गाजियाबाद में 100 करोड़ की बिल्डर ठगी पर बड़ा एक्शन: कोतवाल समेत पूरी पेशी लाइन हाजिर, नई SIT करेगी मामले की जांच
AIN NEWS 1 : गाजियाबाद में करीब 100 करोड़ रुपये की कथित बिल्डर ठगी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे पीड़ितों के लिए राहत की खबर सामने आई है। मामले में पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों और कथित लापरवाही के बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत नंदग्राम थाने के तत्कालीन कोतवाल सहित पूरी पेशी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही पहले गठित विशेष जांच दल (SIT) को भंग कर नई टीम का गठन कर दिया गया है, जो पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच करेगी।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ठगी के शिकार लोगों द्वारा लगातार आरोप लगाए जा रहे थे कि मामले में समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और जांच की गति भी संतोषजनक नहीं रही। पुलिस कमिश्नर की इस पहल को पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, एक बिल्डर पर करीब 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोप है कि बिल्डर ने लोगों को मकान और फ्लैट देने के नाम पर करोड़ों रुपये की रकम वसूली, लेकिन तय समय पर परियोजना पूरी नहीं की। इसके बाद वह फरार हो गया।
बताया जा रहा है कि इस कथित ठगी का शिकार कई परिवार हुए, जिन्होंने वर्षों की मेहनत की कमाई अपने सपनों का घर खरीदने के लिए निवेश की थी। जब उन्हें न तो फ्लैट मिला और न ही उनकी जमा रकम वापस हुई, तब पीड़ितों ने पुलिस और प्रशासन के सामने न्याय की गुहार लगाई।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामले की जांच के दौरान कई ऐसे आरोप सामने आए, जिनमें पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए गए। पीड़ितों का कहना था कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपी के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और जांच में भी तेजी नहीं दिखाई गई।
इसी बीच जब पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची तो पुलिस कमिश्नर ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कराई। समीक्षा के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस कमिश्नर का बड़ा फैसला
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नंदग्राम थाने की पूरी पेशी को लाइन हाजिर करने के आदेश दिए। इसके अलावा तत्कालीन थाना प्रभारी (कोतवाल) को भी लाइन हाजिर कर दिया गया।
पुलिस विभाग में इस कार्रवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रशासनिक कदम कम ही देखने को मिलते हैं। इससे यह संदेश गया है कि यदि किसी मामले में लापरवाही या जिम्मेदारी से काम नहीं करने के आरोप सामने आते हैं तो विभाग सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
पुरानी SIT भंग, नई टीम करेगी जांच
मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस कमिश्नर ने पहले से गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को समाप्त कर नई टीम गठित करने का निर्णय लिया है।
नई SIT को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की शुरुआत से जांच करे। जांच के दौरान सभी दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दोबारा दर्ज किए जा रहे पीड़ितों के बयान
नई जांच टीम ने पीड़ितों के बयान फिर से दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि कई बार प्रारंभिक जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आ पाते, इसलिए प्रत्येक पीड़ित का विस्तृत बयान लिया जाएगा।
पीड़ितों से यह भी जानकारी जुटाई जाएगी कि उन्होंने कब, कितनी राशि जमा की, भुगतान किन माध्यमों से किया गया और बिल्डर की ओर से उन्हें क्या आश्वासन दिए गए थे। इन सभी जानकारियों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य तैयार किए जाएंगे।
फरार बिल्डर की तलाश तेज
पुलिस सूत्रों के अनुसार फरार आरोपी बिल्डर की तलाश भी तेज कर दी गई है। उसके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही उसकी संपत्तियों, बैंक खातों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
यदि जांच में आवश्यक हुआ तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपी की संपत्तियों को जब्त करने अथवा कुर्क करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय जांच के निष्कर्षों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप लिया जाएगा।
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पीड़ित परिवारों को मिली नई उम्मीद
इस कार्रवाई के बाद सबसे अधिक राहत उन लोगों को मिली है जो वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे थे। कई पीड़ितों का कहना है कि उन्हें पहली बार महसूस हो रहा है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
पीड़ितों को उम्मीद है कि नई जांच टीम निष्पक्ष तरीके से काम करेगी और आरोपी को जल्द कानून के दायरे में लाया जाएगा। उनका यह भी मानना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई होती है तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
पुलिस विभाग के लिए भी बड़ा संदेश
पुलिस कमिश्नर की यह कार्रवाई केवल एक बिल्डर ठगी मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही है। इसे पुलिस विभाग के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी मामले में पुलिस की ओर से लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ समय पर कार्रवाई होना आवश्यक है। इससे आम जनता का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है।
आगे क्या होगा?
अब पूरे मामले की निगाहें नई SIT की जांच पर टिकी हैं। जांच टीम यह पता लगाएगी कि कथित ठगी की पूरी योजना कैसे संचालित हुई, कितने लोग प्रभावित हुए, कुल आर्थिक नुकसान कितना है और इस मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो एफआईआर में नई धाराएं जोड़ी जा सकती हैं और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है। वहीं पुलिस फरार बिल्डर की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
गाजियाबाद के बहुचर्चित 100 करोड़ रुपये के कथित बिल्डर ठगी मामले में पुलिस कमिश्नर द्वारा उठाए गए कड़े कदम ने जांच को नई दिशा दी है। नंदग्राम थाने के तत्कालीन कोतवाल सहित पूरी पेशी को लाइन हाजिर करना, पुरानी SIT को भंग कर नई टीम गठित करना और पीड़ितों के दोबारा बयान दर्ज कराने जैसी कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अब मामले की गहराई से जांच होगी।
हालांकि अंतिम सत्य जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल पुलिस की यह कार्रवाई पीड़ितों में न्याय की नई उम्मीद जगाने वाली साबित हुई है। आने वाले दिनों में नई SIT की जांच और फरार आरोपी की गिरफ्तारी इस पूरे मामले के सबसे महत्वपूर्ण पहलू होंगे।
The Ghaziabad Rs 100 Crore Builder Fraud case has taken a significant turn after the Ghaziabad Police Commissioner ordered strict departmental action against the Nandgram Police Station staff, including the SHO, and constituted a new SIT for a fresh investigation. The probe focuses on the alleged real estate fraud, fresh statements of affected home buyers, and the search for the absconding builder. This major development is expected to strengthen the investigation into one of the biggest builder scam cases in Ghaziabad, making it a key Ghaziabad News and UP Police News story with wide public interest.


















