मेरठ में अलमारी के नीचे चल रही थी अवैध हथियार फैक्ट्री, सुरंग के जरिए होता था अंदर प्रवेश
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने ऐसी अवैध हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है, जिसे बेहद शातिर तरीके से छिपाया गया था। यह फैक्ट्री किसी खुले गोदाम या खेत में नहीं, बल्कि एक मकान के कमरे में अलमारी के नीचे बनी गुप्त सुरंग के अंदर संचालित की जा रही थी। पुलिस की छापेमारी के दौरान जब अलमारी हटाई गई तो उसके नीचे बने रास्ते को देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
इस कार्रवाई में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक बीसीए का छात्र भी शामिल है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में हथियार, हथियार बनाने के उपकरण और मशीनरी बरामद की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से ऑन डिमांड तमंचे बनाकर सप्लाई कर रहा था।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के खरदौनी गांव में इस अवैध फैक्ट्री के संचालन की जानकारी पुलिस को मुखबिर के जरिए मिली थी। सूचना मिलने के बाद इंचौली पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त रूप से मंगलवार देर रात छापेमारी की।
जब पुलिस टीम मकान के अंदर पहुंची तो शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दिया। कमरे में एक बड़ी अलमारी रखी हुई थी, लेकिन जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ। अलमारी को हटाने पर उसके नीचे एक गुप्त रास्ता मिला, जो सुरंग की तरह नीचे जा रहा था। जैसे ही पुलिस टीम अंदर पहुंची, वहां हथियार बनाने का पूरा सेटअप देखकर सभी दंग रह गए।
सुरंग के अंदर बन रहे थे तमंचे
पुलिस के अनुसार सुरंग के अंदर छोटे स्तर की पूरी हथियार फैक्ट्री तैयार की गई थी। यहां अवैध तमंचे बनाए जा रहे थे। आरोपी बेहद गोपनीय तरीके से इस धंधे को चला रहे थे ताकि किसी को भनक न लगे।
फैक्ट्री के अंदर से पुलिस ने कई अधबने और तैयार हथियार बरामद किए। साथ ही हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए।
चार आरोपी गिरफ्तार, बीसीए छात्र भी शामिल
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी इमरान बताया जा रहा है, जो इस पूरे नेटवर्क का संचालक था। पुलिस के मुताबिक इमरान पहले भी अवैध हथियार फैक्ट्री चलाने के मामले में जेल जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपियों में एक बीसीए का छात्र उमंग ठाकुर भी शामिल है। जांच में सामने आया कि उमंग पढ़ाई के साथ-साथ गिरोह के लिए हथियारों की सप्लाई का काम करता था। वह तैयार तमंचों को ग्राहकों तक पहुंचाने और बिक्री कराने में भूमिका निभा रहा था।
बाकी आरोपियों की भी गिरोह में अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं। कोई ग्राहक लाने का काम करता था तो कोई सप्लाई चैन संभालता था।
भारी मात्रा में हथियार और मशीनरी बरामद
पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में हथियार और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया है। बरामद सामग्री में शामिल हैं:
एक अधबना तमंचा
दो तैयार तमंचे
36 स्प्रिंग
45 नाल
12 बोर की कई नाल
115 स्प्रिंग केस
वेल्डिंग मशीन
खराद मशीन
ग्राइंडर मशीन
ड्रिल बिट
बेंच वाइस
रिंच, पेचकस, आरी और रेती सहित अन्य उपकरण
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामान से साफ है कि आरोपी लंबे समय से अवैध हथियार तैयार कर रहे थे और उनके पास तकनीकी संसाधनों की कोई कमी नहीं थी।
ऑन डिमांड तैयार होते थे हथियार
जांच में पता चला है कि यह गिरोह ग्राहकों की मांग के हिसाब से तमंचे तैयार करता था। आरोपी पहले ऑर्डर लेते थे और फिर उसी हिसाब से हथियार बनाकर सप्लाई करते थे।
पुलिस को आशंका है कि इन हथियारों की सप्लाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक की जा रही थी। यही कारण है कि पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
मुख्य आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मुख्य आरोपी इमरान का आपराधिक इतिहास पुराना है। करीब 25 साल पहले भी वह अवैध हथियार फैक्ट्री चलाने के मामले में जेल जा चुका है।
इसके अलावा उसके खिलाफ मेरठ और दिल्ली में आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। वहीं अन्य आरोपी कुलदीप और नरेंद्र पर भी हथियारों से जुड़े मुकदमे पहले से दर्ज बताए जा रहे हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के तार किन-किन अपराधियों और गिरोहों से जुड़े हुए हैं।
बीसीए छात्र की भूमिका ने बढ़ाई चिंता
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा बीसीए छात्र उमंग ठाकुर की गिरफ्तारी को लेकर हो रही है। पुलिस का कहना है कि उमंग पढ़ाई के साथ इस गिरोह के लिए काम कर रहा था।
उसकी भूमिका हथियारों को अंतिम ग्राहकों तक पहुंचाने की थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या वह सोशल मीडिया या ऑनलाइन माध्यमों से भी ग्राहकों से संपर्क करता था।
युवाओं का इस तरह आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
पुलिस जुटा रही नेटवर्क की पूरी जानकारी
एसपी देहात अभिजीत कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि:
हथियार किन लोगों को सप्लाई किए जाते थे
गिरोह का नेटवर्क कितने जिलों तक फैला है
हथियार बनाने का कच्चा माल कहां से आता था
किन अपराधियों से इनका संपर्क था
अब तक कितने हथियार बेचे जा चुके हैं
पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
इलाके में फैली सनसनी
गांव के लोगों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस मकान में वे सामान्य गतिविधियां देखते थे, वहां अंदर ही अंदर अवैध हथियारों का कारोबार चल रहा है। जैसे ही पुलिस कार्रवाई की खबर फैली, इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपियों ने बेहद चालाकी से इस फैक्ट्री को छिपा रखा था, इसलिए किसी को शक नहीं हुआ।
पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही कार्रवाई
मेरठ पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। जिस तरह से गुप्त सुरंग बनाकर हथियार फैक्ट्री चलाई जा रही थी, उससे साफ है कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से इस धंधे में लगे हुए थे।
अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियार कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
Meerut Police exposed a shocking illegal arms factory operating through a secret tunnel hidden beneath a wardrobe in Kharadoni village of Uttar Pradesh. During the late-night raid, police arrested four accused including a BCA student allegedly involved in supplying illegal weapons to customers. The operation led to the recovery of country-made pistols, weapon parts, springs, barrels, and heavy machinery used for illegal gun manufacturing. The mastermind Imran reportedly has a criminal history linked to Arms Act cases in Meerut and Delhi. The incident has raised serious concerns over organized illegal firearms networks operating secretly in western Uttar Pradesh.


















