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Airtel-Starlink की नई Satellite-to-Mobile सेवा से बिना टावर भी चलेगा मोबाइल, भारत में कब मिलेगी सुविधा?

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AIN NEWS 1: मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से बाहर रहने वाले इलाकों के लिए Airtel और SpaceX की Starlink साझेदारी एक बड़ी तकनीकी पहल बनकर सामने आई है। अब ऐसे क्षेत्रों में भी सामान्य 4G स्मार्टफोन को सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ चुका है, जहां मोबाइल टावर का सिग्नल नहीं पहुंचता। Airtel Africa और SpaceX ने Kenya में Starlink Mobile की सफल टेस्टिंग की है और इसके बाद अफ्रीका के 14 बाजारों में सेवा का विस्तार करने की योजना बनाई गई है।

इस तकनीक को आम तौर पर Direct-to-Cell या Direct-to-Device satellite connectivity कहा जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यूजर को सामान्य परिस्थितियों में अलग से Starlink डिश या पारंपरिक सैटेलाइट फोन की जरूरत नहीं पड़ती। Compatible 4G स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकता है। हालांकि सेवा की उपलब्धता फोन, सैटेलाइट कवरेज, नेटवर्क पार्टनर और स्थानीय नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगी।

Kenya में हुआ सफल परीक्षण

Airtel Africa ने मार्च 2026 में Kenya के ऐसे इलाकों में Starlink Mobile का परीक्षण किया, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क का सिग्नल उपलब्ध नहीं था। कंपनी के मुताबिक इस परीक्षण में 4G-compatible smartphones ने Starlink के सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए कनेक्टिविटी हासिल की। परीक्षण के दौरान हल्के डेटा वाले कई एप्लिकेशन काम करते पाए गए।

इस दौरान यूजर्स WhatsApp पर मैसेज भेजने के साथ WhatsApp calling, Facebook Messenger, Maps और Airtel ऐप के जरिए कुछ वित्तीय लेन-देन जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर सके। यानी यह केवल SMS भेजने तक सीमित तकनीक नहीं रही, बल्कि सीमित डेटा वाली कई वास्तविक सेवाओं को भी सपोर्ट करने में सक्षम दिखाई दी।

Airtel Africa और SpaceX का कहना है कि Kenya के परीक्षण से मिले अनुभव के आधार पर इस तकनीक को Airtel Africa के 14 बाजारों में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि प्रत्येक देश में सेवा शुरू करने के लिए वहां के नियामकीय नियमों और मंजूरियों का पालन करना होगा।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

अभी तक मोबाइल नेटवर्क का सामान्य ढांचा जमीन पर मौजूद टावरों पर निर्भर रहा है। फोन पहले नजदीकी मोबाइल टावर से जुड़ता है और फिर नेटवर्क के जरिए इंटरनेट या कॉलिंग की सुविधा मिलती है। लेकिन पहाड़ी इलाकों, घने जंगलों, समुद्र के आसपास के क्षेत्रों या बेहद दूरदराज गांवों में टावर लगाना मुश्किल और महंगा हो सकता है।

Direct-to-Cell तकनीक इस समस्या का अलग समाधान देती है। इसमें जमीन पर मौजूद मोबाइल नेटवर्क की पहुंच खत्म होने के बाद compatible फोन ऊपर मौजूद Low Earth Orbit यानी LEO satellites से संपर्क कर सकता है।

Airtel के Kenya परीक्षण में इसी तरह 4G-compatible smartphones को Starlink constellation के जरिए कनेक्ट किया गया। इससे यह संकेत मिला है कि भविष्य में मोबाइल नेटवर्क की “आखिरी सीमा” को सैटेलाइट नेटवर्क आगे बढ़ा सकता है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में फोन सैटेलाइट से जुड़ जाएगा। खुले आसमान का साफ दृश्य, compatible device और संबंधित क्षेत्र में सेवा की उपलब्धता जैसे कारक महत्वपूर्ण रहेंगे। इमारतों के अंदर या ऐसी जगहों पर जहां आसमान का बड़ा हिस्सा बाधित हो, कनेक्शन प्रभावित हो सकता है।

अभी हाई-स्पीड इंटरनेट का विकल्प नहीं

Satellite-to-Mobile तकनीक को फिलहाल सामान्य 4G या 5G नेटवर्क का पूरी तरह विकल्प समझना सही नहीं होगा। मौजूदा परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों में बेसिक या हल्की डेटा कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है जहां मोबाइल टावर का नेटवर्क नहीं है।

Airtel Africa ने भविष्य में Starlink Mobile V2 तकनीक के जरिए voice calling और ज्यादा व्यापक डेटा/ब्रॉडबैंड क्षमताएं उपलब्ध कराने की योजना का भी उल्लेख किया है। यानी अभी यह तकनीक शुरुआत के चरण में है और आगे इसकी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

DRC में 30 दिन के फ्री ट्रायल की खबर

हालिया रिपोर्टों में Democratic Republic of Congo यानी DRC में Airtel Africa के ग्राहकों के लिए Starlink Direct-to-Mobile सेवा के 30 दिन के मुफ्त ट्रायल की जानकारी सामने आई है। इस शुरुआती सेवा को सीमित उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिसमें SMS और WhatsApp जैसी सेवाओं पर जोर है।

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हालांकि यहां एक जरूरी सावधानी है। Airtel Africa की सार्वजनिक आधिकारिक सामग्री में अभी तक DRC के 30-दिन के मुफ्त ट्रायल की विस्तृत शर्तें स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। कंपनी की आधिकारिक रिपोर्ट यह जरूर पुष्टि करती है कि SpaceX के साथ Direct-to-Cell साझेदारी 14 अफ्रीकी बाजारों के लिए है और DRC Airtel Africa का प्रमुख बाजार है।

इसलिए DRC के मुफ्त ट्रायल को लेकर सामने आई जानकारी को प्रकाशित करते समय इसे रिपोर्टेड ऑफर के रूप में लिखना अधिक सुरक्षित होगा, जब तक Airtel DRC की ओर से स्थानीय स्तर पर इसकी पूरी आधिकारिक घोषणा उपलब्ध न हो।

अब भारत में कब आएगी यह सुविधा?

भारत के लिए इस तकनीक को लेकर तस्वीर पहले की तुलना में काफी आगे बढ़ चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि Starlink को भारत में GMPCS सेवा के लिए Unified Licence authorization मिल चुका है।

भारत सरकार ने 29 जनवरी 2026 को राज्यसभा में बताया था कि Department of Telecommunications ने OneWeb India Communications, Jio Satellite Communications और Starlink Satellite Communications को GMPCS सेवा के लिए अधिकृत Unified Licence जारी किया है।

इसलिए यह कहना अब सही नहीं होगा कि Starlink भारत में लाइसेंस मिलने का इंतजार कर रहा है।

लेकिन यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। GMPCS authorization मिलने का अर्थ यह नहीं है कि Starlink की Direct-to-Cell मोबाइल सेवा भारत में तुरंत शुरू हो गई है। Direct-to-Device सेवा के लिए spectrum, authorization और तकनीकी नियमों से जुड़े अलग पहलुओं पर काम जरूरी है।

इसी दिशा में Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI ने अप्रैल 2026 में Satellite Communication Network Authorisation और spectrum assignment से जुड़ा consultation paper जारी किया था। इस consultation में satellite communication network और spectrum से संबंधित नियामकीय ढांचे पर विचार किया गया।

Starlink ने भी TRAI के consultation process में Direct-to-Device services को लेकर अपनी राय दी है। कंपनी ने अलग-अलग देशों में अपनाए गए regulatory models का उदाहरण देते हुए satellite-based D2D services के लिए मौजूदा mobile spectrum के इस्तेमाल से जुड़े विकल्पों पर अपना पक्ष रखा है।

भारत में Airtel और Starlink की साझेदारी

भारत में Airtel और SpaceX के बीच साझेदारी पहले से मौजूद है। दोनों कंपनियों ने भारत में Starlink की हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए समझौता किया था। हालांकि यह समझौता और Direct-to-Cell सेवा दो अलग-अलग बातें हैं।

भारत में भविष्य में अगर Direct-to-Mobile सेवा को नियामकीय मंजूरी और व्यावसायिक लॉन्च का रास्ता मिलता है, तो इसका फायदा उन क्षेत्रों को मिल सकता है जहां मोबाइल टावर लगाना मुश्किल है। पहाड़ी गांव, जंगल, सीमावर्ती क्षेत्र, समुद्री इलाके और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ऐसी तकनीक एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी बैकअप बन सकती है।

भारत में अभी कितने समय का इंतजार?

फिलहाल भारत में Airtel-Starlink Direct-to-Cell सेवा की कोई आधिकारिक commercial launch date घोषित नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सेवा किसी निश्चित महीने या तारीख से शुरू हो जाएगी।

हालांकि भारत में Starlink को GMPCS authorization मिलना, Airtel-Jio-OneWeb जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी और TRAI का satellite spectrum framework पर काम करना यह संकेत देता है कि देश में satellite connectivity का ecosystem तेजी से विकसित हो रहा है।

आने वाले समय में अगर Direct-to-Device के लिए आवश्यक regulatory framework और spectrum व्यवस्था स्पष्ट होती है और कंपनियां अपनी commercial rollout plans घोषित करती हैं, तो बिना मोबाइल टावर वाले क्षेत्रों में सीधे स्मार्टफोन तक satellite connectivity पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल सबसे सही निष्कर्ष यही है कि Airtel और Starlink ने अफ्रीका में satellite-to-mobile तकनीक का सफल परीक्षण कर लिया है, भारत में Starlink को GMPCS authorization मिल चुका है, लेकिन भारत में Direct-to-Cell सेवा की लॉन्च तारीख अभी तय नहीं हुई है।

Airtel and Starlink are taking satellite-to-mobile connectivity a step closer to mainstream use with successful Starlink Mobile testing in Kenya. The Airtel Africa and SpaceX partnership aims to provide Direct-to-Cell connectivity to compatible 4G smartphones in areas without traditional mobile network coverage. The technology can support light-data services such as WhatsApp messaging and calling, maps, Facebook Messenger and selected mobile services. In India, Starlink has received GMPCS authorization, while the regulatory framework for satellite communication and Direct-to-Device services continues to evolve. The future rollout of Airtel Starlink satellite connectivity in India will depend on regulatory requirements, spectrum arrangements, compatible devices and the companies’ commercial launch plans.

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