AIN NEWS 1 | महाराष्ट्र के नागपुर से ऑनलाइन डेटिंग ऐप के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने ऐसे कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो गे-डेटिंग ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवकों को अपने जाल में फंसाता था। आरोप है कि पहले कई दिनों तक बातचीत कर विश्वास जीता जाता, फिर मिलने या लिफ्ट के बहाने बुलाकर अपहरण किया जाता और उसके बाद मोबाइल, एटीएम कार्ड तथा नकदी लूट ली जाती थी।
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच के अनुसार, गिरोह ने इसी तरीके से कई लोगों को निशाना बनाया हो सकता है। फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
कैसे काम करता था कथित गिरोह?
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले गे-डेटिंग ऐप पर फर्जी पहचान बनाकर युवकों से संपर्क करते थे। शुरुआत में सामान्य बातचीत होती थी और कई दिनों तक लगातार चैट के जरिए भरोसा कायम किया जाता था।
जब सामने वाला व्यक्ति पूरी तरह विश्वास करने लगता, तब मुलाकात का समय और स्थान तय किया जाता। कुछ मामलों में आरोपियों द्वारा रास्ते में लिफ्ट मांगने जैसी स्थिति भी बनाई जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर बाकी साथी मौके पर पहुंच जाते और वारदात को अंजाम देते।
पुलिस का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पहले से योजनाबद्ध तरीके से की जाती थी।
डिलीवरी बॉय कैसे बना शिकार?
पुलिस के मुताबिक, 22 जून की रात एक डिलीवरी बॉय अपना काम खत्म कर एक्टिवा से घर लौट रहा था। नागपुर के मांकापुर चौक के पास एक युवक ने उससे लिफ्ट मांगी।
मानवीय आधार पर मदद करते हुए डिलीवरी बॉय ने उसे अपनी स्कूटी पर बैठा लिया। कुछ दूरी तय करने के बाद कथित तौर पर अन्य आरोपी भी वहां पहुंच गए। आरोप है कि सभी ने मिलकर युवक का अपहरण कर लिया।
इसके बाद पीड़ित से मोबाइल फोन, बाइक की चाबी और एटीएम कार्ड छीन लिया गया। पुलिस का आरोप है कि युवक को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर धमकाया गया और उसके साथ मारपीट भी की गई।
परिचितों से मंगवाए पैसे
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित के मोबाइल का इस्तेमाल कर उसके दोस्तों और परिचितों को फोन किए।
विभिन्न बहाने बनाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। पीड़ित के परिचितों ने उसकी मदद समझकर लगभग 90 हजार रुपये उसके बैंक खाते में भेज दिए।
आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने उसी एटीएम कार्ड का उपयोग कर पूरी रकम बैंक खाते से निकाल ली।
घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने कैसे सुलझाया मामला?
मांकापुर पुलिस ने मामले की जांच के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित कीं।
जांच के दौरान पुलिस ने—
- घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
- तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया।
- मोबाइल लोकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की।
- मुखबिर तंत्र की मदद से संदिग्धों की पहचान की।
इन सभी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पांच आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?
पुलिस ने इस मामले में जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार बताई गई है—
- मोहम्मद शेख जाकिर
- कुणाल मांद्रे
- सुल्तान अली सैयद
- फरहान फैजान खान
- शिजान शेख फकरुद्दीन
सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इन लोगों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया था।
डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जारी
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि—
- क्या गिरोह लंबे समय से सक्रिय था?
- कितने लोग अब तक शिकार बने?
- क्या अलग-अलग डेटिंग ऐप का भी इस्तेमाल किया गया?
- क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं?
यदि जांच में अन्य मामलों का खुलासा होता है तो आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स के बढ़ते दुरुपयोग पर सवाल
ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म लोगों को नए संबंध बनाने का अवसर देते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनका दुरुपयोग कर अपराध करने के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी प्रोफाइल बनाना, लंबे समय तक विश्वास जीतना और फिर आर्थिक अपराध या ब्लैकमेल करना अपराधियों का सामान्य तरीका बनता जा रहा है।
हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी भी डेटिंग ऐप का उपयोग करने वाले अधिकांश लोग वैध उद्देश्य से प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। अपराध कुछ व्यक्तियों द्वारा प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग से जुड़े होते हैं, न कि स्वयं ऐप या उसके उपयोगकर्ताओं से।
ऑनलाइन डेटिंग ऐप इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं—
- पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक स्थान पर करें।
- किसी अनजान व्यक्ति को वाहन में न बैठाएं और न ही उसके साथ सुनसान जगह पर जाएं।
- अपनी बैंकिंग जानकारी, एटीएम पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
- परिवार या दोस्तों को अपनी लोकेशन और मिलने की जानकारी पहले से दें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
नागपुर में सामने आया यह मामला दिखाता है कि अपराधी अब सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी कथित तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था तथा कितने लोग इसका शिकार बने।
अस्वीकरण: यह समाचार पुलिस द्वारा दर्ज मामले और प्रारंभिक जांच के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है। जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक सभी आरोपी कानून की दृष्टि में निर्दोष माने जाते हैं।


















