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एल्ड्रिन और बर्फ से पकाए जाने वाले केले क्या सच में जहरीले होते हैं? जानिए पूरी सच्चाई!

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AIN NEWS 1: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि “एल्ड्रिन और बर्फ से पकाए गए केले जहरीले होते हैं।” इस दावे को लेकर लोगों के बीच डर और भ्रम का माहौल बना हुआ है। कई लोग बाजार में बिक रहे केले खरीदने से भी हिचकिचा रहे हैं। लेकिन आखिर इस वायरल दावे में कितनी सच्चाई है? क्या वास्तव में केले को जहरीले केमिकल से पकाया जा रहा है? आइए जानते हैं पूरी सच्चाई और विशेषज्ञों की राय।

क्या होता है एल्ड्रिन?

एल्ड्रिन (Aldrin) एक बेहद खतरनाक कीटनाशक रसायन है, जिसका इस्तेमाल पहले खेती और कीड़े मारने के लिए किया जाता था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह रसायन इंसानी शरीर के लिए काफी नुकसानदायक माना जाता है। यही वजह है कि कई देशों में इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

अगर किसी फल या खाद्य पदार्थ में एल्ड्रिन की मात्रा पाई जाए तो वह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे शरीर में विषैले प्रभाव पड़ सकते हैं और लंबे समय तक सेवन करने पर गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में केले पकाने के लिए एल्ड्रिन का इस्तेमाल होने के कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं। सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कई दावे बिना किसी वैज्ञानिक पुष्टि के वायरल हो जाते हैं, जिससे लोगों में डर फैलता है।

क्या बर्फ से पकाए जाते हैं केले?

वायरल संदेशों में यह भी कहा जा रहा है कि बाजार में केले “बर्फ” से पकाए जाते हैं और इसी कारण वे जहरीले हो जाते हैं। लेकिन खाद्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह दावा पूरी तरह सही नहीं है।

असल में कई लोग “बर्फ” शब्द का इस्तेमाल ड्राई आइस (Dry Ice) के लिए करते हैं। ड्राई आइस कार्बन डाइऑक्साइड से तैयार की जाती है और इसका उपयोग फल-सब्जियों के ट्रांसपोर्ट और तापमान नियंत्रित रखने के लिए किया जाता है। सही तरीके से इस्तेमाल होने पर ड्राई आइस खुद जहरीली नहीं मानी जाती।

केले पकाने की प्रक्रिया में तापमान और गैस का संतुलन महत्वपूर्ण होता है। इसलिए कई व्यापारी नियंत्रित वातावरण में फलों को जल्दी पकाने के लिए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।

केले पकाने के असली तरीके क्या हैं?

विशेषज्ञ बताते हैं कि बाजार में केले को मुख्य रूप से तीन तरीकों से पकाया जाता है:

1. प्राकृतिक तरीके से पकाना

इस तरीके में केले को सामान्य तापमान पर समय देकर पकाया जाता है। यह सबसे सुरक्षित और पारंपरिक तरीका माना जाता है।

2. एथिलीन गैस का इस्तेमाल

आजकल बड़े स्तर पर फलों को पकाने के लिए एथिलीन गैस का इस्तेमाल किया जाता है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार नियंत्रित मात्रा में एथिलीन गैस का उपयोग अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। यह वही गैस है जो प्राकृतिक रूप से भी फलों में बनती है।

3. कैल्शियम कार्बाइड से पकाना

कुछ जगहों पर जल्दी मुनाफा कमाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है। यह तरीका खतरनाक और अवैध माना जाता है। इससे पकाए गए फल बाहर से पीले दिखाई देते हैं लेकिन अंदर से कच्चे रह सकते हैं।

कैल्शियम कार्बाइड से सिरदर्द, पेट दर्द, उल्टी, त्वचा संबंधी परेशानी और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर ऐसे कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करता रहता है।

कैसे पहचानें केमिकल से पकाए गए केले?

विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ संकेतों से आप पहचान सकते हैं कि केले प्राकृतिक तरीके से पके हैं या नहीं।

केले का रंग बहुत ज्यादा चमकीला पीला दिखाई दे

ऊपर से पका लेकिन अंदर से कच्चा निकले

स्वाद सामान्य से अलग लगे

केले पर काले धब्बे कम हों

अजीब या तेज गंध महसूस हो

ऐसे मामलों में सावधानी बरतना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की क्या राय है?

डॉक्टरों और फूड सेफ्टी विशेषज्ञों का कहना है कि हर पीला केला जहरीला नहीं होता। लोगों को सोशल मीडिया पर वायरल हर दावे पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फल खरीदते समय विश्वसनीय दुकानदारों से ही खरीदारी करें। खाने से पहले फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।

इसके अलावा अगर किसी फल में असामान्य स्वाद या गंध महसूस हो तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए।

सरकार और फूड विभाग की निगरानी

खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर बाजारों में जांच अभियान चलाता रहता है। कई राज्यों में केमिकल से फल पकाने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई भी की गई है।

सरकारी एजेंसियां लोगों से अपील करती हैं कि अफवाहों से बचें और किसी भी संदिग्ध खाद्य सामग्री की शिकायत संबंधित विभाग को दें।

वायरल दावे की सच्चाई क्या है?

पूरे मामले की जांच और विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह कहा जा सकता है कि:

एल्ड्रिन एक खतरनाक रसायन जरूर है।

लेकिन केले पकाने में इसके इस्तेमाल के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।

“बर्फ से पकाए गए केले जहरीले होते हैं” यह दावा पूरी तरह सही नहीं है।

असली खतरा कैल्शियम कार्बाइड जैसे अवैध केमिकल से है।

एथिलीन गैस नियंत्रित मात्रा में अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को बिना जांचे सच मान लेना कई बार भ्रम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है, लेकिन अनावश्यक डर फैलाने से भी बचना चाहिए।

अगर आप सुरक्षित फल खाना चाहते हैं तो हमेशा भरोसेमंद जगह से खरीदारी करें, फलों को धोकर खाएं और असामान्य दिखने वाले फलों से दूरी बनाकर रखें। जागरूकता और सही जानकारी ही ऐसी अफवाहों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

Bananas ripened with harmful chemicals like Aldrin or calcium carbide can pose serious health risks. Many viral claims on social media suggest that bananas are artificially ripened using ice and toxic substances. Experts say that while calcium carbide is dangerous and banned in many places, the use of ethylene gas is considered a safer method for fruit ripening. Consumers should learn how to identify chemically ripened bananas and understand the difference between natural and artificial ripening methods to avoid health problems.

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