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समोसा, पकौड़े और वड़ा पाव अब अखबार में बेचने पर होगी कार्रवाई? FSSAI के नए नियम से देशभर के दुकानदारों में हलचल!

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AIN NEWS 1: देशभर में समोसा, कचौड़ी, वड़ा पाव, पकौड़े, जलेबी और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले लाखों छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि खाने-पीने की वस्तुओं को अखबार में लपेटकर बेचना, परोसना या संग्रहित करना नियमों के खिलाफ है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हाल के वर्षों में FSSAI और विभिन्न राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार इस प्रथा के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में आज भी दुकानदार गर्म समोसे, पकौड़े, नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थ अखबार के कागज में लपेटकर ग्राहकों को देते दिखाई देते हैं। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

आखिर FSSAI ने अखबार के इस्तेमाल पर आपत्ति क्यों जताई?

FSSAI के अनुसार अखबार की छपाई में उपयोग होने वाली स्याही (इंक) में कई प्रकार के रसायन, रंग, बायोएक्टिव पदार्थ, भारी धातुएं और अन्य तत्व मौजूद हो सकते हैं। जब गर्म या तैलीय खाद्य पदार्थ सीधे अखबार के संपर्क में आते हैं, तो ये हानिकारक तत्व भोजन में मिल सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे भोजन का सेवन स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अखबार वितरण और उपयोग के दौरान कई जगहों से गुजरते हैं। इस दौरान उन पर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव भी जमा हो सकते हैं। यदि ऐसे कागज का उपयोग भोजन पैक करने में किया जाता है तो खाद्य पदार्थ दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है।

कौन-कौन से खाद्य पदार्थ सबसे ज्यादा प्रभावित?

भारत में सबसे अधिक अखबार का उपयोग निम्नलिखित खाद्य पदार्थों की पैकिंग में देखा जाता है—

समोसा

पकौड़े

वड़ा पाव

कचौड़ी

भजिया

जलेबी

चाट

नमकीन

बेकरी उत्पाद

तली हुई स्नैक्स

विशेष रूप से गर्म और तैलीय खाद्य पदार्थों में स्याही के रसायन अधिक तेजी से भोजन में पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि FSSAI ने तली हुई वस्तुओं से अतिरिक्त तेल सोखने के लिए भी अखबार के इस्तेमाल को प्रतिबंधित बताया है।

क्या यह नया नियम है?

सोशल मीडिया पर इसे कई बार “नया नियम” बताया जा रहा है, लेकिन वास्तव में अखबार में भोजन पैक करने पर रोक कोई नई व्यवस्था नहीं है। FSSAI पहले भी कई बार इस संबंध में एडवाइजरी जारी कर चुका है। Food Safety and Standards (Packaging) Regulations, 2018 के तहत समाचार पत्रों या इसी प्रकार की सामग्री का उपयोग खाद्य पदार्थों को लपेटने, ढकने या परोसने के लिए अनुमत नहीं है।

हालांकि अब विभिन्न राज्यों में इस नियम के अनुपालन पर अधिक जोर दिया जा रहा है और खाद्य सुरक्षा विभाग निरीक्षण अभियान भी चला रहे हैं।

नियम तोड़ने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत यदि कोई खाद्य व्यवसाय संचालक (Food Business Operator) खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मामले की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत कठोर दंड का प्रावधान भी हो सकता है।

हालांकि हर मामले में सीधे जेल की सजा नहीं होती। कार्रवाई संबंधित कानून, उल्लंघन की प्रकृति और जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है।

दुकानदारों को क्या करना होगा?

FSSAI ने खाद्य व्यवसाय संचालकों को सलाह दी है कि वे केवल फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करें। इसमें शामिल हो सकते हैं—

फूड ग्रेड पेपर

बटर पेपर

फूड ग्रेड बॉक्स

स्वीकृत पैकेजिंग शीट

सुरक्षित कंटेनर

प्रमाणित पैकेजिंग सामग्री

इन सामग्रियों का उपयोग भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?

FSSAI ने केवल दुकानदारों ही नहीं बल्कि आम उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे अखबार में पैक भोजन लेने से बचें। यदि कोई विक्रेता अभी भी इस प्रकार की पैकिंग कर रहा है, तो ग्राहक उसे सुरक्षित पैकेजिंग अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार अखबार की स्याही में मौजूद कुछ रसायन लंबे समय तक शरीर में पहुंचते रहने पर स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस प्रथा को समाप्त करने की कोशिश कर रही हैं।

भारत में सड़क किनारे मिलने वाले समोसे, पकौड़े, वड़ा पाव और अन्य लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की पैकिंग को लेकर अब खाद्य सुरक्षा मानकों पर सख्ती बढ़ रही है। FSSAI ने स्पष्ट कर दिया है कि अखबार में भोजन लपेटना सुरक्षित नहीं है और यह नियमों के विरुद्ध है। ऐसे में दुकानदारों को फूड-ग्रेड पैकेजिंग अपनानी होगी, जबकि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य पैकिंग के प्रति जागरूक रहना चाहिए। खाद्य सुरक्षा केवल नियमों का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

India’s food regulator FSSAI has strengthened enforcement of food safety regulations that prohibit the use of newspapers for wrapping, serving, storing, or packaging food items. The move affects street food vendors, sweet shops, restaurants, bakeries, and small food businesses across the country. According to FSSAI, newspaper ink may contain harmful chemicals, heavy metals, and contaminants that can migrate into food and pose serious health risks. The latest enforcement drive highlights the importance of food-grade packaging materials and compliance with Food Safety and Standards Regulations in India.

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