संभल में सरकारी भूमि पर बनी मस्जिद पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, बुलडोजर से ढहाई गई दो मंजिला इमारत
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शनिवार को प्रशासन ने कथित अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दो मंजिला मस्जिद को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का दावा है कि यह मस्जिद कब्रिस्तान की सरकारी भूमि पर बनाई गई थी और अदालत के आदेश के बाद इसे हटाने की कार्रवाई की गई। पूरे अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई।
यह कार्रवाई नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गांव में स्थित मस्जिद मुस्तफा कादरी पर की गई। सुबह से ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान शुरू हुआ। सबसे पहले मस्जिद के आगे के हिस्से और सहायक ढांचे को हटाया गया। इसके बाद लगभग 55 फीट ऊंची मीनार को हाइड्रा क्रेन की सहायता से गिराया गया। इस दौरान आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह खाली करा लिया गया था ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

अदालत के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, तहसीलदार न्यायालय ने 21 अप्रैल को मस्जिद कमेटी के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी किया था। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने जिला प्रशासन के समक्ष अपील दायर की, लेकिन कार्रवाई पर रोक लगाने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इसके चलते प्रशासन ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया।
राजस्व विभाग की टीम ने पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी। नगर पंचायत सिरसी और अन्य विभागों से मशीनें, डंपर और सफाईकर्मी बुलाए गए थे। अभियान के लिए कई बुलडोजर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और सफाई कर्मियों को लगाया गया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। गांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। विभिन्न थानों की पुलिस टीमों के अलावा पीएसी जवानों को भी मौके पर लगाया गया।
मस्जिद के आसपास स्थित घरों को पहले ही खाली करा लिया गया था। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और पूरे अभियान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया।
मस्जिद से मिले पोस्टर और झंडे
कार्रवाई के दौरान मस्जिद की पहली मंजिल से कुछ पोस्टर और हरे रंग का झंडा मिलने की जानकारी भी सामने आई। इनमें से कुछ पोस्टरों पर “आई लव मोहम्मद” लिखा हुआ था।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बरामद सामग्री की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का दावा: सरकारी कब्रिस्तान की भूमि पर हुआ था निर्माण
राजस्व अभिलेखों के अनुसार जिस भूमि पर मस्जिद बनी हुई थी, वह सरकारी रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 120 वर्गमीटर भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया था।
प्रशासन ने यह भी बताया कि आसपास की कुछ अन्य सरकारी भूमि पर भी अतिक्रमण पाया गया है। जांच में खाद गड्ढे और वृक्षारोपण के लिए आरक्षित जमीन पर मकान निर्माण तथा खेती किए जाने की बात भी सामने आई है। इन मामलों की भी अलग से जांच की जा रही है।
मस्जिद कमेटी और ग्रामीणों का पक्ष
मस्जिद के मुतवल्ली और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मस्जिद काफी पुरानी है और कई वर्षों से यहां नियमित रूप से नमाज अदा की जाती रही है। उनका दावा है कि वर्तमान ढांचे का पुनर्निर्माण करीब दो दशक पहले कराया गया था, जिसमें लाखों रुपये खर्च हुए थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें कार्रवाई की जानकारी बहुत कम समय पहले मिली। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार के दिन यहां बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने आते थे और यह गांव का प्रमुख धार्मिक स्थल था।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनके पक्ष को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था।
दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी मस्जिद कमेटी
तहसील प्रशासन का कहना है कि जांच और सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी से भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। लेकिन ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण निजी भूमि पर किया गया था।
इसी आधार पर राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई और अंततः बेदखली का आदेश जारी हुआ।
पहले भी दर्ज हुआ था मुकदमा
इस मामले में जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि सरकारी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कराने के लिए गलत तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
इस मामले की जांच अभी भी विभिन्न स्तरों पर जारी है और प्रशासन का कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संभल में लगातार चल रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान
संभल जिले में पिछले कुछ समय से सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक और गैर-धार्मिक निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की है।
अधिकारियों का कहना है कि अभियान किसी विशेष समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं चलाया जा रहा, बल्कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कार्रवाई की जा रही है। जहां भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे पाए जाएंगे, वहां राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय के आदेशों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी।
फिलहाल संभल की यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ प्रशासन इसे सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की नियमित प्रक्रिया बता रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही
A major administrative action took place in Sambhal, Uttar Pradesh, where authorities demolished a two-storey mosque allegedly constructed on government cemetery land. The demolition followed a court order after officials claimed that the mosque committee failed to provide valid ownership documents. The operation included the removal of a 55-foot minaret, deployment of heavy police security, and the clearance of nearly 120 square meters of encroached land. The incident has once again brought attention to illegal construction, government land encroachment, and bulldozer actions in Uttar Pradesh.


















