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मुरादाबाद में राम मंदिर चंदे के सवाल पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, पत्रकार को दी खुली चुनौती!

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- कैमरा हाथ में होने का मतलब यह नहीं कि बिना प्रमाण के आरोप लगाए जाएं

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उस समय माहौल गरमा गया, जब राम मंदिर चंदे से जुड़े सवाल पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और एक पत्रकार के बीच तीखी बहस हो गई। गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के संकल्प के साथ देशभर में यात्रा कर रहे शंकराचार्य इन दिनों उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में मुरादाबाद पहुंचे शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत की।

प्रेस वार्ता के दौरान राम मंदिर चंदा संग्रह को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य नाराज हो गए। उन्होंने पत्रकार से कहा कि केवल कैमरा हाथ में होने से किसी को भी कोई भी बात कहने का अधिकार नहीं मिल जाता। उन्होंने सवाल करने वाले पत्रकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी गांव से चंदा लेने को लेकर कोई दावा किया जा रहा है तो पहले उसके प्रमाण सामने रखे जाएं।

1000 गांवों से चंदा जुटाने के सवाल पर हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, पत्रकार ने शंकराचार्य से राम मंदिर निर्माण के लिए करीब 1000 गांवों से चंदा जुटाने और उससे जुड़े आरोपों को लेकर सवाल किया था। इस सवाल पर शंकराचार्य ने आपत्ति जताई और कहा कि बिना जांच और प्रमाण के किसी भी संस्था या व्यक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी को लगता है कि चंदा संग्रह में कोई गड़बड़ी हुई है तो वह गांवों की सूची और तथ्य सामने रखे। इसके बाद वह खुद पत्रकार के साथ उन गांवों में जाने के लिए तैयार हैं और लोगों से वास्तविक स्थिति जानेंगे।

शंकराचार्य ने कहा कि पत्रकारिता का आधार तथ्य और सत्य होना चाहिए। केवल चर्चा या आरोपों के आधार पर किसी विषय को प्रस्तुत करना समाज में भ्रम पैदा कर सकता है।

राम मंदिर चंदे की जांच रिपोर्ट को लेकर उठाए सवाल

मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर चंदे से जुड़ी जांच का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर इस मामले में जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि जांच में क्या सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार संवेदनशील मामलों की जांच रिपोर्ट लंबे समय तक सामने नहीं आती, जिससे लोगों के मन में सवाल पैदा होते हैं।

हालांकि, इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक स्थिति अलग-अलग समय पर सामने आती रही है। शंकराचार्य ने अपनी ओर से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक मुद्दे से जुड़े मामलों में सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए।

गो-प्रतिष्ठा यात्रा के दौरान रखी अपनी मांग

मुरादाबाद पहुंचने का मुख्य उद्देश्य शंकराचार्य की गो-प्रतिष्ठा यात्रा बताया गया। उन्होंने एक बार फिर सरकार से मांग की कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जाए।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में गाय का विशेष महत्व रहा है। करोड़ों लोग गाय को श्रद्धा और आस्था से देखते हैं। ऐसे में सरकार को इस भावना का सम्मान करते हुए गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

शंकराचार्य ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक भावना से जुड़ा हुआ है। उनका उद्देश्य समाज में गाय संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

बयान के बाद चर्चा में आया मामला

शंकराचार्य और पत्रकार के बीच हुई यह बातचीत सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई। समर्थकों ने शंकराचार्य के बयान को तथ्यों और प्रमाणों की मांग से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाने के तरीके पर चर्चा की।

फिलहाल यह मामला राम मंदिर चंदा, जांच प्रक्रिया और धार्मिक मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच एक नया विवाद बनकर सामने आया है। शंकराचार्य ने साफ कहा कि किसी भी आरोप की पुष्टि प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए और जनता के सामने पूरी जानकारी रखी जानी चाहिए।

मुरादाबाद में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सवाल पूछते समय तथ्य, प्रमाण और जिम्मेदारी का कितना महत्व है।

Shankaracharya Avimukteshwaranand has sparked discussion after his reaction to questions related to the Ram Mandir donation controversy in Moradabad, Uttar Pradesh. During his Gau Mata movement journey, the religious leader questioned the delay in the SIT investigation report and challenged allegations without evidence. This article covers the latest Moradabad news, Ram Mandir Chanda controversy, Shankaracharya Avimukteshwaranand statement, Uttar Pradesh updates and the demand to declare cow as Rashtramata.

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