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प्रयागराज: गंगा में इफ्तार पार्टी मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से 8 आरोपियों को जमानत, वाराणसी केस में नया मोड़!

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प्रयागराज: गंगा में इफ्तार पार्टी मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से 8 आरोपियों को राहत

AIN NEWS 1: प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी के चर्चित गंगा नदी इफ्तार पार्टी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आठ आरोपियों को जमानत दे दी है। यह वही मामला है जिसने मार्च 2026 में पूरे उत्तर प्रदेश में विवाद खड़ा कर दिया था। गंगा नदी की बीच धारा में नाव पर इफ्तार पार्टी करने और कथित तौर पर चिकन बिरयानी खाने के बाद उसकी हड्डियां गंगा में फेंकने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी।

इस मामले में पहले निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से अब उन्हें राहत मिल गई है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

मार्च 2026 में सामने आया था विवाद

पूरा मामला वाराणसी के पंचगंगा घाट क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। बताया गया कि रमजान के दौरान कुछ लोग नाव लेकर गंगा नदी की बीच धारा में पहुंचे थे, जहां इफ्तार पार्टी आयोजित की गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ लोग नाव पर बैठकर खाना खाते दिखाई दिए थे। आरोप लगाया गया कि पार्टी में चिकन बिरयानी खाई गई और खाने के बाद हड्डियां तथा अन्य कचरा गंगा नदी में फेंका गया।

वीडियो वायरल होते ही कई हिंदू संगठनों ने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि गंगा नदी करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और इस तरह की गतिविधियां धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं। मामले ने तेजी से राजनीतिक रंग भी ले लिया था।

भाजपा युवा मोर्चा नेता ने दर्ज कराया था मुकदमा

इस मामले में भाजपा युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी। तहरीर के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गंगा नदी को प्रदूषित किया गया, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई और नाव चालकों को धमकाने की भी कोशिश की गई।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद कुल 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इनमें आजाद अली, मोहम्मद समीर, मोहम्मद तौसीफ अहमद, मोहम्मद फैजान, मोहम्मद तहसीम, नूर इस्माइल, मोहम्मद अहमद, आमिर कैकी, महफूज आलम, नेहाल अफरीदी, दानिश सैफी, मोहम्मद अव्वल और मोहम्मद अनस समेत अन्य नाम शामिल थे।

किन धाराओं में दर्ज हुआ था केस

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इनमें धार्मिक भावनाएं आहत करने, सार्वजनिक उपद्रव फैलाने, गंगा नदी को प्रदूषित करने और कथित तौर पर नाविकों को धमकाने जैसे आरोप शामिल थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद आरोपियों ने स्थानीय अदालत में जमानत याचिका दाखिल की, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली।

निचली अदालत से नहीं मिली थी राहत

वाराणसी की निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और सार्वजनिक प्रतिक्रिया को देखते हुए तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में जवाब भी मांगा था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आठ आरोपियों को जमानत देने का फैसला सुनाया।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिर गरमाया मामला

इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ संगठनों ने फैसले पर नाराजगी भी जाहिर की है।

हालांकि, अदालत ने जमानत देते समय यह स्पष्ट किया कि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और जांच के आधार पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा ही सुनाया जाएगा।

गंगा की धार्मिक और सांस्कृतिक अहमियत

गंगा नदी भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती है। करोड़ों लोग गंगा को मां का दर्जा देते हैं और इसकी पवित्रता से गहरी आस्था रखते हैं। ऐसे में गंगा से जुड़े किसी भी विवाद पर लोगों की भावनाएं तेजी से जुड़ जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों और नदियों की स्वच्छता बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। वहीं दूसरी ओर कानून विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय अदालत के सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में पुलिस जांच और अदालत की आगे की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। जिन आरोपियों को जमानत मिली है, उन्हें अदालत की शर्तों का पालन करना होगा। वहीं बाकी आरोपियों की कानूनी प्रक्रिया भी जारी रहेगी।

वाराणसी का यह मामला केवल कानून और व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने धार्मिक आस्था, सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर भी बड़ी बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में अदालत की आगे की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

The Allahabad High Court has granted bail to eight accused in the controversial Varanasi Ganga River Iftar Party case that sparked outrage across Uttar Pradesh. The case gained attention after a viral video allegedly showed participants consuming chicken biryani on a boat in the middle of the Ganga River and throwing food waste into the river during an iftar gathering in March 2026. Police had registered a case under charges related to hurting religious sentiments, public nuisance, Ganga pollution, and threatening boatmen. The incident near Panchganga Ghat in Varanasi triggered protests from Hindu organizations and became a major political and social issue in the state.

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