राम मंदिर चंदे विवाद पर पिंकी चौधरी का बयान, बोले- “हमारा पैसा है, हमें कोई आपत्ति नहीं; सवाल सब धार्मिक संस्थानों पर उठने चाहिए”
AIN NEWS 1 गाजियाबाद: राम मंदिर से जुड़े चंदे और आर्थिक पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस के बीच हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जारी किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए दिया गया धन हिंदू समाज के श्रद्धालुओं का है और इस मुद्दे को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
पिंकी चौधरी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों लोगों ने अपनी श्रद्धा और आस्था के साथ योगदान दिया है। उन्होंने दावा किया कि मंदिर से जुड़े चंदे को लेकर बार-बार सवाल खड़े करना एकतरफा नजरिया है। उनके अनुसार, अगर किसी भी तरह की जांच या चर्चा होती है तो वह सभी धार्मिक संस्थानों में मिलने वाले दान और व्यवस्थाओं को लेकर समान रूप से होनी चाहिए।

“राम मंदिर का पैसा हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है”
वीडियो संदेश में पिंकी चौधरी ने कहा कि राम मंदिर के लिए दिया गया चंदा हिंदू समाज की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी इच्छा से मंदिर निर्माण में योगदान दिया है और यह विषय केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मंदिर के धन के गलत इस्तेमाल से जुड़ा सवाल उठाता है तो उस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन केवल राम मंदिर को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मंदिर से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरे धार्मिक संस्थानों के दान पर भी सवाल उठाने की मांग
पिंकी चौधरी ने अपने बयान में कहा कि देश में कई धार्मिक संस्थानों को दान दिया जाता है, लेकिन उन पर उसी तरह चर्चा नहीं होती जिस तरह राम मंदिर से जुड़े मामलों पर होती है।
उन्होंने कहा कि अगर धार्मिक संस्थानों को मिलने वाले चंदे और आर्थिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है तो यह प्रक्रिया सभी के लिए समान होनी चाहिए। उन्होंने मदरसों और चर्चों को मिलने वाले दान का भी जिक्र करते हुए कहा कि सभी संस्थानों के आर्थिक मामलों पर समान रूप से सवाल और चर्चा होनी चाहिए।
राम मंदिर आंदोलन का किया जिक्र
अपने बयान में पिंकी चौधरी ने राम मंदिर आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय तक संघर्ष हुआ और बड़ी संख्या में लोगों ने आंदोलन में भाग लिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग आज मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वे उस समय कहां थे जब अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन चल रहा था। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण करोड़ों लोगों की आस्था और वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
मंदिर को बदनाम करने की कोशिश का लगाया आरोप
हिंदू रक्षा दल प्रमुख ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर राम मंदिर से जुड़े मामलों को विवाद का विषय बनाकर मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इससे जुड़े मामलों पर चर्चा करते समय संवेदनशीलता और निष्पक्षता दोनों जरूरी हैं।
चंदे और पारदर्शिता को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
गौरतलब है कि बड़े धार्मिक और सामाजिक संस्थानों को मिलने वाले दान और उनके उपयोग को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा होती रही है। कई लोग धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता की मांग करते हैं, जबकि समर्थक पक्ष इसे आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बताते हैं।
राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े आर्थिक मामलों पर भी समय-समय पर अलग-अलग राय सामने आती रही है। कुछ लोग व्यवस्था की पारदर्शिता पर जोर देते हैं, वहीं समर्थक इसे श्रद्धालुओं के विश्वास और योगदान से जुड़ा मामला मानते हैं।
बयान के बाद फिर तेज हुई बहस
पिंकी चौधरी के इस बयान के बाद राम मंदिर चंदे को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। उनके समर्थकों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों के मामलों में समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जबकि आलोचक पक्ष वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण मानता है।
फिलहाल उनका वीडियो बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और राम मंदिर से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
The Ram Mandir donation controversy has gained attention after Hindu Raksha Dal chief Pinky Chaudhary issued a statement in Ghaziabad regarding temple funds and religious donations. He defended the Ram Mandir donation system, stating that the funds are contributed by Hindu devotees and questioned why similar discussions are not raised about other religious institutions. The statement has renewed debate over transparency, religious donations, Ayodhya Ram Temple, and public accountability in India.


















