तिहाड़ जेल से चल रहा था हथियारों की तस्करी का नेटवर्क, गाजियाबाद पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
AIN NEWS 1 गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद गैंग के सरगना द्वारा किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान समेत कई राज्यों में 100 से अधिक अवैध हथियारों की सप्लाई कर चुका है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप पर गुप्त कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। 32 बोर की पिस्टल को “भैंस” और उसकी कीमत को “दाना” कहा जाता था। इस तरह सामान्य बातचीत के जरिए हथियारों की खरीद-फरोख्त तय की जाती थी ताकि किसी को शक न हो।

सुबह की कार्रवाई में तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब सात बजे स्वाट टीम और स्थानीय पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर लोनी क्षेत्र में कार्रवाई की। इस दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इंद्रापुरी, राजीव गार्डन निवासी अरुण कुमार, ट्रोनिका सिटी के सुधीर एन्क्लेव निवासी रंजीत राय तथा दिल्ली के सोनिया विहार निवासी अभिषेक शर्मा के रूप में हुई है।
पुलिस ने इनके कब्जे से सात अवैध पिस्टल, 22 जिंदा कारतूस और एक थार एसयूवी भी बरामद की है। बरामद हथियारों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किसी आपराधिक वारदात में हुआ है या नहीं।
प्रॉपर्टी डीलिंग की आड़ में चलता था नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि अभिषेक शर्मा और रंजीत राय प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। अभिषेक दिल्ली के अंकुर विहार स्थित हयात एन्क्लेव में प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ा हुआ था।
इसी दौरान दोनों की मुलाकात अरुण कुमार से हुई और धीरे-धीरे तीनों अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले नेटवर्क का हिस्सा बन गए। पुलिस का कहना है कि प्रॉपर्टी के कारोबार की आड़ में ये लोग अलग-अलग राज्यों में हथियारों की डिलीवरी का काम करते थे, जिससे उन पर आसानी से शक नहीं होता था।
तिहाड़ जेल से गैंग का संचालन
पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि इस गिरोह का मुख्य सरगना उमेश शर्मा उर्फ उमेश पंडित है, जो ट्रोनिका सिटी का रहने वाला है और इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
जांच के अनुसार, जेल में मुलाकात के दौरान गिरोह के सदस्य सरगना से मिलते थे और वहीं से हथियारों की खरीद, बिक्री और सप्लाई की पूरी रणनीति तैयार होती थी। इसके बाद बाहर मौजूद सदस्य निर्देशों के अनुसार पूरे नेटवर्क को संचालित करते थे।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या जेल के भीतर से मोबाइल फोन या किसी अन्य माध्यम से गिरोह का संचालन किया जा रहा था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस और जेल प्रशासन से भी संपर्क किया जा रहा है।
‘भैंस’ और ‘दाना’ के जरिए होती थी बातचीत
गिरोह के सदस्य पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए बेहद चालाकी से कोड भाषा का इस्तेमाल करते थे।
“भैंस” का मतलब होता था 32 बोर की पिस्टल।
“दाना” का मतलब हथियार की कीमत या रकम।
यदि किसी ग्राहक को हथियार बेचना होता तो बातचीत में कहा जाता कि “भैंस महंगी है”, जिसका वास्तविक अर्थ होता था कि पिस्टल की कीमत अधिक रखी गई है। इसी तरह अन्य कोड शब्दों के जरिए पूरी डील तय की जाती थी।
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
मेरठ में तैयार होते थे हथियार
पूछताछ में यह भी सामने आया कि अधिकतर अवैध पिस्टल मेरठ के लिसाड़ी गेट क्षेत्र में बनाई जाती थीं।
आरोपियों ने बताया कि अरुण कुमार का एक परिचित रितिक, जो शामली जिले के थाना भवन क्षेत्र का रहने वाला है, उन्हें 30 से 35 हजार रुपये में अवैध पिस्टल उपलब्ध कराता था।
इसके बाद यही हथियार 50 से 55 हजार रुपये तक में अपराधियों को बेच दिए जाते थे। इस कारोबार में प्रत्येक हथियार पर अच्छा मुनाफा कमाया जाता था।
पुलिस अब रितिक की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
12 से अधिक सदस्य अभी भी फरार
जांच में यह भी सामने आया है कि यह केवल तीन लोगों का गिरोह नहीं था बल्कि इसमें 12 से अधिक सदस्य सक्रिय हैं, जो अभी फरार हैं।
पुलिस की कई टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार गिरोह ने सबसे अधिक अवैध हथियार दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, शामली, हरियाणा और राजस्थान में सप्लाई किए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले दो वर्षों में गिरोह 100 से अधिक अवैध हथियार अपराधियों तक पहुंचा चुका है। पुलिस अब पुराने मामलों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन हथियारों का इस्तेमाल किन-किन अपराधों में किया गया।
गैंगस्टरों तक भी पहुंचते थे हथियार
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह कुख्यात संदीप भाटी गैंग तक भी हथियार पहुंचाता था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि खड़खड़ी निवासी सुनील पहलवान को भी 200 से अधिक कारतूस सप्लाई किए गए थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन तक यह हथियार पहुंचे थे।
ऑपरेशन प्रहार के तहत लगातार कार्रवाई
एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) राज करन नैय्यर ने बताया कि गाजियाबाद पुलिस अवैध हथियारों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन प्रहार के तहत इस वर्ष अब तक 127 अवैध हथियार बरामद किए जा चुके हैं तथा 101 मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मंगलवार को गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं और इनके फरार साथियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस की आगे की जांच
पुलिस अब कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है। इसमें आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल डेटा, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने किन-किन अपराधियों को हथियार उपलब्ध कराए और इन हथियारों का इस्तेमाल किन मामलों में हुआ।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की पुलिस के साथ समन्वय बनाकर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है।
गाजियाबाद पुलिस द्वारा किए गए इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब पुलिस से बचने के लिए तकनीक और कोड भाषा का सहारा ले रहे हैं। हालांकि पुलिस की सतर्कता और लगातार कार्रवाई के चलते इस बड़े हथियार तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया है। फिलहाल तीन आरोपी गिरफ्तार हैं, जबकि फरार सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
Ghaziabad Police have exposed a major illegal arms smuggling network allegedly operated from Tihar Jail, leading to the arrest of three accused involved in supplying illegal firearms across Delhi, Uttar Pradesh, Haryana, and Rajasthan. The gang reportedly used secret code words such as “Buffalo” for pistols and “Grain” for weapon prices to avoid detection. Police recovered seven pistols, 22 live cartridges, and an SUV during the operation. The investigation is ongoing to trace more than a dozen absconding gang members and uncover the full extent of the interstate illegal weapons trafficking network.


















