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उत्तर प्रदेश में महायुति में शिवसेना को मिले स्थान, पूर्वांचल की सीटों पर भागीदारी की मांग

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AIN NEWS 1 जौनपुर। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा रही शिवसेना अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी अपनी सक्रिय भागीदारी चाहती है। शिवसेना उत्तर भारतीय संगठन, मुंबई के उपाध्यक्ष संतोष सिंह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति में शिवसेना को शामिल करने और पार्टी को विधानसभा चुनावों में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है।

संतोष सिंह ने कहा कि जिस प्रकार महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा लंबे समय से साथ मिलकर काम करते रहे हैं और वर्तमान में भी शिवसेना महायुति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी पार्टी को गठबंधन में सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए। उनका कहना है कि शिवसेना का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और पार्टी के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है, इसलिए उसे राजनीतिक भागीदारी भी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिवसेना का उत्तर प्रदेश, विशेषकर पूर्वांचल क्षेत्र में प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और कार सेवा के दौरान शिवसैनिकों की भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में शिवसेना ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिवसेना को उचित प्रतिनिधित्व मिलना स्वाभाविक है।

संतोष सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति में कई क्षेत्रीय दल शामिल हैं। इनमें अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जैसी पार्टियां शामिल हैं, जिन्हें गठबंधन के तहत राजनीतिक भागीदारी और चुनाव लड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि शिवसेना भी भाजपा की विचारधारा के निकट रही है और लंबे समय से राष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा का समर्थन करती रही है। इसलिए शिवसेना को भी महायुति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से पूर्वांचल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां शिवसेना का संगठन लगातार मजबूत हो रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता गांव-गांव और कस्बों तक पहुंचकर संगठन विस्तार में जुटे हुए हैं। उन्होंने मांग की कि पूर्वांचल के प्रत्येक जिले में कम से कम एक विधानसभा सीट शिवसेना को दी जानी चाहिए, ताकि पार्टी अपने जनाधार को लोकतांत्रिक तरीके से जनता के सामने प्रस्तुत कर सके।

संतोष सिंह ने कहा कि जौनपुर जिला शिवसेना के लिए विशेष महत्व रखता है। उनका कहना है कि मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीयों की बड़ी आबादी पूर्वांचल से आती है और उनमें जौनपुर के लोगों की संख्या काफी अधिक है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में रहने वाले हर चार उत्तर भारतीयों में से एक व्यक्ति जौनपुर से जुड़ा होता है। यही कारण है कि जौनपुर और मुंबई के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध बहुत मजबूत हैं।

उन्होंने कहा कि जौनपुर के लोगों ने मुंबई के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और बड़ी संख्या में वहां रोजगार, व्यापार और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। ऐसे में जौनपुर जिले में शिवसेना का मजबूत जनाधार विकसित होने की संभावना है। उन्होंने मांग की कि आगामी विधानसभा चुनावों में जौनपुर की एक या दो विधानसभा सीटों पर शिवसेना को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाए।

संतोष सिंह ने कहा कि यदि शिवसेना को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर मिलता है तो पार्टी कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ जनता के बीच जाएंगे और गठबंधन को मजबूत बनाने का काम करेंगे। उनका मानना है कि शिवसेना की भागीदारी से भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन को पूर्वांचल क्षेत्र में अतिरिक्त राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व से भी अपील की कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और भाजपा के केंद्रीय तथा उत्तर प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करें। उन्होंने कहा कि शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं को गठबंधन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही औपचारिक पहल करनी चाहिए। उनका विश्वास है कि यदि सकारात्मक संवाद होता है तो उत्तर प्रदेश में भी महाराष्ट्र की तरह भाजपा और शिवसेना के बीच मजबूत राजनीतिक साझेदारी विकसित हो सकती है।

संतोष सिंह ने कहा कि शिवसेना के कार्यकर्ता लंबे समय से संगठन के विस्तार और जनसंपर्क अभियान में लगे हुए हैं। पार्टी के समर्थक चाहते हैं कि उन्हें भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि गठबंधन की मजबूती सभी सहयोगी दलों की भागीदारी से ही संभव है और शिवसेना भी इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाना चाहती है।

उन्होंने अंत में कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिवसेना की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए पार्टी को महायुति में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा बल्कि गठबंधन को भी जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा और शिवसेना को उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अवसर प्राप्त होगा।

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