कपिल सिब्बल ने CJP के लीगल फंड में ₹1 करोड़ देने का किया ऐलान, छात्रों की कानूनी मदद के लिए देशभर के वकीलों से सहयोग की अपील
AIN NEWS 1: देशभर में हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों और प्रदर्शन के बाद कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज हुए या संभावित आपराधिक मामलों को लेकर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी तेज हो गई है। इसी कड़ी में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा बनाए गए लीगल फंड में ₹1 करोड़ का योगदान देने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने देशभर के अधिवक्ताओं से भी इस पहल में आगे आने और आर्थिक सहयोग देने की अपील की है, ताकि उन छात्रों और प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता मिल सके जिनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं या दर्ज होने की संभावना है।
यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कई राज्यों में पुलिस कार्रवाई की गई है। वहीं सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जाती है।
छात्रों की कानूनी सहायता के लिए बनाया गया विशेष फंड
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में बताया कि संगठन ने एक विशेष लीगल फंड बनाया है। इस फंड का उद्देश्य उन छात्रों और प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है जिनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एफआईआर दर्ज हुई है या भविष्य में दर्ज हो सकती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पहले आश्वासन दिया गया था कि छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन विभिन्न राज्यों से लगातार गिरफ्तारियों और मुकदमों की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में संगठन ने कानूनी सहायता की व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया है।
सौरव दास ने बताया कि इस उद्देश्य से CJP सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के संपर्क में है, ताकि जरूरतमंद छात्रों को समय पर कानूनी मदद मिल सके।

कपिल सिब्बल ने किया ₹1 करोड़ देने का ऐलान
प्रेस वार्ता के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ₹1 करोड़ इस लीगल फंड में देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह राशि उन छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए उपयोग की जाएगी जिन्हें कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
उन्होंने देशभर के अधिवक्ताओं से भी अपील करते हुए कहा कि सभी वकीलों को इस अभियान में आगे आना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए। उनका मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ कानून का दुरुपयोग हुआ है तो उसे न्याय दिलाने के लिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है।
सिब्बल ने कहा कि देशभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। ऐसे मामलों की निगरानी करने और प्रभावित लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए एक संगठित व्यवस्था बनाई जाएगी।
विभिन्न राज्यों के मामलों पर रखी जाएगी नजर
कपिल सिब्बल ने बताया कि बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में जहां भी छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वहां दर्ज मामलों की लगातार निगरानी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कानूनी विशेषज्ञों की एक टीम इन मामलों का अध्ययन करेगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उनका कहना था कि कानून के दायरे में रहकर प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है और इसी उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई है।
छात्रों के लिए बनाई जाएगी विशेष वेबसाइट
कपिल सिब्बल ने यह भी जानकारी दी कि CJP जल्द ही एक समर्पित वेबसाइट शुरू करेगी। इस वेबसाइट पर उन छात्रों का विवरण उपलब्ध होगा जिनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि वेबसाइट केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वकीलों और स्वयंसेवकों को भी जोड़ने का मंच बनेगी। जो अधिवक्ता निशुल्क या रियायती दरों पर कानूनी सहायता देना चाहते हैं, वे भी इस पोर्टल के माध्यम से जुड़ सकेंगे।
इसके अलावा प्रभावित छात्र भी अपनी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध करा सकेंगे, जिससे उन्हें शीघ्र कानूनी सहायता मिल सके।
छात्रों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने की मांग
कपिल सिब्बल ने कहा कि उनकी मांग है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। यदि कहीं मामले दर्ज किए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
सौरव दास ने सरकार से निभाने को कहा वादा
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने प्रेस वार्ता में कहा कि संगठन भारत सरकार से पहले दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने की अपेक्षा करता है।
उन्होंने मांग की कि हिरासत में लिए गए सभी छात्रों और प्रदर्शनकारियों को जल्द रिहा किया जाए तथा देशभर में किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई न की जाए।
दास ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में छात्रों के खिलाफ अब भी पुलिस कार्रवाई जारी है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है।
CJP ने दोबारा आंदोलन की दी चेतावनी
प्रेस वार्ता के दौरान CJP ने स्पष्ट किया कि यदि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रुकी और गिरफ्तार लोगों को राहत नहीं मिली तो संगठन एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगा।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार और संगठन के बीच हुए समझौते का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। उनका दावा है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में कई छात्रों को गिरफ्तार किया गया तथा उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकारों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून के अनुसार की गई है।
बिहार सरकार का बड़ा ऐलान
इस बीच बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले राज्य में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सरकार के इस फैसले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ संगठनों ने इसे राहत देने वाला कदम बताया है, जबकि अन्य का कहना है कि पहले से दर्ज मामलों पर भी स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए।
राजनीतिक और कानूनी बहस तेज
कपिल सिब्बल की ओर से लीगल फंड में ₹1 करोड़ देने की घोषणा के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे जरूरतमंद छात्रों को न्याय पाने में मदद मिलेगी, जबकि विरोधी दल इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP द्वारा प्रस्तावित वेबसाइट कब शुरू होती है, कितने वकील इस अभियान से जुड़ते हैं और विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों में कानूनी सहायता किस प्रकार उपलब्ध कराई जाती है।
फिलहाल इतना तय है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों, संभावित कानूनी सहायता और सरकार के रुख को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।
Senior Advocate Kapil Sibal has announced a Rs 1 crore contribution to the CJP Legal Fund to provide legal aid for students facing criminal cases after recent protests across India. The initiative aims to connect Supreme Court lawyers, legal volunteers, and affected students through a dedicated website while monitoring FIRs and legal proceedings in different states. The announcement has intensified the debate over student protests, legal support, FIRs, Bihar government decisions, and civil rights in India, making it one of the most discussed political and legal developments in the country.



















