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अभिजीत दीपके के मंच से ‘उत्तराखंड पुलिस कांस्टेबल के इस्तीफे’ का दावा निकला भ्रामक, जांच में सामने आई पूरी सच्चाई

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AIN NEWS 1: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके एक सार्वजनिक मंच से दावा करते दिखाई दे रहे हैं कि उत्तराखंड पुलिस का एक कांस्टेबल उनके आंदोलन के समर्थन में अपनी नौकरी छोड़ रहा है। वीडियो के वायरल होते ही इसे कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जाने लगा। हालांकि, जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई तो सामने आई जानकारी ने मंच से किए गए दावे पर कई सवाल खड़े कर दिए।

वायरल वीडियो में क्या कहा गया?

वायरल वीडियो में अभिजीत दीपके मंच से लोगों को संबोधित करते हुए बताते हैं कि उत्तराखंड पुलिस का एक कांस्टेबल आंदोलन के समर्थन में इस्तीफा देने का फैसला कर चुका है। मंच पर मौजूद पुलिसकर्मी का नाम शेर सिंह बताया जाता है। वीडियो देखने वाले कई लोगों ने इसे एक बड़ी खबर मानते हुए सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू कर दिया।

लेकिन जब इस दावे की आधिकारिक स्तर पर जांच की गई तो तस्वीर कुछ अलग ही सामने आई।

उत्तराखंड पुलिस ने क्या बताया?

उत्तराखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिस कांस्टेबल शेर सिंह को आंदोलन के समर्थन में इस्तीफा देने वाला पुलिसकर्मी बताया जा रहा है, वह उस समय सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था।

पुलिस के अनुसार शेर सिंह पहले से ही विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहा था और उसे 20 जुलाई 2026 को निलंबित किया जा चुका था। अधिकारियों ने बताया कि वह 28 जून 2026 से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित था, जिसके बाद विभाग ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया।

ऐसे में मंच से यह कहना कि वह ड्यूटी पर रहते हुए आंदोलन के समर्थन में नौकरी छोड़ रहा है, वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।

पहले से दर्ज हैं गंभीर आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि शेर सिंह का नाम पहले से एक आपराधिक मामले में सामने आ चुका है। उत्तराखंड पुलिस के अनुसार उस पर जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए थे।

इसी मामले में STF द्वारा उसे गिरफ्तार भी किया गया था और वह कुछ समय तक जेल में भी रहा। बाद में उसे जमानत मिल गई, लेकिन उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी रही।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसके विरुद्ध सेवा संबंधी कार्रवाई पहले से चल रही थी और भविष्य में उसे सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकती है।

सोशल मीडिया पर क्यों फैला भ्रम?

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले अधिकांश वीडियो छोटे-छोटे हिस्सों में साझा किए जाते हैं। ऐसे वीडियो में अक्सर पूरी पृष्ठभूमि नहीं बताई जाती, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन जाती है।

इस मामले में भी मंच से केवल इतना बताया गया कि एक पुलिसकर्मी आंदोलन के समर्थन में इस्तीफा दे रहा है, लेकिन यह जानकारी साझा नहीं की गई कि संबंधित पुलिसकर्मी पहले से निलंबित था और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही थी।

यही कारण है कि वीडियो देखने वाले कई लोगों ने इसे एक सक्रिय पुलिसकर्मी का इस्तीफा मान लिया।

तथ्य जांच में क्या निकला?

आधिकारिक जानकारी और पुलिस अधिकारियों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि वायरल वीडियो में प्रस्तुत दावा अधूरी जानकारी पर आधारित था।

शेर सिंह उत्तराखंड पुलिस का कांस्टेबल जरूर है, लेकिन वह मंच पर आने से पहले ही निलंबित किया जा चुका था। इसलिए यह कहना कि उसने उसी समय आंदोलन के समर्थन में नौकरी छोड़ी, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता।

इसके अलावा उसके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं और विभागीय जांच भी जारी है।

तथ्य और दावा में अंतर समझना जरूरी

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार किसी घटना का केवल एक हिस्सा दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जाता है जिससे लोगों को पूरी सच्चाई पता नहीं चल पाती।

ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान, पुलिस रिकॉर्ड और विश्वसनीय समाचार स्रोतों की जानकारी देखना बेहद आवश्यक होता है।

इस पूरे मामले की जांच से यह स्पष्ट होता है कि अभिजीत दीपके के मंच से किया गया यह दावा कि उत्तराखंड पुलिस का कांस्टेबल आंदोलन के समर्थन में नौकरी छोड़ रहा है, पूरी तरह सही नहीं था।

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वास्तविक स्थिति यह है कि मंच पर मौजूद कांस्टेबल शेर सिंह पहले से ही निलंबित था। उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है, वह पहले जेल भी जा चुका है और विभागीय कार्रवाई पहले से चल रही है।

इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को उसके पूरे संदर्भ के साथ समझना जरूरी है। अधूरी जानकारी के आधार पर किसी भी दावे को सही मान लेना भ्रम पैदा कर सकता है।

Fact Check Verdict

दावा: उत्तराखंड पुलिस का सक्रिय कांस्टेबल आंदोलन के समर्थन में नौकरी छोड़ रहा था।

सच्चाई: संबंधित कांस्टेबल पहले से निलंबित था और उसके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई पहले से चल रही थी।

निष्कर्ष: वायरल दावा भ्रामक (Misleading) है।

The viral Abhijeet Dipke protest video claiming that a Uttarakhand Police constable resigned in support of the movement has been found to be misleading. Official police statements confirmed that Sher Singh, the constable shown on stage, had already been suspended before the event and was facing departmental proceedings and criminal allegations. This detailed fact check explains the complete truth behind the viral claim, the suspension, STF case, and why the resignation narrative spread across social media. This report is essential for readers searching for Abhijeet Dipke Fact Check, Uttarakhand Police News, Sher Singh case, Viral Protest Video, and Constable Resignation Claim.

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