spot_imgspot_img

अडानी पर अमेरिकी केस खत्म होने तक का सफर: कैसे शेयरों और मार्केट कैप ने की जोरदार वापसी?

spot_img

Date:

AIN NEWS 1 | गौतम अडानी और अडानी ग्रुप को अमेरिकी कोर्ट के हालिया फैसले से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिका की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की अदालत ने अमेरिकी न्याय विभाग की मांग पर गौतम अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला with prejudice खारिज हुआ है, यानी इन्हीं आरोपों के आधार पर इसे दोबारा दाखिल नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इसे अदालत की ओर से आरोपों पर मेरिट के आधार पर “बरी” किया जाना नहीं कहा जा सकता। केस का खारिज होना अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से मामले को आगे नहीं बढ़ाने के फैसले के बाद हुआ है। जज निकोलस गारौफिस ने इस प्रक्रिया और DOJ के फैसले पर सवाल भी उठाए थे।

कानूनी राहत के साथ अडानी ग्रुप के लिए शेयर बाजार का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण है। नवंबर 2024 में अमेरिकी आरोपों के बाद ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई थी, लेकिन इसके बाद बिजनेस प्रदर्शन, नए प्रोजेक्ट्स और लगातार निवेश ने तस्वीर को धीरे-धीरे बदला।

नवंबर 2024 में क्या हुआ था?

नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों की ओर से गौतम अडानी और अन्य लोगों पर कथित रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लगाए जाने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में तेज गिरावट आई थी। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को खारिज किया था।

21 नवंबर 2024 को अडानी ग्रुप की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। कुछ शेयरों में गिरावट 20 फीसदी से ज्यादा तक पहुंच गई थी।

उस समय अडानी ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप में एक ही दिन में करीब ₹2.2 लाख करोड़ की कमी आई थी। अगले कुछ कारोबारी सत्रों में भी गिरावट जारी रही और 25 नवंबर तक समूह का संयुक्त मार्केट कैप करीब ₹11.85 लाख करोड़ तक आ गया था।

यानी निवेशकों के सामने सवाल केवल कानूनी आरोपों का नहीं था। चिंता यह भी थी कि इस विवाद का असर ग्रुप की फंडिंग, विदेशी निवेशकों के भरोसे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है।

फिर कैसे बदली तस्वीर?

कानूनी विवाद के बीच अडानी ग्रुप ने अपने कारोबारी विस्तार को रोकने के बजाय निवेश और प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रखा।

ग्रुप के FY26 आंकड़ों के मुताबिक, साल के दौरान कुल कैपेक्स ₹1,52,967 करोड़ रहा। अडानी ग्रुप ने इसे किसी भारतीय कॉरपोरेट द्वारा एक वित्त वर्ष में किया गया सबसे बड़ा कैपेक्स बताया है।

इसी दौरान ग्रुप का एसेट बेस बढ़कर ₹7,85,098 करोड़ हो गया और FY26 में EBITDA ₹94,834 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। ग्रुप के मुताबिक करीब 80 फीसदी निवेश ऊर्जा, यूटिलिटी, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में किया गया।

इससे बाजार को यह संकेत मिला कि कानूनी विवाद के बावजूद ग्रुप के प्रमुख कारोबारी प्रोजेक्ट्स और ऑपरेशनल गतिविधियां जारी रहीं।

शेयरों की रिकवरी के पीछे सिर्फ अमेरिकी कोर्ट का फैसला नहीं

अडानी शेयरों की रिकवरी को केवल अमेरिकी केस के खारिज होने से जोड़ना सही नहीं होगा।

किसी कंपनी के शेयर की कीमत पर कई चीजों का असर पड़ता है। अडानी ग्रुप के मामले में कारोबार का प्रदर्शन, नए प्रोजेक्ट्स, कैपिटल एक्सपेंडिचर, कर्ज की स्थिति, कमाई और निवेशकों का भरोसा महत्वपूर्ण कारक रहे हैं।

अमेरिकी कोर्ट के फैसले ने जरूर एक बड़े कानूनी जोखिम को कम किया है। फैसले के बाद 11 अगस्त 2026 को अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखी गई और कुछ शेयरों में बढ़त करीब 3 फीसदी तक रही।

इसलिए मौजूदा रिकवरी को दो हिस्सों में समझा जा सकता है। एक तरफ ग्रुप के ऑपरेशनल और वित्तीय प्रदर्शन में सुधार रहा, वहीं दूसरी तरफ कानूनी अनिश्चितता कम होने से निवेशकों की धारणा को सहारा मिला।

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर लगातार काम

अडानी ग्रुप ने पिछले कुछ वर्षों में पोर्ट, एयरपोर्ट, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बड़े निवेश जारी रखे।

FY26 में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू हुआ। इसके अलावा गुवाहाटी टर्मिनल और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट भी ग्रुप के पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण उपलब्धियों के तौर पर सामने आए। ग्रुप के मुताबिक FY26 में 5.1 GW की नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता भी जोड़ी गई।

इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल भविष्य की संभावनाओं तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे नई परिसंपत्तियां ऑपरेशनल होती हैं, उनसे आने वाले वर्षों में राजस्व और कैश फ्लो बढ़ने की उम्मीद होती है।

APSEZ ने बनाया नया रिकॉर्ड

अडानी ग्रुप की पोर्ट कंपनी अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड यानी APSEZ ने FY26 में 500.8 मिलियन मीट्रिक टन यानी 500 MMT से ज्यादा पोर्ट कार्गो संभाला।

कंपनी के मुताबिक वह एक वित्त वर्ष में 500 MMT से ज्यादा कार्गो संभालने वाली भारत की पहली इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर बनी। FY26 में APSEZ का राजस्व ₹38,736 करोड़ और EBITDA ₹22,851 करोड़ रहा।

यह प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार केवल कंपनी की भविष्य की योजनाओं को नहीं, बल्कि उसके वास्तविक ऑपरेशनल प्रदर्शन को भी महत्व देता है।

कर्ज और फंडिंग की स्थिति भी बनी अहम

अडानी ग्रुप की रिकवरी के दौरान कर्ज और फंडिंग को लेकर भी बाजार की नजर रही है।

ग्रुप के FY26 आंकड़ों के मुताबिक उसका नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 3.3 गुना रहा, जबकि ग्रुप ने बताया कि FY26 में उसकी औसत उधारी लागत घटकर 7.8 फीसदी हो गई, जो FY24 में 9 फीसदी थी।

ग्रुप के मुताबिक सभी अडानी एसेट्स को घरेलू स्तर पर A- या उससे ऊपर की रेटिंग हासिल है।

अमेरिकी केस के खारिज होने से अब क्या बदलेगा?

अमेरिकी आपराधिक मामले का with prejudice खारिज होना अडानी ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसी आपराधिक मामले को उन्हीं आरोपों के आधार पर दोबारा दाखिल नहीं किया जा सकता।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अडानी से जुड़े हर कानूनी मामले का अंत हो गया है। अमेरिकी प्रक्रिया में इससे जुड़े अलग-अलग सिविल और अन्य मामलों पर अलग समझौते और कार्रवाई हुई है। Reuters के मुताबिक गौतम अडानी ने संबंधित SEC सिविल मामले को खत्म करने के लिए भुगतान पर सहमति दी थी, जबकि अडानी एंटरप्राइजेज ने अलग से ईरान प्रतिबंधों से जुड़े मामले में समझौता किया।

आरोप से कानूनी राहत तक की कहानी

अडानी ग्रुप के लिए नवंबर 2024 एक बड़ा झटका था। अमेरिकी आरोपों के बाद कुछ ही कारोबारी सत्रों में लाखों करोड़ रुपये का मार्केट कैप कम हुआ और निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ी।

इसके बाद कहानी धीरे-धीरे बदली। ग्रुप ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश जारी रखा, कमाई और ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार दिखाया और अपनी परिसंपत्तियों का विस्तार किया।

अब अगस्त 2026 में अमेरिकी आपराधिक मामले के स्थायी रूप से खारिज होने से कानूनी अनिश्चितता का एक बड़ा हिस्सा खत्म हुआ है। इसलिए अडानी ग्रुप की मौजूदा स्थिति को केवल “केस खत्म होने के बाद शेयर चढ़े” के तौर पर देखना अधूरा होगा।

असल तस्वीर यह है कि कानूनी संकट के साथ शुरू हुई गिरावट के बाद बाजार ने ग्रुप के कारोबार, कमाई, निवेश, प्रोजेक्ट्स और वित्तीय स्थिति को भी लगातार दोबारा आंकना शुरू किया। अमेरिकी कोर्ट का फैसला इस रिकवरी की कहानी में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जरूर जोड़ता है।

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
overcast clouds
30 ° C
30 °
27.1 °
70%
4.1m/s
85%
Tue
29 °
Wed
33 °
Thu
36 °
Fri
36 °
Sat
32 °
Video thumbnail
‘तुम अंधा है तो हम क्या करें...’ Gorakhpur में Ravi Kishan का भाषण, ठहाके लगा कर हंसने लगे CM Yogi
04:14
Video thumbnail
हापुड़ में 1300 किलो मिलावटी पनीर पकड़ा गया, फूड सेफ्टी विभाग ने जमीन में दबाकर नष्ट कराया
00:25
Video thumbnail
उत्तराखंड में भारी बारिश, कैंची धाम में उफनाई शिप्रा नदी....
00:06
Video thumbnail
हरीश द्विवेदी के स्वागत से यूपी BJP में नए पावर सेंटर की चर्चा, 2024 में बस्ती से हारे थे चुनाव
01:08
Video thumbnail
उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे पर 5 फीट गहरा गड्ढा, सड़क की गुणवत्ता पर उठे सवाल
00:16
Video thumbnail
CJP Spokesperson Saurav Das : 'सारी मांगें सरकार ने मानी 5 सितंबर का प्रोटेस्ट कैंसिल'
00:36
Video thumbnail
गोरखनाथ पर्वत पहुंचे योगी
00:34
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : “सरकार अपना पैसा बर्बाद न करे बच्चों के खेल में”
00:17
Video thumbnail
GDP ग्रोथ को लेकर PM मोदी का बयान
02:40
Video thumbnail
जयपुर ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर गाली-गलौज और वसूली के आरोप
01:37

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related