spot_imgspot_img

जून 2026 में महंगाई ने बढ़ाई आम आदमी की चिंता: 44 महीने के उच्च स्तर पर थोक महंगाई, लगातार छठे महीने बढ़ी रिटेल महंगाई!

spot_img

Date:

जून 2026 में महंगाई ने बढ़ाई आम आदमी की चिंता: 44 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची थोक महंगाई, खाने-पीने की चीजें हुईं और महंगी

AIN NEWS 1: देश में महंगाई एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। जून 2026 के दौरान जारी हुए ताजा आर्थिक आंकड़ों ने संकेत दिया है कि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी थोक महंगाई (Wholesale Price Index-WPI) के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में थोक महंगाई बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 9.68 प्रतिशत थी। यह पिछले 44 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70 प्रतिशत तक पहुंची थी।

दूसरी ओर, खुदरा महंगाई (Consumer Price Index-CPI) भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि महंगाई का असर अब सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई देने लगा है।

44 महीने बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची थोक महंगाई

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जून महीने में थोक महंगाई दर में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमतों में तेजी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता, आने वाले महीनों में ऊर्जा और परिवहन लागत को और बढ़ा सकती है। यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर भारत में महंगाई पर भी पड़ सकता है।

सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई इतनी ऊंचाई पर पहुंची है, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ गई है।

रोजमर्रा की जरूरत का सामान हुआ महंगा

जून के दौरान सबसे अधिक असर उन वस्तुओं पर देखने को मिला जो आम लोगों की दैनिक जरूरत का हिस्सा हैं।

प्राइमरी आर्टिकल्स (Primary Articles) की महंगाई दर मई के 4.99 प्रतिशत से बढ़कर जून में 7.00 प्रतिशत हो गई।

खाद्य वस्तुओं (Food Index) की महंगाई 4.49 प्रतिशत से बढ़कर 6.14 प्रतिशत पर पहुंच गई।

फल, सब्जियां, अनाज और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाला है।

यानी परिवारों के मासिक खर्च में सबसे बड़ा असर खाने-पीने और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण देखने को मिल रहा है।

ईंधन क्षेत्र में थोड़ी राहत

हालांकि एक राहत की बात यह रही कि फ्यूल एंड पावर श्रेणी में महंगाई कुछ कम हुई है।

मई में यह 30.33 प्रतिशत थी।

जून में घटकर 27.41 प्रतिशत रह गई।

इसके बावजूद ऊर्जा लागत अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और इसका असर परिवहन, उत्पादन और अन्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कोई बदलाव नहीं

निर्माण क्षेत्र (Manufacturing Products) की थोक महंगाई दर में जून के दौरान कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

मई की तरह जून में भी यह 7.48 प्रतिशत रही।

हालांकि उद्योगों के लिए कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ सकता है।

राम मंदिर ट्रस्ट की कमान क्या किसी महिला को मिलेगी? जानिए वायरल दावे की पूरी सच्चाई और CEO भर्ती का पूरा मामला!

जनवरी से जून 2026 तक थोक महंगाई का सफर

साल 2026 की शुरुआत में महंगाई अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन हर महीने इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जनवरी – 2.13%

फरवरी – 1.81%

मार्च – 3.88%

अप्रैल – 8.26%

मई – 9.68%

जून – 9.87%

इन आंकड़ों से साफ है कि अप्रैल के बाद महंगाई में तेज उछाल आया और लगातार दो महीनों तक यह 9 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।

थोक महंगाई किन हिस्सों से मिलकर बनती है?

होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) तीन प्रमुख श्रेणियों पर आधारित होता है।

1. प्राइमरी आर्टिकल्स – 22.62%

इसमें शामिल हैं—

खाद्यान्न

फल एवं सब्जियां

दालें

तिलहन

खनिज

कच्चा पेट्रोलियम

2. फ्यूल एंड पावर – 13.15%

इसमें पेट्रोल, डीजल, बिजली, गैस और अन्य ऊर्जा स्रोत शामिल होते हैं।

3. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स – 64.23%

इस श्रेणी में सबसे अधिक हिस्सेदारी होती है, जिसमें शामिल हैं—

स्टील

सीमेंट

प्लास्टिक

केमिकल

रबर

मशीनरी

औद्योगिक उत्पाद

आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

जब थोक महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। कंपनियां इस अतिरिक्त लागत को अंततः ग्राहकों पर डाल देती हैं।

इसका परिणाम यह होता है कि—

खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं।

घरेलू सामान के दाम बढ़ते हैं।

वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं।

निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ने से मकान बनाना महंगा हो जाता है।

परिवहन खर्च बढ़ने से लगभग हर वस्तु प्रभावित होती है।

यानी थोक महंगाई धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगती है।

सरकार महंगाई को कैसे नियंत्रित करती है?

महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार कई कदम उठा सकती है।

आयात शुल्क में बदलाव।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती।

आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाना।

बफर स्टॉक से अनाज जारी करना।

बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई।

पहले भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करके लोगों को राहत देने की कोशिश की थी।

लगातार छठे महीने बढ़ी रिटेल महंगाई

थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई भी लगातार बढ़ रही है।

जून 2026 में रिटेल महंगाई 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई।

इससे पहले—

जनवरी – 2.74%

मई – 3.93%

जून – 4.38%

आलू, अदरक, सब्जियां, फल और अन्य खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें इसके पीछे प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।

लगातार छह महीने से खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि आम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर दबाव बढ़ रहा है।

रिटेल और थोक महंगाई में क्या अंतर है?

भारत में महंगाई को दो प्रमुख तरीकों से मापा जाता है।

रिटेल महंगाई (CPI)

यह उन कीमतों को दर्शाती है जिन पर आम उपभोक्ता बाजार से सामान खरीदता है। इसमें भोजन, कपड़े, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, ईंधन और अन्य घरेलू खर्च शामिल होते हैं।

थोक महंगाई (WPI)

यह उन कीमतों पर आधारित होती है जिन पर एक कारोबारी दूसरे कारोबारी को सामान बेचता है। इसमें उद्योगों और थोक बाजार की कीमतों को आधार बनाया जाता है।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है और अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। वहीं यदि मानसून सामान्य रहता है और कृषि उत्पादन बेहतर होता है तो खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। थोक महंगाई 44 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है, जबकि खुदरा महंगाई भी लगातार छह महीने से बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों के मासिक बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। अब बाजार और उपभोक्ताओं की नजर सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक के अगले कदमों पर रहेगी कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कौन-से प्रभावी उपाय किए जाते हैं।

India’s wholesale inflation (WPI) climbed to 9.87% in June 2026, marking the highest level in 44 months, while retail inflation (CPI) rose to 4.38% for the sixth consecutive month. Rising food prices, essential commodities, and primary articles have significantly impacted household budgets. The latest India inflation report highlights growing concerns over food inflation, wholesale price index, consumer price index, and the overall economic outlook, making this a crucial update for consumers, businesses, and policymakers.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
broken clouds
29.5 ° C
29.5 °
29.5 °
72 %
1.1kmh
82 %
Wed
35 °
Thu
30 °
Fri
32 °
Sat
36 °
Sun
34 °
Video thumbnail
CM की फोटो के साथ विपक्ष ने की 'गुंडागर्दी' भड़के योगी ने जमकर लगा दी लताड़, सब हैरान!
08:55
Video thumbnail
रवि किशन बोले- पंडित जी ने आज मौन व्रत रखने को कहा
00:12
Video thumbnail
खड़गे बोले- राम मंदिर दान चोरी के आरोप गंभीर, पीएम मोदी जवाब दें
01:09
Video thumbnail
राम मंदिर मुद्दे पर राज्यसभा में हंगामा, खड़गे और किरेन रिजिजू आमने-सामने
01:19
Video thumbnail
एयर इंडिया के विमान में हादसा, घायलों को ले जाया गया अस्पताल
00:13
Video thumbnail
AAP का आरोप: ट्रंप के दबाव में देश पर E20 एथेनॉल थोप रही मोदी सरकार
00:19
Video thumbnail
राम मंदिर दान विवाद पर सपा का हंगामा, स्पीकर महाना बोले- चंदा दिया है तो रसीद दिखाइए
00:41
Video thumbnail
यूपी विधानसभा में योगी की फोटो लहराने पर हंगामा,सपा विधायक सचिन यादव को सदस्यता रद्द करने की चेतावनी
02:05
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "बांकीपुर की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी..."
01:09
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "बीजेपी ने बिल्कुल फेयर चुनाव कराया इस बार..."
01:08

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

गाजियाबाद के जयपुरिया मॉल में युवती से मारपीट का वीडियो वायरल, पुलिस जांच में जुटी

गाजियाबाद के जयपुरिया मॉल में युवती से मारपीट का...