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Telegram Ban पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NEET पेपर लीक विवाद में राहत देने से किया इनकार!

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Telegram Ban: पेपर लीक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, जानिए क्यों जारी रहेगा ऐप पर प्रतिबंध

AIN NEWS 1 नई दिल्ली: NEET-UG परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद के बीच मैसेजिंग ऐप Telegram को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती देने वाली Telegram की याचिका खारिज कर दी, जिसमें परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐप पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। अदालत ने माना कि परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की कार्रवाई उचित आधार पर की गई थी।

NEET री-टेस्ट से पहले लिया गया था फैसला

केंद्र सरकार ने NEET-UG री-टेस्ट से पहले Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। सरकार का कहना था कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी प्रश्न पत्र, पेपर लीक से जुड़े दावे और परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत कार्रवाई की गई।

सरकार के अनुसार, Telegram पर कुछ ऐसे चैनल और ग्रुप सक्रिय थे, जहां परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील सामग्री साझा किए जाने की शिकायतें मिली थीं। अधिकारियों का तर्क था कि परीक्षा से ठीक पहले ऐसी गतिविधियां लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।

Telegram ने कोर्ट में क्या दलील दी?

Telegram ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार के प्रतिबंध को चुनौती दी थी। कंपनी की ओर से कहा गया कि पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना एक कठोर कदम है, क्योंकि Telegram का इस्तेमाल लाखों लोग पढ़ाई, बिजनेस, कम्युनिकेशन और अन्य जरूरी कामों के लिए करते हैं।

कंपनी ने यह भी कहा कि कुछ गलत गतिविधियों के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। Telegram के मुताबिक उसने आपत्तिजनक सामग्री और अवैध चैनलों पर कार्रवाई की है।

कोर्ट ने क्यों नहीं हटाया प्रतिबंध?

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की दलीलों को महत्व दिया। अदालत ने माना कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल परीक्षा में गड़बड़ी के लिए किया जा रहा है तो सरकार को कदम उठाने का अधिकार है।

कोर्ट ने यह भी माना कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि सीमित अवधि के लिए लगाया गया है। इसी आधार पर अदालत ने Telegram को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।

150 मिलियन से ज्यादा यूजर्स पर पड़ा असर

Telegram भारत में बेहद लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है। कंपनी की ओर से अदालत में कहा गया कि इस फैसले से बड़ी संख्या में सामान्य यूजर्स प्रभावित हुए हैं। Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने भी पहले कहा था कि प्रतिबंध का असर आम यूजर्स पर पड़ रहा है।

हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम आम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।

पेपर लीक पर बढ़ी चिंता

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का मुद्दा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। छात्रों और अभिभावकों की मांग रही है कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को पकड़ा जाए।

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी लाखों छात्रों के भविष्य पर असर डाल सकती है। इसी कारण सरकार ने डिजिटल माध्यमों पर भी निगरानी बढ़ाने की बात कही है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर बहस

Telegram विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद गलत गतिविधियों के लिए कंपनियों की जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए।

एक तरफ सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगानी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल अधिकारों से जुड़े लोग मानते हैं कि कार्रवाई करते समय सामान्य यूजर्स के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद Telegram पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध जारी रहेगा। इस मामले ने परीक्षा सुरक्षा, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

The Delhi High Court has upheld the temporary Telegram ban in India amid the NEET UG paper leak controversy. The court supported the government’s decision to restrict Telegram access to prevent misuse of the platform for fake exam papers, cheating networks, and misinformation before the NEET re-examination. The case highlights important issues related to Telegram ban, digital platform responsibility, online security, exam integrity, and internet regulation in India.

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