AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लंबे समय से अवैध तरीके से पशुओं की चर्बी से जुड़े कारोबार का संचालन किया जा रहा था। इस पूरे मामले में अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने इमलीपुरा इलाके में संचालित अवैध फैक्ट्री और आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
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खंडवा के मोघट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इमलीपुरा इलाके में बीते कुछ दिनों पहले एक अवैध गोदाम का खुलासा हुआ था। इस गोदाम से भारी मात्रा में पशुओं की चर्बी, हड्डियां और खाल बरामद की गई थीं। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि इन अवैध सामग्रियों का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों के निर्माण में किया जा रहा था, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में लंबे समय से बदबू और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन कार्रवाई अब जाकर हुई।
छह दिन बाद चला बुलडोजर
प्रशासन ने पहले मौके पर छापा मारकर सामग्री जब्त की थी। इसके करीब छह दिन बाद प्रशासन ने और सख्त कदम उठाते हुए आरोपी अनवर कुरैशी के घर और अवैध फैक्ट्री को तोड़ने का निर्णय लिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर और हथौड़ों की मदद से पूरे निर्माण को जमींदोज कर दिया गया।
इस दौरान इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, लेकिन प्रशासन पूरी तैयारी के साथ मौके पर मौजूद था।
लाइसेंस खत्म होने के बाद भी जारी था काम
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी का लाइसेंस वर्ष 2023 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वह पिछले लगभग तीन वर्षों से अवैध रूप से पशु वध और चर्बी से संबंधित कारोबार चला रहा था। यह न केवल कानून का उल्लंघन था बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा था।
नगर निगम आयुक्त प्रियंका राजावत ने स्पष्ट किया कि बिना वैध अनुमति के किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस मामले में केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने स्लॉटर हाउस प्रभारी और एआरआई को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा राजस्व निरीक्षक अमित अग्रवाल और स्वच्छता निरीक्षक जाकिर अहमद को भी उनके कर्तव्यों में लापरवाही के चलते सस्पेंड किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि इन अधिकारियों ने समय रहते इस अवैध गतिविधि की जानकारी उच्च स्तर तक नहीं पहुंचाई, जिसके कारण यह कारोबार लंबे समय तक चलता रहा।
प्रशासन का सख्त संदेश
खंडवा प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संकेत दिया है कि जिले में अवैध गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी ऐसे मामलों में लगातार जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
जिला प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इमलीपुरा के निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों से परेशान थे। इलाके में दुर्गंध और गंदगी के कारण रहना मुश्किल हो गया था।
लोगों का मानना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो यह मामला इतना बड़ा नहीं बनता।
क्या 2015 से चल रहा था कारोबार?
सोशल मीडिया और कुछ दावों में यह भी कहा जा रहा है कि यह अवैध धंधा 2015 से चल रहा था और इसमें खाद्य पदार्थों में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि, प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि अभी तक केवल पिछले कुछ वर्षों की गतिविधियों तक ही सीमित है। ऐसे में 2015 से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
FSSAI पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अगर इतने लंबे समय से यह गतिविधि चल रही थी, तो निगरानी एजेंसियों ने समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
हालांकि, इस पर संबंधित एजेंसियों की ओर से अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
The Khandwa illegal animal fat factory case has raised serious concerns about food safety in India. Authorities demolished an unauthorized unit in Imli Pura after recovering animal fat, bones, and hides. The incident highlights lapses in monitoring and has triggered discussions around FSSAI regulations, illegal slaughter activities, and public health risks in Madhya Pradesh.


















