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मुंब्रा को ‘हरे रंग’ में रंगने वाले बयान पर घिरीं AIMIM पार्षद सहर शेख, महाराष्ट्र की राजनीति में मचा घमासान!

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AIN NEWS 1: महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके से AIMIM की नवनिर्वाचित पार्षद सहर शेख का एक बयान सियासी तूफान की वजह बन गया है। चुनाव जीतने के बाद दिए गए उनके एक भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे मुंब्रा को ‘हरे रंग’ में रंगने की बात करती नजर आ रही हैं। इस बयान को लेकर न सिर्फ राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, महाराष्ट्र में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को मुंब्रा इलाके में अच्छी सफलता मिली है। इसी कड़ी में सहर शेख पार्षद चुनी गईं। जीत के बाद समर्थकों के बीच दिए गए एक भावनात्मक भाषण में उन्होंने कहा,

“आपने उनके घमंड को तोड़ दिया है, जिन्हें लगता था कि हम किसी के सहारे हैं। लोग भूल गए थे कि हम सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के मोहताज हैं, किसी के बाप के नहीं।”

इसके बाद उन्होंने आगे कहा कि आने वाले चुनावों में मुंब्रा को ‘हरे रंग’ में रंग दिया जाएगा। बस इसी एक पंक्ति ने पूरे भाषण को विवादों के केंद्र में ला दिया।

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वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विवाद

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने इस बयान को धार्मिक रंग देने की कोशिश बताया, तो कुछ ने इसे सीधे तौर पर साम्प्रदायिक संकेत करार दिया। विपक्षी दलों ने AIMIM पर समाज को बांटने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के बयान महाराष्ट्र की सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के बाद इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को सोच-समझकर बोलना चाहिए।

AIMIM पार्षद सहर शेख की सफाई

विवाद बढ़ता देख सहर शेख ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कथन को गलत संदर्भ में लिया जा रहा है। सहर शेख के मुताबिक,

“मैंने ‘हरा रंग’ इसलिए कहा क्योंकि यह हमारी पार्टी AIMIM के झंडे का रंग है। इसका कोई धार्मिक या साम्प्रदायिक मतलब निकालना गलत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद सिर्फ पार्टी की राजनीतिक मजबूती की बात करना था, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना। सहर शेख ने दावा किया कि उनके पूरे भाषण को सुनने पर साफ हो जाएगा कि उन्होंने कहीं भी नफरत या विभाजन की बात नहीं की।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

हालांकि सफाई के बाद भी मामला शांत होता नजर नहीं आया। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) समेत कई दलों ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया। नेताओं का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल जनता में गलत संदेश देता है।

वहीं AIMIM समर्थकों का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर मुद्दे को तूल दे रहा है। उनका तर्क है कि हर पार्टी अपने झंडे और विचारधारा के प्रतीकों का इस्तेमाल करती है, लेकिन AIMIM के मामले में उसे साम्प्रदायिक चश्मे से देखा जाता है।

मुंब्रा की राजनीतिक पृष्ठभूमि

मुंब्रा इलाका लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है। यहां विभिन्न समुदायों की मिश्रित आबादी है और राजनीतिक बयानबाजी अक्सर सुर्खियों में रहती है। AIMIM ने पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है, जिससे पारंपरिक दलों की चिंता बढ़ी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहर शेख का बयान चुनावी उत्साह में दिया गया एक भावनात्मक वक्तव्य था, लेकिन मौजूदा माहौल में इस तरह के शब्द तुरंत विवाद का रूप ले लेते हैं।

सोशल मीडिया पर दो धड़े

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आए। एक वर्ग सहर शेख का समर्थन करता दिखा और इसे राजनीतिक प्रतीकवाद बताया। वहीं दूसरा वर्ग इसे समाज को बांटने वाला बयान करार देता रहा।

ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #GreenMumbra, #AIMIM और #SeharShaikh जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे। कई यूजर्स ने पूरा वीडियो साझा कर संदर्भ समझने की अपील भी की।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेताओं को सार्वजनिक मंच से बोलते वक्त शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए। आज के डिजिटल दौर में एक छोटा सा बयान भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भले ही सहर शेख का इरादा पार्टी के झंडे की ओर इशारा करना रहा हो, लेकिन ‘हरे रंग’ जैसे शब्द संवेदनशील इलाकों में अलग अर्थ ले सकते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है। किसी कानूनी कार्रवाई की खबर सामने नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इस बयान का असर दिख सकता है, खासकर जब निकाय चुनावों के बाद सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

सहर शेख का ‘मुंब्रा को हरे रंग में रंगने’ वाला बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि राजनीति में शब्दों की ताकत कितनी बड़ी होती है। जहां समर्थक इसे पार्टी की जीत का जश्न मान रहे हैं, वहीं विरोधी इसे समाज को बांटने वाला संदेश बता रहे हैं। सच्चाई शायद इन दोनों के बीच कहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

A political controversy has emerged in Maharashtra after AIMIM councillor Sehar Shaikh’s statement about turning Mumbra “green” following her victory in the civic elections. The remark, made in a celebratory speech, quickly went viral on social media and triggered sharp reactions from opposition parties. While critics accused her of communal messaging, Sehar Shaikh clarified that the green color symbolized the AIMIM party flag and not any religious agenda. The incident has reignited debates around political symbolism, election rhetoric, and communal sensitivity in Thane and surrounding regions.

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