AIN NEWS 1: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि “राम मंदिर का हिसाब मांगने वाले वही लोग हैं जिन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन काले कपड़े पहनकर संसद में विरोध किया था और प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार किया था।” पोस्ट में विपक्षी नेताओं के लिए अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है और लोगों से इसे सच मानने की अपील की जा रही है।
हालांकि, जब इस दावे की तथ्यात्मक जांच की गई तो सामने आया कि वायरल पोस्ट में किए गए सभी दावे सही नहीं हैं। कुछ बातें तथ्यों पर आधारित हैं, जबकि कुछ दावों को भ्रामक तरीके से पेश किया गया है।

क्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर विरोध किया था?
इस दावे की जांच में पता चला कि यह दावा भ्रामक है।
सोशल मीडिया पर जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें कांग्रेस के कई नेता काले कपड़ों में नजर आते हैं। लेकिन यह तस्वीर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की नहीं है। यह अगस्त 2022 की है, जब कांग्रेस नेताओं ने संसद परिसर में महंगाई, बेरोजगारी और जीएसटी समेत अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। उस प्रदर्शन का राम मंदिर या अयोध्या में हुए किसी धार्मिक कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था।
कई स्वतंत्र फैक्ट-चेक संस्थानों और मीडिया रिपोर्टों ने भी इस दावे को भ्रामक बताया है।
क्या विपक्ष ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार किया था?
यह दावा आंशिक रूप से सही है।
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में देश-विदेश की कई प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया गया था।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे अधीर रंजन चौधरी सहित कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं ने समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा था कि वह भगवान राम का सम्मान करती है, लेकिन पार्टी का मानना है कि इस धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक स्वरूप दिया गया है। इसी कारण उसने समारोह में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया।
इसके अलावा कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी व्यक्तिगत या राजनीतिक कारणों से कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया, जबकि कई विपक्षी दलों और उनके नेताओं ने कार्यक्रम में उपस्थिति भी दर्ज कराई। इसलिए यह कहना कि “पूरे विपक्ष ने बहिष्कार किया” तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता।
वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा
पोस्ट में विपक्षी नेताओं के लिए अपमानजनक और अभद्र शब्दों का प्रयोग किया गया है। ऐसे शब्द किसी तथ्य का प्रमाण नहीं होते, बल्कि लेखक की व्यक्तिगत राजनीतिक राय को दर्शाते हैं। तथ्य-जांच का उद्देश्य केवल दावों की सत्यता की जांच करना होता है, न कि किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन या विरोध।
वायरल पोस्ट में किया गया यह दावा कि “राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर संसद में विरोध किया था” गलत और भ्रामक है। जिस तस्वीर को इसके प्रमाण के रूप में साझा किया जाता है, वह वर्ष 2022 में महंगाई और अन्य मुद्दों पर हुए विरोध प्रदर्शन की है।
वहीं, यह तथ्य सही है कि कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी नेताओं ने 22 जनवरी 2024 को आयोजित राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। हालांकि इसे काले कपड़ों वाले विरोध प्रदर्शन से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे राजनीतिक संदेशों को साझा करने से पहले उनके तथ्यों की जांच करना आवश्यक है, ताकि गलत या भ्रामक जानकारी आगे न फैले।
This fact check explains the truth behind the viral claim that opposition leaders wore black clothes to protest the Ram Mandir Pran Pratishtha ceremony in Ayodhya. The report examines verified facts, the origin of the viral images, Congress’ decision to skip the event, and separates political opinions from factual information. Keywords: Ram Mandir Fact Check, Ram Mandir Pran Pratishtha, Opposition Black Clothes, Ayodhya Ram Mandir, Viral Claim, Political Fact Check, Congress, India News.


















