोजगार नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन, प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांग रही भाकियू सर छोटूराम
AIN NEWS 1: गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में किसानों के मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। भूमि अधिग्रहण और रोजगार की कमी को लेकर किसानों में बढ़ता असंतोष अब आंदोलन का रूप ले सकता है। भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसानों और उनके परिवारों को रोजगार नहीं दिया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
दरअसल, 28 मार्च को प्रस्तावित जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम के चलते संगठन ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से मिलने का समय मांगा है। किसान संगठन का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां वे सीधे अपनी समस्याएं देश के प्रधानमंत्री के सामने रख सकते हैं।
बैठक में उठी किसानों की आवाज
बुधवार को गाजियाबाद के रईसपुर स्थित केंद्रीय कार्यालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़ और मेरठ सहित कई जिलों से किसान और बेरोजगार युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए।
बैठक का माहौल गंभीर रहा, जहां हर वक्ता ने किसानों की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन तो ले ली गई, लेकिन बदले में उन्हें स्थायी रोजगार या आर्थिक सुरक्षा नहीं दी गई।
“विकास का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचा”
भाकियू सर छोटूराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद चौधरी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन इसका असली फायदा किसानों को नहीं मिल रहा।
उन्होंने मांग रखी कि जिन किसानों की जमीन ली गई है, उनके हर परिवार से कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। उनका कहना है कि यह केवल मांग नहीं, बल्कि किसानों का अधिकार है।
“अब अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा”
संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुंवर अय्यूब अली ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसानों के साथ हो रहा अन्याय अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी करेगा।
उनके अनुसार, किसान अब जागरूक हो चुके हैं और अपने हक के लिए लड़ने को तैयार हैं।
संगठन में एकजुटता का संदेश
बैठक में राष्ट्रीय महासचिव चौधरी अजय प्रमुख, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी और राष्ट्रीय सचिव सोहन वीर चौधरी ने भी संगठन को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
उन्होंने साफ कहा कि अगर मांगों की अनदेखी की गई, तो आंदोलन सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़कों से लेकर राजधानी तक व्यापक रूप ले सकता है।
स्थानीय नेताओं का समर्थन
इस बैठक में कई जिला और क्षेत्रीय स्तर के पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी। गाजियाबाद के जिला अध्यक्ष रणवीर प्रधान, प्रदेश सचिव देवेंद्र सहलोत, वीरपाल चौधरी, मोदीनगर के तहसील अध्यक्ष दिनेश चौधरी और भोजपुर के ब्लॉक अध्यक्ष सौहनपाल सहित कई नेताओं ने किसानों की लड़ाई को और मजबूत करने का संकल्प लिया।
व्यापार प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सारीक चौधरी ने भी इस मुद्दे को व्यापारियों से जोड़ते हुए कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति का असर पूरे समाज पर पड़ता है।
युवाओं में बढ़ रहा गुस्सा
बैठक में युवाओं की भागीदारी भी खास रही। युवा जिला अध्यक्ष विपिन चौधरी ने कहा कि अब बेरोजगार युवा चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि युवा अपने हक के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।
उनका कहना था कि यदि रोजगार के अवसर नहीं दिए गए, तो युवा आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन
किसान संगठन ने अपनी मांगों को लेकर पहले ही जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप दिया है। इसके अलावा 24 मार्च को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री से मिलने का समय भी मांगा गया है।
संगठन का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन यदि उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया, तो वे खुद प्रधानमंत्री से मिलने का प्रयास करेंगे।
प्रशासन को दी चेतावनी
भाकियू सर छोटूराम ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनके प्रतिनिधिमंडल को मिलने का अवसर नहीं दिया गया, तो स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अव्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मुद्दे का व्यापक असर
यह मामला केवल कुछ जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों से जुड़ा हुआ है। जेवर एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से विकास जरूर हो रहा है, लेकिन अगर इससे प्रभावित लोगों को उचित लाभ नहीं मिलता, तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
किसानों की यह मांग केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य और सम्मान से जुड़ी हुई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या किसानों को उनकी मांगों का समाधान मिल पाता है या नहीं।
अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
Farmers protest in Uttar Pradesh is gaining momentum as BKU Sir Chhoturam raises concerns over land acquisition for Jewar Airport and demands government jobs for affected families. The union has sought a meeting with Prime Minister Narendra Modi to address unemployment, compensation issues, and farmer rights, warning of a large-scale आंदोलन if demands are not fulfilled.


















