लखनऊ पुलिस में बड़ी कार्रवाई: सोशल मीडिया के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के दोषी आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला बर्खास्त
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस विभाग ने अनुशासनहीनता के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करने, वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ बिना प्रमाण आरोप लगाने और पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि विभागीय जांच के दौरान सभी तथ्यों की गहन समीक्षा की गई। जांच समिति ने संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य पक्षों के बयान दर्ज किए तथा आरोपी आरक्षी को भी अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया। हालांकि, आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला अपने ऊपर लगे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।

जांच समिति ने की मामले की विस्तृत जांच
पुलिस विभाग के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच के लिए 7 मई 2026 को एक जांच समिति का गठन किया गया था। समिति ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले की जांच की। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिए गए तथा उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण किया गया।
जांच में सामने आया कि आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों का उपयोग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ ऐसे आरोप लगाए, जिनके समर्थन में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया।

विभाग का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां पुलिस बल की आंतरिक व्यवस्था और अनुशासन को प्रभावित करती हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित नियमों और आचरण संहिता का पालन करें।
वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों को बताया गया निराधार
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से किए गए आरोप जांच में प्रमाणित नहीं हो सके। विभाग ने इसे पुलिस संगठन की छवि को प्रभावित करने वाला कृत्य माना।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को अपनी शिकायत या समस्या रखने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए विभागीय प्रक्रिया निर्धारित है। बिना अनुमति सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाना और विभागीय अनुशासन को प्रभावित करने वाले कदम उठाना सेवा नियमों के विरुद्ध माना गया।
सोशल मीडिया नीति और सेवा नियमों का उल्लंघन
लखनऊ पुलिस के मुताबिक, आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल में उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023 का उल्लंघन किया गया।
इसके अलावा उन पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम 3, 6, 7 और 27 के उल्लंघन का भी आरोप सिद्ध हुआ। साथ ही उत्तर प्रदेश वर्दी विनियमों के प्रावधानों का उल्लंघन भी जांच में सामने आया।
विभाग ने कहा कि पुलिस सेवा में रहते हुए कर्मचारियों से अनुशासन, मर्यादित व्यवहार और विभागीय गरिमा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। इन नियमों का उल्लंघन गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।
पुलिस विभाग ने लिया सख्त फैसला
जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया।
विभाग का मानना है कि पुलिस बल में अनुशासन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। पुलिसकर्मियों द्वारा नियमों के उल्लंघन या विभाग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाता है।
पुलिस विभाग में अनुशासन को लेकर सख्त रुख
हाल के वर्षों में पुलिस विभाग सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर लगातार दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर पोस्ट, टिप्पणी या किसी भी तरह की सार्वजनिक गतिविधि करते समय विभागीय नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया एक प्रभावी माध्यम है, लेकिन सरकारी कर्मचारी इसका उपयोग जिम्मेदारी और नियमों के दायरे में रहकर ही कर सकते हैं।
लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई को विभागीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी का मामला पुलिस विभाग में अनुशासन और सोशल मीडिया उपयोग से जुड़े नियमों की अहमियत को सामने लाता है। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद की गई इस कार्रवाई से यह संदेश दिया गया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए कर्मचारियों को निर्धारित आचार संहिता और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
Lucknow Police has dismissed constable Sunil Kumar Shukla from service after a departmental inquiry found him guilty of social media misuse, indiscipline, violation of Uttar Pradesh government employee conduct rules, and spreading unsupported allegations against senior police officers. The Lucknow Police Commissionerate stated that the inquiry committee provided him an opportunity to present evidence, but no valid proof was submitted. This action highlights the strict disciplinary measures taken by Uttar Pradesh Police regarding social media policy violations and maintaining the dignity of the police force.


















