गंगा एक्सप्रेसवे पर धंसाव के दावे से क्यों मचा हड़कंप?
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि अमरोहा जिले की हसनपुर तहसील में फैयाजनगर और सहदरा मिलक के बीच बारिश के बाद एक्सप्रेसवे की सड़क धंस गई और मरम्मत के लिए एक लेन बंद करनी पड़ी।
हालांकि, इस वायरल दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। वहीं, यह भी सच है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर इससे पहले भी बारिश के दौरान सड़क धंसने और निर्माण संबंधी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
594 किलोमीटर लंबा है गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी आधारभूत परियोजनाओं में से एक है। इसकी लंबाई 594 किलोमीटर है और यह मेरठ से प्रयागराज तक जाता है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 36,230 करोड़ रुपये है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को हरदोई में इसका लोकार्पण किया था। यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत कई जिलों को जोड़ता है।
वायरल वीडियो में क्या किया जा रहा है दावा?
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में दावा किया गया है कि हसनपुर तहसील के फैयाजनगर और सहदरा मिलक के बीच सड़क का एक हिस्सा बारिश के बाद धंस गया।
दावे के अनुसार—
सड़क में गड्ढा बनने के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
एक्सप्रेसवे कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बैरियर लगाए।
एक लेन पर यातायात नियंत्रित किया गया।
जेसीबी मशीन से करीब तीन घंटे तक मरम्मत का काम चला।
घटना में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
क्या इस घटना की आधिकारिक पुष्टि हुई?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि फैयाजनगर-सहदरा मिलक वाली घटना की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या प्रमुख राष्ट्रीय समाचार संस्थान द्वारा स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) की ओर से भी इस विशेष वायरल वीडियो पर कोई सार्वजनिक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इसलिए इस दावे को फिलहाल “वायरल वीडियो और स्थानीय दावे” के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि पूरी तरह प्रमाणित घटना के रूप में।
लेकिन पहले भी गंगा एक्सप्रेसवे पर धंसाव की घटनाएं हुई हैं
हालांकि हसनपुर वाले दावे की पुष्टि बाकी है, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे पर इससे पहले कई जगह सड़क धंसने और निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आ चुकी हैं।
उन्नाव में फरवरी 2026 की घटना
फरवरी 2026 में उन्नाव के पास एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में सड़क और सस्पेंशन ज्वाइंट के आसपास धंसाव देखने को मिला था। इसके बाद निर्माण एजेंसी ने वहां सरिया और आरसीसी के माध्यम से मरम्मत कराई थी।
जुलाई 2026 में लिंक रोड धंस गई
5 जुलाई 2026 को उन्नाव के सोनिक क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे को कानपुर-लखनऊ हाईवे से जोड़ने वाली लिंक रोड का लगभग सात मीटर हिस्सा बारिश के बाद धंस गया था। प्रारंभिक रिपोर्टों में नीचे की मिट्टी बह जाने की बात सामने आई थी।
सर्विस लेन में कई जगह धंसाव
उन्नाव जिले में ही सर्विस लेन के कई स्थानों पर धंसाव की शिकायतें मिली थीं। स्थानीय लोगों ने मिट्टी भराव और रोलिंग की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे, जबकि निर्माण एजेंसी ने भारी वाहनों को इसकी वजह बताया था।
हरदोई में भी सामने आया मामला
जुलाई 2026 में हरदोई जिले में करीब दस मीटर सड़क धंसने की खबर सामने आई थी। इसके बाद UPEIDA ने तकनीकी जांच के आदेश दिए थे और प्रारंभिक तौर पर भारी बारिश के कारण नीचे की मिट्टी कमजोर होने की संभावना जताई गई थी।
प्रतापगढ़ में भी टूटी थी सुरक्षा दीवार
गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ी एक अन्य घटना प्रतापगढ़ में सामने आई थी, जहां बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे की सुरक्षा चारदीवारी का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना के बाद भी निर्माण गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई थी।
अडानी का कितना हिस्सा है?
सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेसवे की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी अडानी की है।
यह दावा तकनीकी रूप से पूरी तरह सही नहीं है।
सही तथ्य यह है कि गंगा एक्सप्रेसवे के 594 किलोमीटर में से लगभग 464 किलोमीटर हिस्से के निर्माण का ठेका अडानी एंटरप्राइजेज को मिला था, जो कुल लंबाई का करीब 80 प्रतिशत है। जबकि बाकी हिस्से का निर्माण IRB Infrastructure द्वारा किया गया।
इसलिए “80 प्रतिशत हिस्सेदारी” की जगह “80 प्रतिशत निर्माण कार्य” कहना अधिक सटीक होगा।
स्थानीय लोगों में क्यों बढ़ी चिंता?
वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि बारिश के कुछ महीनों के भीतर सड़क में धंसाव जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए।
हालांकि प्रशासन की ओर से हसनपुर वाली वायरल घटना पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्थिति को इस प्रकार समझा जा सकता है—
गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 29 अप्रैल 2026 को हुआ था।
परियोजना की लागत करीब 36,230 करोड़ रुपये है।
अडानी ने लगभग 464 किलोमीटर हिस्से का निर्माण किया है।
उन्नाव, हरदोई और अन्य स्थानों पर पहले धंसाव की पुष्टि हो चुकी है।
हसनपुर के फैयाजनगर-सहदरा मिलक वाले वायरल वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
ऐसे में इस मामले पर UPEIDA या जिला प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
The Ganga Expressway in Uttar Pradesh has become a major topic after a viral road sinking video from Hasanpur sparked concerns about construction quality. While the 594-km Ganga Expressway, inaugurated by Prime Minister Narendra Modi on 29 April 2026, has witnessed confirmed road sinking incidents in Unnao and Hardoi during heavy rains, the Hasanpur claim is still awaiting official confirmation. The project, worth ₹36,230 crore, includes a 464-km construction package executed by Adani Enterprises, making this fact-check essential for understanding the latest Ganga Expressway road collapse, UPEIDA update, and infrastructure developments in Uttar Pradesh.



















