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सलीम वास्तिक केस: सपा नेता की मांग—“मददगारों पर भी हो सख्त कार्रवाई”, जानिए पूरा मामला!

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AIN NEWS 1: गाजियाबाद और दिल्ली से जुड़े चर्चित सलीम वास्तिक (उर्फ सलीम खान) केस ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के नेता नसीम खान ने इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर न केवल आरोपी के खिलाफ, बल्कि उसके कथित समर्थकों और आर्थिक मदद करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक माहौल से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

🔎 क्या है पूरा मामला?

यह कहानी करीब तीन दशक पुरानी है, जिसकी शुरुआत 20 जनवरी 1995 से होती है। दिल्ली के एक 13 वर्षीय बच्चे संदीप बंसल के अचानक लापता होने से पूरे परिवार में हड़कंप मच गया था। वह रोज की तरह स्कूल जाने के लिए घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा।

अगले ही दिन परिवार को एक फोन कॉल मिला, जिसमें बच्चे के अपहरण की बात कही गई और 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई। अपहरणकर्ता ने निर्देश दिया कि पैसे लोनी फ्लाईओवर के पास एक बस में रख दिए जाएं।

जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे मामला खुलता गया। पुलिस को संदेह हुआ कि इस साजिश के पीछे स्कूल से जुड़े लोग हो सकते हैं। जांच के दौरान मार्शल आर्ट ट्रेनर सलीम खान और उसका साथी अनिल मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए।

⚖️ गिरफ्तारी से फरारी तक

सलीम खान को गिरफ्तार कर लिया गया और 1997 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

साल 2000 में वह जमानत पर बाहर आया और फरार हो गया। इसके बाद उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए नाम बदलकर “सलीम वास्तिक” रख लिया और अलग-अलग राज्यों में छिपता रहा।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लगातार ठिकाने बदलता रहा

गाजियाबाद के लोनी इलाके में लंबे समय तक रहकर पहचान छिपाई

पुलिस से बचने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता रहा

2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन वह कानून से बचता रहा।

🚨 2026 में गिरफ्तारी

करीब 25 साल तक फरार रहने के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस ने 25 अप्रैल 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

इस गिरफ्तारी के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया और इसके कई नए पहलू सामने आने लगे।

📩 सपा नेता का पत्र: क्या हैं आरोप?

समाजवादी पार्टी के नेता नसीम खान ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए कि:

सलीम वास्तिक को कुछ संगठनों और व्यक्तियों का समर्थन मिला

सोशल मीडिया के जरिए उसका प्रचार और महिमामंडन किया गया

उसे आर्थिक मदद भी दी गई

भड़काऊ बयान देकर सामाजिक तनाव बढ़ाने की कोशिश की गई

नसीम खान का कहना है कि यह केवल एक अपराधी का मामला नहीं, बल्कि उसके नेटवर्क की जांच जरूरी है।

🧑‍⚖️ किन लोगों पर लगे आरोप?

पत्र में कुछ प्रमुख नामों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि:

लोनी के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने आर्थिक मदद की

हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी और अन्य पदाधिकारी समर्थन में सामने आए

कुछ अन्य व्यक्तियों ने भी प्रचार और सहयोग किया

इसके अलावा, कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए हैं जो खुद को “एक्स मुस्लिम” बताते हैं और सोशल मीडिया पर विवादित बयान देते रहे हैं।

⚠️ संगठनों पर प्रतिबंध की मांग

नसीम खान ने अपने पत्र में मांग की है कि:

हिंदू रक्षा दल जैसे संगठनों की गतिविधियों की जांच हो

यदि दोषी पाए जाएं तो उन पर प्रतिबंध लगाया जाए

आरोपी से जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए

उन्होंने कहा कि इस तरह के नेटवर्क समाज में नफरत और तनाव फैलाने का काम करते हैं।

📱 सोशल मीडिया का एंगल

इस केस में सोशल मीडिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि:

आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहुंच बनाई

लोगों से आर्थिक सहायता जुटाई

भड़काऊ भाषणों के जरिए समर्थन हासिल किया

यह पहलू जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे नेटवर्क का विस्तार समझने में मदद मिलेगी।

🧩 “अपराधिक पृष्ठभूमि” का दावा

सपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों ने खुद को “एक्स मुस्लिम” बताया है, उनके पीछे भी आपराधिक पृष्ठभूमि हो सकती है। उनका कहना है कि:

ये लोग धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम करते हैं

NCR के माहौल को प्रभावित करते हैं

इनके खिलाफ भी जांच जरूरी है

हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।

⚖️ आगे क्या हो सकता है?

यह मामला अब कई स्तरों पर जांच की मांग कर रहा है:

सलीम वास्तिक के पूरे आपराधिक नेटवर्क की जांच

आर्थिक मदद करने वालों की पहचान

सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच

कथित संगठनों की भूमिका की पड़ताल

पुलिस और प्रशासन के लिए यह एक जटिल केस बन गया है, जिसमें पुराने अपराध और नए आरोप दोनों शामिल हैं।

सलीम वास्तिक का मामला सिर्फ एक पुराने अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक आरोपी वर्षों तक कानून से बच सकता है और कथित तौर पर नए नेटवर्क बना सकता है।

अब जब वह गिरफ्तार हो चुका है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उसके साथ जुड़े सभी लोगों की भी जांच होगी और क्या इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाएगा।

आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे होने की संभावना है।

The Salim Vastik case, originally linked to the 1995 Delhi kidnapping and murder of a minor, has resurfaced after his arrest in 2026 by Delhi Police. Samajwadi Party leader Naseem Khan has demanded strict action not only against the accused but also against individuals and organizations allegedly supporting him. The case highlights issues of criminal networks, political allegations, social media influence, and law enforcement challenges in India, making it a significant topic in current crime news and Ghaziabad developments.

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