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काशी में गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को मिली जमानत, जानिए कोर्ट में क्या दी गई दलील!

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काशी में गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी मामला: हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को राहत

AIN NEWS 1: वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर आयोजित कथित इफ्तार पार्टी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। रमजान के दौरान गंगा नदी में नाव पर सवार होकर नॉनवेज भोजन करने और परोसने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 14 लोगों में से 8 को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। जबकि बाकी 6 आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई अभी बाकी है।

यह मामला सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी।

वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद

दरअसल, कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में कुछ युवक गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार पार्टी करते दिखाई दे रहे थे। आरोप लगाया गया कि पार्टी के दौरान नाव पर नॉनवेज भोजन भी परोसा गया था।

वीडियो सामने आने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने वाराणसी के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि गंगा नदी हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और वहां इस तरह का आयोजन धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।

इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू की और कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नाव चलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया था।

वाराणसी की अदालत से नहीं मिली थी राहत

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने वाराणसी की निचली अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

स्थानीय अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों ने जानबूझकर ऐसा कृत्य किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था।

निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद आरोपी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे थे।

हाईकोर्ट में क्या दी गई दलील?

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों की तरफ से कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं। यह मामला जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला और जस्टिस जितेंद्र कुमार की खंडपीठ के सामने आया।

आरोपियों के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किलों को जानबूझकर इस मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई शुरुआती एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ थी और बाद में आरोपियों के नाम जोड़े गए।

वकील ने अदालत को बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर बाद में पहचान कर गिरफ्तारी की गई, जबकि शुरुआत में किसी आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था। इसी आधार पर अदालत से जमानत देने की मांग की गई।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 8 आरोपियों को जमानत दे दी।

बाकी आरोपियों की जमानत पर जल्द सुनवाई

इस मामले में अभी 6 आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला आना बाकी है। जानकारी के अनुसार, उनकी जमानत अर्जी पर 18 मई को सुनवाई हो सकती है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि बाकी आरोपियों की सुनवाई में भी हाईकोर्ट पहले दिए गए आदेश और दलीलों को ध्यान में रख सकता है। हालांकि अंतिम फैसला कोर्ट की सुनवाई और तथ्यों के आधार पर ही होगा।

हिंदू संगठनों ने जताया था विरोध

वीडियो वायरल होने के बाद कई हिंदू संगठनों ने इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। संगठनों का कहना था कि गंगा नदी करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और वहां इस तरह की गतिविधियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी काफी चर्चा बटोरी थी। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

पुलिस ने क्या कहा था?

पुलिस की ओर से कहा गया था कि शिकायत मिलने और वीडियो की जांच के बाद कार्रवाई की गई। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया था।

जांच के दौरान यह भी दावा किया गया कि नाव को बीच नदी में ले जाकर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी।

मामला क्यों बना चर्चा का विषय?

यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बन गया। गंगा नदी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है, ऐसे में नाव पर नॉनवेज खाने के आरोपों ने विवाद को और बढ़ा दिया।

वहीं, बचाव पक्ष लगातार यह दावा करता रहा कि आरोपियों को राजनीतिक और सामाजिक दबाव के चलते फंसाया गया है। अब हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को मिली जमानत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

फिलहाल 8 आरोपी जमानत पर रिहा हो चुके हैं, जबकि बाकी 6 आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई बाकी है। हाईकोर्ट के आगामी फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शेष आरोपियों को राहत मिलती है या नहीं।

The Allahabad High Court has granted bail to eight accused in the controversial Kashi Ganga River Iftar Party case from Varanasi. The matter gained attention after a viral video allegedly showed people consuming non-vegetarian food during an Iftar gathering on a boat in the Ganga River. Police had arrested 14 accused under serious charges after complaints regarding religious sentiments and public outrage. The High Court considered arguments related to the FIR, identification of accused, and alleged false implication before granting relief to some of the accused. The remaining bail pleas are expected to be heard soon.

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