36 दिन बाद खत्म हुआ जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद NDMC ने शुरू किया सफाई अभियान
AIN NEWS 1: नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से जारी छात्र आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा की। इसके साथ ही जंतर-मंतर का माहौल पूरी तरह बदल गया है। जहां पिछले एक महीने से अधिक समय तक टेंट, बैनर, मंच और हजारों प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी थी, वहीं अब पूरा इलाका शांत और सामान्य दिखाई दे रहा है।
36 दिनों तक चला आंदोलन
यह आंदोलन देशभर के छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के विरोध में शुरू किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। छात्रों की प्रमुख मांग थी कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू की जाए।

धीरे-धीरे यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। कई सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और विभिन्न राज्यों से आए छात्रों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया। जंतर-मंतर लगातार 36 दिनों तक छात्रों की आवाज का केंद्र बना रहा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त
छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह फैसला उनकी लंबे समय से उठाई जा रही मांगों का परिणाम है। हालांकि कई छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिक मांग है।
आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के दौरान छात्र नेताओं ने कहा कि यदि भविष्य में उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
जंतर-मंतर पर बदला माहौल
आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर का दृश्य पूरी तरह बदल गया। पिछले कई सप्ताह से जहां धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे, वहीं अब टेंट हट चुके हैं, मंच खाली हो गया है और सड़कें सामान्य रूप से खुल गई हैं। पुलिस द्वारा लगाए गए अस्थायी बैरिकेड भी हटाए जाने लगे हैं, जिससे आसपास के इलाकों में यातायात सामान्य होने लगा है।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने भी राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि लंबे समय तक चले आंदोलन के कारण यातायात और व्यवसाय पर असर पड़ा था, लेकिन अब स्थिति सामान्य होने लगी है।
NDMC ने शुरू किया व्यापक सफाई अभियान
आंदोलन समाप्त होने के तुरंत बाद नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने पूरे इलाके में बड़े स्तर पर सफाई अभियान शुरू कर दिया। परिषद की ओर से जंतर-मंतर सहित संसद मार्ग, टॉलस्टॉय मार्ग, जय सिंह मार्ग और कनॉट प्लेस के आसपास विशेष सफाई अभियान चलाया गया।
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि पूरे क्षेत्र को जल्द से जल्द साफ और व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों और मशीनों की तैनाती की गई है। सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा कचरे को हटाया जा रहा है तथा पूरे इलाके का सैनिटाइजेशन भी किया जा रहा है।
सफाई कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा
सुबह से ही सफाई कर्मचारियों की टीमें विभिन्न स्थानों पर पहुंच गईं। उन्होंने टेंट हटने के बाद बचे प्लास्टिक, बैनर, पोस्टर, लकड़ी, कपड़े और अन्य कचरे को हटाने का काम शुरू किया। इसके अलावा सार्वजनिक शौचालयों और आसपास के क्षेत्रों की भी विशेष सफाई की गई ताकि पूरा इलाका फिर से सामान्य स्थिति में लौट सके।
छात्रों ने क्या कहा?
आंदोलन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। छात्रों ने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही परीक्षा सुधारों को लेकर ठोस कदम उठाएगी ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को पेपर लीक जैसी घटनाओं का सामना न करना पड़े।
कुछ छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि आंदोलन समाप्त होने का मतलब संघर्ष समाप्त होना नहीं है। यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज फिर उठाएंगे।
सरकार के सामने नई चुनौती
आंदोलन समाप्त होने के बावजूद सरकार के सामने अब परीक्षा सुधारों को लेकर जनता की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, डिजिटल सुरक्षा, पेपर लीक रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
दिल्ली में सामान्य हुई स्थिति
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अब सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू हो चुकी हैं। यातायात सुचारु रूप से चल रहा है और लोग बिना किसी बाधा के अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। एनडीएमसी का सफाई अभियान भी लगातार जारी है ताकि पूरा क्षेत्र पहले की तरह स्वच्छ और व्यवस्थित दिखाई दे।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं। छात्र चाहते हैं कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए ठोस नीतिगत फैसले लिए जाएं। यदि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाती है, तो इससे देशभर के करोड़ों छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
36 दिनों तक चला जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का एक बड़ा प्रतीक बनकर सामने आया। आंदोलन समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर में सामान्य स्थिति लौट आई है और एनडीएमसी पूरे क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाने में जुटी है। हालांकि धरना खत्म हो गया है, लेकिन परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की बहस अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि छात्रों की उम्मीदें कितनी पूरी होती हैं।
The 36-day Jantar Mantar Student Protest in Delhi concluded after Union Education Minister Dharmendra Pradhan resigned, marking a significant moment in the ongoing demand for NEET exam reforms, paper leak investigations, and greater transparency in India’s competitive examination system. Following the end of the protest, NDMC launched a large-scale cleanup drive across Jantar Mantar and nearby areas, restoring normalcy. The movement drew nationwide attention and intensified discussions on education policy, examination security, and accountability.



















