मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से महंत नारायण गिरि और स्वामी विद्या चेतन की शिष्टाचार भेंट, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर हुई चर्चा
AIN NEWS 1 लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शनिवार को राजधानी लखनऊ में दूधेश्वर नाथ मंदिर, गाजियाबाद के महंत श्री नारायण गिरि जी महाराज तथा नैमिषारण्य के संत स्वामी विद्या चेतन जी महाराज ने शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संत समाज के बीच हुई यह मुलाकात प्रदेश में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रदेश सरकार लगातार धार्मिक स्थलों के विकास, तीर्थ क्षेत्रों के पुनरुद्धार तथा सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही है। ऐसे में संत समाज के प्रतिनिधियों का मुख्यमंत्री से मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संत समाज की भूमिका पर हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान समाज में संतों की भूमिका, धार्मिक मूल्यों के संरक्षण तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाए रखने में संतों और धार्मिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
महंत नारायण गिरि जी महाराज ने भी प्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देशभर में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
दूधेश्वर नाथ मंदिर का महत्व
गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर नाथ मंदिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी धार्मिक मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। सावन मास, महाशिवरात्रि तथा अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
महंत नारायण गिरि जी लंबे समय से मंदिर के धार्मिक और सामाजिक कार्यों का संचालन कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में मंदिर परिसर में कई सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से भी मंदिर समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
नैमिषारण्य की आध्यात्मिक पहचान
बैठक में शामिल स्वामी विद्या चेतन जी महाराज का संबंध नैमिषारण्य से है, जो हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में स्थित नैमिषारण्य का उल्लेख अनेक पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि यहां ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी और अनेक धार्मिक ग्रंथों की रचना भी इसी पवित्र भूमि पर हुई।
प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों में नैमिषारण्य को एक प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सड़क, प्रकाश व्यवस्था, घाटों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, प्रयागराज, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं।
प्रदेश सरकार का मानना है कि धार्मिक पर्यटन न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। इसी कारण धार्मिक स्थलों के आधुनिकीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता पर जोर
बैठक के दौरान समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के विषय पर भी चर्चा हुई। संत समाज ने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक समय में युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं से है। सरकार इन परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
प्रदेश के विकास में संतों का योगदान
प्रदेश में समय-समय पर आयोजित धार्मिक आयोजनों, कथा प्रवचनों और सामाजिक अभियानों में संत समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। संत समाज न केवल धार्मिक चेतना को मजबूत करता है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
मुख्यमंत्री और संत समाज के बीच हुई यह शिष्टाचार भेंट इसी सहयोगात्मक संबंध का प्रतीक मानी जा रही है। माना जा रहा है कि भविष्य में भी धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर सरकार तथा संत समाज के बीच संवाद और सहयोग का सिलसिला जारी रहेगा।
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत नारायण गिरि जी महाराज और स्वामी विद्या चेतन जी महाराज के बीच हुई यह शिष्टाचार भेंट केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में सकारात्मक संवाद का अवसर भी रही। इस मुलाकात ने यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए सरकार और संत समाज मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath met Mahant Narayan Giri of Dudheshwar Nath Temple in Ghaziabad and Swami Vidya Chetan from Naimisharanya in Lucknow. The meeting highlighted the importance of religious tourism, cultural heritage preservation, spiritual development, temple infrastructure, and the role of saints in promoting social harmony. The discussion reflects the Uttar Pradesh government’s continued focus on strengthening religious destinations, enhancing pilgrim facilities, and preserving India’s rich spiritual traditions while boosting tourism and economic growth across the state.


















