AIN NEWS 1: क्रेडिट कार्ड आज के समय में भुगतान का आसान और सुविधाजनक माध्यम है। खरीदारी के समय जेब से तुरंत पैसा नहीं देना पड़ता और बिल चुकाने के लिए कुछ दिनों का समय भी मिलता है। लेकिन यही सुविधा तब भारी पड़ सकती है, जब हर महीने पूरा बिल चुकाने के बजाय सिर्फ Minimum Amount Due (MAD) का भुगतान किया जाए।
RBI के मौजूदा नियमों और प्रमुख बैंकों की 2026 में उपलब्ध शर्तों की जांच से सामने आता है कि केवल न्यूनतम राशि जमा करने पर बाकी रकम अगले बिलिंग चक्र में चली जाती है और उस पर वित्तीय शुल्क यानी finance charges लग सकते हैं। RBI भी ग्राहकों को आगाह करता है कि न्यूनतम राशि भरते रहने से भुगतान लंबे समय तक चलता रह सकता है।
Minimum Amount Due क्या होता है?
क्रेडिट कार्ड का बिल आने पर आमतौर पर दो महत्वपूर्ण रकम दिखाई देती हैं—Total Amount Due और Minimum Amount Due।
Total Amount Due वह पूरी रकम होती है, जिसे बिल की तय तारीख तक चुका देने पर सामान्य परिस्थितियों में खरीदारी पर ब्याज से बचा जा सकता है। वहीं Minimum Amount Due वह न्यूनतम राशि होती है, जिसे निर्धारित समय पर जमा करना जरूरी होता है ताकि कार्ड खाते में न्यूनतम भुगतान की शर्त पूरी हो सके।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि Minimum Amount Due भरने का मतलब यह नहीं है कि आपका पूरा क्रेडिट कार्ड बिल चुक गया।
बाकी रकम अगले महीने के लिए carry forward हो सकती है और उस पर बैंक के नियमों के मुताबिक finance charges लग सकते हैं। SBI Card भी अपनी जानकारी में स्पष्ट करता है कि केवल Minimum Amount Due का भुगतान करते रहने पर repayment कई साल तक खिंच सकता है और outstanding balance पर interest देना पड़ सकता है।

36 से 48 फीसदी ब्याज की बात कितनी सही?
क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला finance charge हर बैंक और कार्ड के हिसाब से अलग होता है। इसलिए 36% से 48% को सभी कार्डों की ब्याज दर कहना सही नहीं होगा।
हालांकि कुछ कार्डों में सालाना दर काफी ज्यादा होती है। उदाहरण के तौर पर HDFC Bank की अप्रैल 2026 की MITC में एक उदाहरण 3.75% प्रति माह यानी 45% सालाना finance charge दिखाता है। इसी दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि outstanding balance रहने पर नए खर्चों पर भी finance charges लग सकते हैं।
SBI Card की उपलब्ध MITC में भी कुछ unsecured cards के लिए 3.75% प्रति माह यानी 45% सालाना finance charge दिया गया है। इसलिए क्रेडिट कार्ड के मामले में केवल मासिक ब्याज देखकर भ्रमित नहीं होना चाहिए; सालाना लागत को भी समझना जरूरी है।
₹50,000 के बिल का उदाहरण समझिए
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने क्रेडिट कार्ड से ₹50,000 की खरीदारी की और बिल की पूरी रकम due date पर चुकाने के बजाय केवल Minimum Amount Due जमा किया।
अब बाकी ₹50,000 या उसका बड़ा हिस्सा अगले चक्र में जा सकता है। इसके बाद बैंक की निर्धारित ब्याज दर और calculation methodology के अनुसार finance charge जुड़ सकता है। अगले महीने भी अगर ग्राहक सिर्फ न्यूनतम राशि जमा करता है, तो outstanding balance पूरी तरह खत्म होने में काफी समय लग सकता है।
SBI Card के एक उदाहरण में ₹50,000 के outstanding balance पर ₹2,267.26 का finance charge और ₹408.11 GST दिखाया गया है। यानी भुगतान का एक हिस्सा ब्याज और टैक्स में चला जाता है, जबकि मूल रकम अपेक्षाकृत धीमी गति से कम होती है।
इसी वजह से सिर्फ Minimum Amount Due देखकर यह मान लेना कि “अभी तो कम पैसे देने हैं” आगे चलकर महंगा साबित हो सकता है।
ब्याज की गणना कैसे होती है?
क्रेडिट कार्ड पर finance charge की गणना सभी बैंकों में बिल्कुल एक जैसी नहीं होती। कार्ड की MITC यानी Most Important Terms and Conditions में इसकी methodology और दर बताई जाती है।
उदाहरण के लिए HDFC Bank की अप्रैल 2026 की MITC में outstanding amount, 3.75% मासिक यानी 45% वार्षिक दर और दिनों की संख्या के आधार पर interest calculation का उदाहरण दिया गया है। उसी उदाहरण में पुराने outstanding के साथ नए खर्च पर भी finance charge दिखाया गया है।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि क्रेडिट कार्ड का ब्याज बैंक की निर्धारित methodology के अनुसार outstanding balance और संबंधित अवधि के आधार पर calculate किया जाता है।
पूरा बिल भरने का क्या फायदा?
अगर आपने पिछले बिल की पूरी outstanding राशि तय due date तक चुका दी है, तो सामान्य retail purchases पर interest-free credit period का लाभ मिल सकता है।
SBI Card की शर्तों में भी बताया गया है कि interest-free period retail purchases पर तभी लागू होता है जब पिछले statement period का outstanding balance due date तक पूरी तरह चुका दिया गया हो।
यानी क्रेडिट कार्ड का सबसे सुरक्षित इस्तेमाल यही है कि हर महीने Total Amount Due को due date से पहले या तय तारीख तक पूरा चुका दिया जाए।
Minimum Amount भी नहीं भरा तो क्या होगा?
Minimum Amount Due भी due date तक नहीं चुकाना अलग स्थिति है। इससे late payment charges और दूसरे शुल्क लग सकते हैं तथा खाते पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
RBI के नियमों के मुताबिक credit-card account को credit information companies के सामने “past due” रिपोर्ट करने या penal charges लगाने की स्थिति तब आती है, जब account due date के बाद तीन दिनों से ज्यादा past due रहता है। वहीं यदि statement में दर्ज Minimum Amount Due का पूरा भुगतान due date से 90 दिनों के भीतर नहीं किया जाता, तो credit-card account को NPA के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
इसलिए Minimum Amount Due और Total Amount Due के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है।
अगर बड़ा बकाया हो गया है तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति पर पहले से बड़ा credit-card outstanding जमा हो चुका है, तो घबराने के बजाय बैंक से उपलब्ध विकल्पों की जानकारी लेनी चाहिए। कुछ मामलों में balance transfer, EMI conversion या दूसरे repayment options उपलब्ध हो सकते हैं।
लेकिन किसी नए loan से पुराना credit-card debt चुकाने से पहले उसकी ब्याज दर, processing fee, GST, repayment period और कुल भुगतान की रकम की तुलना जरूर करनी चाहिए। केवल कम EMI देखकर फैसला करना सही नहीं है।
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए जरूरी सावधानियां
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सबसे पहली बात, credit limit को अपनी अतिरिक्त आय न समझें। कार्ड पर खर्च करने से पहले यह देखें कि due date तक पूरा भुगतान करने की क्षमता है या नहीं।
दूसरी बात, हर महीने statement को ध्यान से पढ़ें। Total Amount Due, Minimum Amount Due, finance charges, late fee, GST और दूसरे शुल्कों की जानकारी जरूर देखें।
तीसरी बात, अगर किसी महीने पूरा भुगतान संभव नहीं है तो नए खर्चों को कम करना बेहतर है। लगातार Minimum Amount Due भरते रहने से outstanding लंबे समय तक चलता रह सकता है।
क्रेडिट कार्ड अपने आप में खराब वित्तीय साधन नहीं है। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह सुविधाजनक भुगतान माध्यम है और कई कार्डों में समय पर पूरा भुगतान करने पर interest-free credit period का फायदा भी मिलता है। परेशानी तब शुरू होती है जब ग्राहक लगातार सिर्फ Minimum Amount Due भरकर बाकी रकम को आगे बढ़ाता रहता है।
इसलिए सबसे बेहतर तरीका यही है कि हर महीने Total Amount Due को समय पर चुकाएं, अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च न करें और किसी भी बकाया को लंबे समय तक carry forward करने से बचें।
Credit card users should understand the difference between Minimum Amount Due and Total Amount Due. Paying only the minimum payment can extend repayment for a long period and may lead to substantial credit card interest and finance charges. Under RBI credit card rules, customers should carefully check their billing statement, interest-free credit period, late payment charges and outstanding balance. Paying the full credit card bill on time is generally the safest way to avoid unnecessary interest and stay away from a credit card debt trap.



















