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2027 से पहले आजम खान पर सपा का बड़ा दांव? शिवपाल के ‘गृह मंत्री’ बयान से गरमाई यूपी की सियासत

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने पश्चिमी यूपी पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। इसी बीच रामपुर में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव का आजम खान को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। शिवपाल ने कहा कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो अखिलेश यादव मुख्यमंत्री और आजम खान गृह मंत्री बनाए जाएंगे। इस बयान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा के बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आजम खान को गृह मंत्री बनाने की बात फिलहाल शिवपाल यादव का राजनीतिक बयान है, सपा की आधिकारिक चुनावी घोषणा या लिखित घोषणा-पत्र का हिस्सा नहीं। इसलिए इसे पार्टी का घोषित मास्टरप्लान कहना जल्दबाजी होगी।

रामपुर पहुंचकर शिवपाल ने बढ़ाई सियासी हलचल

12 अगस्त 2026 को शिवपाल सिंह यादव रामपुर पहुंचे। उन्होंने जेल में बंद पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। करीब एक घंटे की इस मुलाकात के बाद शिवपाल ने आजम खान के साथ जेल में कथित व्यवहार और उनके खिलाफ चल रहे मामलों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

शिवपाल ने यह भी कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो आजम खान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी। उनके बयान के बाद यूपी की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई कि सपा 2027 के चुनाव में आजम खान को लेकर अपनी रणनीति को पहले से अधिक स्पष्ट करना चाहती है।

इसके बाद शिवपाल जौहर यूनिवर्सिटी भी पहुंचे और आजम खान के परिवार के लोगों से मुलाकात की। रामपुर में उनके पूरे कार्यक्रम ने यह संकेत जरूर दिया कि आजम खान का मुद्दा सपा की राजनीति में अभी भी महत्वपूर्ण है।

आजम खान की मौजूदा स्थिति क्या है?

आजम खान की राजनीतिक भूमिका को समझने के लिए उनकी मौजूदा कानूनी स्थिति भी जानना जरूरी है। वह लंबे समय से अलग-अलग मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

2025 में करीब 23 महीने जेल में रहने के बाद आजम खान को जमानत पर रिहाई मिली थी। हालांकि इसके बाद दो पैन कार्ड मामले में उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई गई और दोनों को फिर जेल जाना पड़ा।

बाद में आजम खान की सजा को बढ़ाकर 10 साल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इस फैसले को उन्होंने उच्च अदालत में चुनौती दी है। यानी आजम खान के मामले में राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लगातार जारी है।

इसी वजह से सपा जब आजम खान के समर्थन में खुलकर सामने आती है तो इसका राजनीतिक और कानूनी दोनों तरह से असर दिखाई देता है।

अखिलेश यादव भी आजम खान से कर चुके हैं मुलाकात

आजम खान से दूरी को लेकर समाजवादी पार्टी पर अतीत में सवाल उठते रहे हैं। आजम खान के समर्थकों के एक वर्ग ने कई बार यह शिकायत की कि मुश्किल समय में पार्टी नेतृत्व को उनके साथ और मजबूती से खड़ा होना चाहिए था।

लेकिन हाल के घटनाक्रमों में सपा नेतृत्व का रुख ज्यादा स्पष्ट दिखाई दिया है। अक्टूबर 2025 में अखिलेश यादव ने रामपुर पहुंचकर आजम खान से मुलाकात की थी। इसके बाद पार्टी के नेताओं और विधायकों के प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचे।

अब शिवपाल यादव की जेल में मुलाकात और उसके बाद आजम खान को गृह मंत्री बनाने वाला बयान इस पूरी राजनीतिक कवायद को और महत्वपूर्ण बना रहा है।

पश्चिमी यूपी पर क्यों है सपा की नजर?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम और जाट मतदाताओं की भूमिका कई विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण रही है। रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या है।

आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खास तौर पर रामपुर और मुरादाबाद मंडल की राजनीति में लंबे समय से रहा है। ऐसे में 2027 से पहले सपा उनके साथ मजबूती से खड़े होकर अपने पुराने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

लेकिन यह कहना कि पूरा मुस्लिम वोट बैंक केवल आजम खान के कारण सपा के साथ चला जाएगा, राजनीतिक रूप से सही नहीं होगा। चुनाव में बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, महंगाई, स्थानीय उम्मीदवार, जातीय समीकरण और गठबंधन जैसे कई मुद्दे भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

RLD से अलगाव ने बदला पश्चिमी यूपी का समीकरण

2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन अब दोनों दल एक साथ नहीं हैं। जयंत चौधरी की आरएलडी फिलहाल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ है।

ऐसे में 2027 में पश्चिमी यूपी का राजनीतिक मुकाबला पहले की तुलना में अलग दिखाई दे सकता है। सपा के सामने भाजपा के साथ-साथ आरएलडी का भी अपना राजनीतिक प्रभाव है।

यही कारण है कि रामपुर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में सपा अपने संगठन और पुराने राजनीतिक संपर्कों को फिर से सक्रिय करने पर जोर देती दिखाई दे रही है।

संभल और दूसरे मुद्दों पर भी सपा का फोकस

शिवपाल यादव ने अपने रामपुर दौरे के दौरान संभल से जुड़े मामलों और वहां की राजनीतिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान किया।

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हालांकि संभल के मुकदमों को लेकर उनके द्वारा कथित तौर पर मुकदमे वापस लेने की बात कही गई है, लेकिन इस दावे को प्रकाशित करते समय मूल वीडियो या आधिकारिक बयान से पुष्टि करना बेहतर होगा।

सपा के लिए संभल भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। रामपुर और संभल को एक साथ देखें तो मुरादाबाद मंडल में पार्टी का पुराना संगठनात्मक आधार नजर आता है।

क्या यह 2027 का ‘मास्टरप्लान’ है?

राजनीतिक घटनाक्रमों को जोड़कर देखें तो सपा का फोकस साफ तौर पर 2027 की तैयारी पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात, पार्टी नेताओं का रामपुर पहुंचना और अब शिवपाल यादव का जेल जाकर मुलाकात करना—इन सभी घटनाओं ने पार्टी की रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

लेकिन इसे अभी “सपा का आधिकारिक मास्टरप्लान” कहना उचित नहीं होगा। आजम खान को गृह मंत्री बनाने की बात शिवपाल यादव ने कही है, लेकिन पार्टी के आधिकारिक घोषणा-पत्र या औपचारिक चुनावी दस्तावेज में ऐसी घोषणा सामने नहीं आई है।

दरअसल, इसका राजनीतिक संदेश ज्यादा महत्वपूर्ण है। सपा यह बताना चाहती है कि वह आजम खान के साथ खड़ी है और उनके मुद्दे को 2027 की राजनीति में नजरअंदाज नहीं करेगी।

2027 की लड़ाई में आजम खान कितने महत्वपूर्ण होंगे?

2027 का चुनाव अभी दूर है और राजनीतिक समीकरण आने वाले महीनों में कई बार बदल सकते हैं। गठबंधन, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे और अलग-अलग समुदायों का रुख चुनावी तस्वीर को प्रभावित करेगा।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि आजम खान एक बार फिर उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के केंद्र में लौटते दिखाई दे रहे हैं। शिवपाल यादव का गृह मंत्री वाला बयान इसी दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

सपा के लिए चुनौती यह होगी कि वह आजम खान के समर्थन को व्यापक चुनावी रणनीति में कैसे बदलती है। वहीं भाजपा और अन्य दल भी पश्चिमी यूपी में अपने समीकरण मजबूत करने की कोशिश करेंगे।

2027 की असली तस्वीर चुनाव की घोषणा और उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के बाद ही साफ होगी। लेकिन रामपुर से निकला शिवपाल यादव का यह बयान बता रहा है कि उत्तर प्रदेश की अगली विधानसभा चुनावी लड़ाई में आजम खान का नाम एक बार फिर बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने आ सकता है।

UP Politics 2027 is already gaining momentum as the Samajwadi Party focuses on strengthening its position in Western Uttar Pradesh. Shivpal Yadav’s recent statement that Azam Khan could become Home Minister if the SP forms the government under Akhilesh Yadav has sparked a fresh political debate. The development is significant for Rampur Politics, Western UP Politics and the Samajwadi Party’s 2027 election strategy. Azam Khan remains an influential SP leader in the region, while his ongoing legal battles continue alongside the political developments.

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