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खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल: 2025-26 में 2.23 लाख नमूनों की जांच, 40 हजार से ज्यादा मानकों पर खरे नहीं उतरे

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AIN NEWS 1 नई दिल्ली। देश में रोजमर्रा के खान-पान की चीजों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में साझा किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 40,023 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। यानी जांचे गए नमूनों में करीब 17.9 फीसदी नमूने non-conforming निकले। आसान भाषा में कहें तो जांच के दौरान लगभग हर 5 से 6 नमूनों में से एक में किसी न किसी तरह की खामी सामने आई।

हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है। Non-conforming का मतलब यह नहीं है कि ये सभी नमूने जहरीले या मिलावटी थे। इस श्रेणी में खाद्य पदार्थों का unsafe होना, तय गुणवत्ता से कम होना, लेबलिंग में गड़बड़ी या दूसरी नियामकीय कमियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए इन आंकड़ों को सीधे-सीधे “हर पांचवां खाद्य पदार्थ जहरीला” कहना सही नहीं होगा।

2025-26 में बढ़ी खाद्य सुरक्षा जांच

सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक खाद्य सुरक्षा को लेकर निगरानी और जांच का दायरा पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में FSSAI और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने 5,20,566 निरीक्षण किए।

तुलना करें तो 2024-25 में यह संख्या 4,01,391 और 2023-24 में 3,57,072 थी। यानी पिछले कुछ वर्षों में खाद्य कारोबारियों और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इसी बढ़ी हुई निगरानी के दौरान 2.23 लाख से ज्यादा खाद्य नमूने प्रयोगशालाओं में भेजे गए और उनमें से 40,023 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2025-26 के आंकड़े फिलहाल provisional यानी अस्थायी हैं। आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें कुछ बदलाव संभव है।

सिर्फ जांच नहीं, कार्रवाई भी हुई

खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई भी की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के दौरान 31,878 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 1,918 मामलों में आपराधिक दोषसिद्धि हुई।

इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में खाद्य कारोबारियों के खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी हुई है। इस अवधि में 4,461 खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 11,493 लाइसेंस रद्द किए गए। यानी कुल मिलाकर करीब 16 हजार लाइसेंसों पर निलंबन या रद्दीकरण जैसी कार्रवाई हुई।

यह आंकड़ा बताता है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल नमूने लेने तक कार्रवाई सीमित नहीं है। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कदम भी उठाए जाते हैं।

2024-25 में भी सामने आई थी बड़ी तस्वीर

ताजा आंकड़ों से पहले वित्त वर्ष 2024-25 में भी खाद्य नमूनों की जांच में बड़ी संख्या में खामियां सामने आई थीं।

उस साल 1,70,535 नमूनों का विश्लेषण किया गया था। इनमें 34,388 नमूने non-conforming पाए गए। यानी करीब 20.17 फीसदी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे।

इन 34,388 नमूनों को एक ही नजर से देखना ठीक नहीं होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें 7,945 नमूने unsafe श्रेणी में थे, जबकि बड़ी संख्या में नमूने sub-standard या अन्य नियामकीय खामियों से जुड़े थे। इसलिए “34 हजार से ज्यादा नमूने खतरनाक थे” कहना आंकड़ों की सही व्याख्या नहीं होगी।

यही वह अंतर है जिसे आम उपभोक्ता के लिए समझना जरूरी है। किसी उत्पाद का sub-standard होना और उसका unsafe होना एक जैसी बात नहीं है।

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2025-26 में उत्तर प्रदेश की स्थिति

राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में non-conforming नमूनों की संख्या सबसे ज्यादा बताई गई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में उत्तर प्रदेश में 39,519 नमूनों का विश्लेषण किया गया और इनमें 20,427 नमूने non-conforming पाए गए।

यह आंकड़ा प्रथम दृष्टया काफी बड़ा दिखाई देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में बिकने वाला हर दूसरा खाद्य पदार्थ खराब है। यहां भी बात जिन नमूनों की जांच हुई, उनमें non-conforming पाए गए नमूनों के अनुपात की है।

सैंपलिंग किन स्थानों और किन उत्पादों से हुई, इसका असर भी आंकड़ों पर पड़ सकता है। इसलिए इन आंकड़ों से पूरे बाजार में उपलब्ध सभी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का सीधा अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

राजस्थान में भी चिंता की स्थिति

राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के संदर्भ में राजस्थान के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में राजस्थान में 17,325 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें 4,594 नमूने non-conforming पाए गए। यानी करीब 26.5 फीसदी नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

2024-25 में राजस्थान में 13,840 नमूनों की जांच में 3,788 नमूने non-conforming पाए गए थे। इस लिहाज से राज्य में खाद्य सुरक्षा जांच और उसके नतीजों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।

क्या देश में मिलावट बढ़ रही है?

इन आंकड़ों के आधार पर सीधे यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल है कि देश में खाद्य मिलावट निश्चित रूप से बढ़ रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सरकार द्वारा जारी non-conforming आंकड़ों में अलग-अलग प्रकार की कमियां शामिल होती हैं।

इसके अलावा 2025-26 में जांच और निरीक्षण दोनों का दायरा भी काफी बढ़ा है। ज्यादा जांच होने पर नियमों का उल्लंघन करने वाले ज्यादा नमूने सामने आना स्वाभाविक है।

इसलिए इन आंकड़ों की सही तस्वीर यह है कि खाद्य सुरक्षा की निगरानी बढ़ी है और जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नमूने सामने आए हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है?

खाद्य सुरक्षा का मुद्दा सीधे आम आदमी की सेहत और जेब से जुड़ा है। दूध, मसाले, मिठाई, तेल, पैकेज्ड फूड, पेय पदार्थ और दूसरी रोजमर्रा की चीजों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी जरूरी है।

उपभोक्ताओं को भी पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि, सामग्री की सूची और लेबलिंग जरूर देखनी चाहिए। खुले में बिकने वाली चीजों को खरीदते समय भी साफ-सफाई और भंडारण की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है।

सरकार के ताजा आंकड़े निश्चित तौर पर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को दिखाते हैं। 2025-26 में 2,23,808 नमूनों की जांच और 40,023 non-conforming नमूने यह बताते हैं कि खाद्य गुणवत्ता पर निगरानी की जरूरत अभी भी बड़ी है। साथ ही, रिकॉर्ड संख्या में निरीक्षण और कानूनी कार्रवाई यह भी दिखाती है कि प्रवर्तन तंत्र को सक्रिय किया जा रहा है।

सबसे जरूरी बात यह है कि इन आंकड़ों को सनसनीखेज तरीके से पेश करने के बजाय उनकी सही श्रेणियों के साथ समझाया जाए। हर non-conforming नमूना असुरक्षित नहीं होता, लेकिन बड़ी संख्या में मानकों से विचलन उपभोक्ताओं और नियामक एजेंसियों दोनों के लिए गंभीर संकेत जरूर है।

India’s latest food safety data shows that 2,23,808 food samples were analysed during 2025-26, with 40,023 samples found non-conforming to food safety standards. The latest FSSAI food safety data also records more than 5.2 lakh inspections, along with civil penalties and criminal convictions. Uttar Pradesh reported the highest number of non-conforming samples among states. However, non-conforming food samples do not necessarily mean all were adulterated or unsafe, as the category can include sub-standard quality, labelling and other regulatory violations.

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